Birth Death Registration New Rules 2026
नई दिल्ली। जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं कराने वालों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक हो जाएगी। केंद्र सरकार ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 को लागू करने की तारीख 1 अक्टूबर 2026 तय कर दी है। गृह मंत्रालय के अधीन भारत के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने 16 सितंबर 2026 को इसकी अधिसूचना जारी की।
इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण असर उन मामलों पर पड़ेगा, जिनमें जन्म या मृत्यु की सूचना लंबे समय बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है। नए कानून में देरी को दो अलग-अलग स्तरों में बांटते हुए संबंधित अधिकारी की मंजूरी और सत्यापन की व्यवस्था की गई है।
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1 से 2 साल की देरी पर किसकी मंजूरी होगी?
अगर जन्म या मृत्यु की सूचना एक साल से अधिक लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन सामान्य तरीके से नहीं होगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के जिलाधिकारी (DM), उप-जिलाधिकारी (SDM) या जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा।
अधिकारी को रजिस्ट्रेशन से पहले घटना से जुड़ी जानकारी की सत्यता की जांच करनी होगी। इसके बाद निर्धारित शुल्क का भुगतान करने पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह प्रावधान 2026 के संशोधन अधिनियम की धारा 13 में किए गए बदलाव का हिस्सा है।
2 साल से ज्यादा पुराना मामला तो कोर्ट का आदेश जरूरी
सबसे बड़ा बदलाव दो साल से अधिक पुरानी जन्म या मृत्यु की घटना के मामले में है। ऐसे मामलों में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश लेना होगा। मजिस्ट्रेट भी घटना की जानकारी की शुद्धता का सत्यापन करने के बाद आदेश देंगे और निर्धारित शुल्क लागू होगा।
इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि 1 अक्टूबर से हर देरी पर कोर्ट जाना जरूरी नहीं होगा। एक साल तक की देरी और दो साल से अधिक की देरी के बीच प्रक्रिया अलग रहेगी, जबकि न्यायिक मजिस्ट्रेट की आवश्यकता दो साल से अधिक पुराने मामलों में होगी।
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सरकार ने नियम में बदलाव क्यों किया?
जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन केवल प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। 2023 के संशोधन के बाद जन्म प्रमाणपत्र को कई महत्वपूर्ण कामों में जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने की व्यवस्था मजबूत हुई है। इसमें शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, विवाह पंजीकरण, सरकारी नियुक्ति, पासपोर्ट और आधार नंबर जैसे कार्य शामिल हैं।
भारत सरकार के अनुसार, डिजिटल रजिस्ट्रेशन और राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर के डेटाबेस से सरकारी सेवाओं और लाभों के लिए रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित बनाने का उद्देश्य भी जुड़ा है। 2023 के संशोधन के बाद कई प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और प्रमाणपत्र की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है।
नए संशोधन का व्यावहारिक संदेश स्पष्ट है—जन्म और मृत्यु की सूचना समय पर दर्ज कराना आगे की प्रशासनिक परेशानी से बचने का सबसे आसान तरीका है। खासकर पुराने रिकॉर्ड वाले परिवारों को अब देरी की स्थिति में संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार से प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी पहले ही ले लेनी चाहिए।
आधिकारिक सत्यापन: भारत सरकार की 16 सितंबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।



