Bilaspur Shocking Accident: 15 फीट से गिरकर मजदूर की मौत, निर्माण कार्य में सुरक्षा की घोर लापरवाही पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुराने मकान का छज्जा तोड़ने के दौरान हुआ हादसा एक मजदूर की जिंदगी छीन गया, जबकि उसका साथी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। दोनों मजदूर करीब 15 फीट की ऊंचाई पर काम कर रहे थे, तभी संतुलन बिगड़ने से वे नीचे गिर पड़े। मृतक की पहचान नरेंद्र साहू के रूप में हुई है। घटना के बाद परिजनों ने मकान मालिक और ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुराने मकान में तोड़फोड़ बनी जानलेवा
जानकारी के अनुसार, अशोक नगर निवासी 38 वर्षीय नरेंद्र साहू अपने साथी पंकज यादव के साथ सरकंडा थाना क्षेत्र के कपिल नगर में एक पुराने मकान का छज्जा तोड़ने का काम कर रहे थे। काम के दौरान दोनों ऊंचाई पर थे। अचानक संतुलन बिगड़ने से दोनों जमीन पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
आसपास मौजूद लोगों ने आवाज सुनकर मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। दोनों को सिम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान नरेंद्र साहू की मौत हो गई। दूसरे मजदूर की हालत गंभीर बताई गई है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू की।
सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, सुरक्षा व्यवस्था का भी है
पुराने मकानों के छज्जे, बालकनी और कमजोर हिस्से तोड़ने का काम सामान्य निर्माण कार्य से अधिक जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे हिस्सों में दरारें, कमजोर जोड़ और अचानक टूटने का खतरा रहता है। ऊंचाई पर काम करते समय यदि सुरक्षित मचान, मजबूत कार्य-मंच, हेलमेट और उपयुक्त फॉल-प्रोटेक्शन की व्यवस्था न हो, तो मामूली संतुलन बिगड़ना भी जानलेवा साबित हो सकता है।
इस मामले में सबसे अहम जांच यह होगी कि मजदूरों को किस तरह काम पर लगाया गया था, ऊंचाई पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे और काम शुरू करने से पहले छज्जे की स्थिति का आकलन हुआ था या नहीं। केवल हेलमेट होना पर्याप्त नहीं है; ऊंचाई से गिरने की आशंका वाले काम में उचित एंकरिंग और सुरक्षा प्रणाली भी जरूरी होती है।
ठेकेदार और मकान मालिक की जिम्मेदारी पर जांच
मजदूरों के परिजनों ने मकान मालिक और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मौके पर सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों तथा संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
निर्माण कार्य में जिम्मेदारी केवल काम पूरा कराने तक सीमित नहीं होती। काम की प्रकृति के अनुसार जोखिम पहचानना, सुरक्षित व्यवस्था करना और श्रमिकों को जरूरी सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या लापरवाही के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
मजदूरों की सुरक्षा को खर्च नहीं, जरूरी निवेश समझना होगा
निर्माण और मरम्मत के छोटे काम अक्सर बिना पर्याप्त योजना के शुरू कर दिए जाते हैं। कई बार ठेकेदार या मकान मालिक लागत और समय बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ऊंचाई से गिरने जैसी दुर्घटनाओं में नुकसान सिर्फ घायल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता—एक परिवार की आय का सहारा छिन सकता है और दूसरे श्रमिक की जिंदगी भी लंबे इलाज पर निर्भर हो सकती है।
ऐसे हादसों को रोकने के लिए ऊंचाई पर काम शुरू करने से पहले कार्यस्थल की जांच, सुरक्षित मचान, उपयुक्त सुरक्षा बेल्ट और हेलमेट, तथा प्रशिक्षित निगरानी की व्यवस्था जरूरी है। पुराने मकानों में तोड़फोड़ के दौरान जोखिम और बढ़ जाता है, इसलिए काम की योजना और सुरक्षा उपायों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
बिलासपुर की यह घटना जांच पूरी होने से पहले किसी की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं करती, लेकिन यह स्पष्ट सवाल जरूर खड़ा करती है: क्या मजदूरों की जान की सुरक्षा के लिए काम शुरू करने से पहले जरूरी इंतजाम किए गए थे? इसका जवाब जांच में सामने आना चाहिए, ताकि दोष तय होने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाए जा सकें।




