Bhilai News: चुनावी काम में बड़ी कार्रवाई, राजस्व उप निरीक्षक सस्पेंड; 3 कर्मचारियों को 24 घंटे का अल्टीमेटम
भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई में मतदाता सूची तैयार करने के काम में लापरवाही बरतना कर्मचारियों को भारी पड़ गया है। निर्वाचन संबंधी कार्यों में देरी और निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं करने के मामले में निगम आयुक्त सुरुचि सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व उप निरीक्षक विनोद वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि तीन अन्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में दर्ज जानकारी की शुद्धता और समय पर उसका अद्यतन होना किसी भी चुनाव की निष्पक्षता के लिए बुनियादी जरूरत है। डेटा एंट्री, मतदाताओं के भाग और अनुभाग का निर्धारण तथा संबंधित रिकॉर्ड की जांच में देरी होने से निर्वाचन की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
मतदाता सूची के काम में देरी पर निगम आयुक्त सख्त
निगम प्रशासन की ओर से 16 अक्टूबर को जारी आदेशों में निर्वाचन नामावली तैयार करने से जुड़े कार्यों में कथित लापरवाही को आधार बनाया गया है। संबंधित कर्मचारियों को आधार पत्रक 01 और 02 में आवश्यक मार्किंग तथा सॉफ्टवेयर में डेटा एंट्री के लिए शिफ्टिंग का काम समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्रशासन के अनुसार, निर्धारित कार्य में देरी और लापरवाही के मामले सामने आने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जहां एक कर्मचारी को निलंबित किया गया है, वहीं तीन अन्य कर्मचारियों से जवाब मांगा गया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर उनके खिलाफ भी निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई की जा सकती है।
विनोद वर्मा तत्काल प्रभाव से निलंबित
राजस्व उप निरीक्षक विनोद वर्मा को निर्वाचन संबंधी काम में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है। वे वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड-23 के भाग संख्या 190 में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में तैनात थे।
उन पर मतदाता सूची के आधार पत्रक 01 और 02 में भाग एवं अनुभाग निर्धारित कर मार्किंग करने तथा सॉफ्टवेयर में डेटा एंट्री के लिए जरूरी शिफ्टिंग का काम समय पर नहीं कराने का आरोप है।
निगम आयुक्त ने इस मामले को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3(1), 3(2) और 3(3) के उल्लंघन से संबंधित माना है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जोन-01 के राजस्व विभाग में निर्धारित किया गया है।
तीन कर्मचारियों को 24 घंटे में देना होगा जवाब
निगम प्रशासन ने निर्वाचन कार्यों में कथित लापरवाही के मामले में तीन अन्य कर्मचारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
- अमिशा घनघोरकर, भृत्य: वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड-04, भाग संख्या 28 में BLO की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनके खिलाफ निर्वाचन संबंधी कार्य में देरी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- शुभम रामटेके, सहायक ग्रेड-03: वार्ड-12, भाग संख्या 139 में BLO के रूप में तैनात थे। उन पर आधार पत्रकों की मार्किंग और सॉफ्टवेयर में शिफ्टिंग से जुड़े कार्यों में देरी तथा अरुचि बरतने का आरोप है।
- महेन्द्र त्रिपाठी, पम्प सहायक: वार्ड-07, भाग संख्या 47 में BLO की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके खिलाफ मतदाता सूची से संबंधित आधार पत्रक 01 और 02 की प्रविष्टियों में लापरवाही के आरोप में नोटिस जारी किया गया है।
तीनों कर्मचारियों को नोटिस प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देना होगा। इसके बाद प्रशासन उनके जवाब का मूल्यांकन करेगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
मतदाता सूची में छोटी गलती भी क्यों बन सकती है बड़ी समस्या?
मतदाता सूची तैयार करना केवल सरकारी रिकॉर्ड में जानकारी दर्ज करने का काम नहीं है। इसमें मतदाताओं की पहचान, संबंधित मतदान क्षेत्र, भाग और अनुभाग का सही निर्धारण तथा उपलब्ध जानकारी का व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना शामिल है।
यदि इस प्रक्रिया में लापरवाही होती है, तो मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियां, रिकॉर्ड के मिलान में परेशानी और सुधार संबंधी शिकायतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, भिलाई निगम के इस मामले में किसी मतदाता का नाम वास्तव में गलत दर्ज होने या किसी को मतदान से वंचित होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल कार्रवाई का आधार निर्वाचन संबंधी कार्यों में कथित देरी और लापरवाही है।
समय पर डेटा एंट्री पूरी होने से आगे की जांच, रिकॉर्ड का सत्यापन और निर्धारित समय-सीमा में निर्वाचन संबंधी तैयारियों को पूरा करने में मदद मिलती है। यही कारण है कि ऐसे कामों में कर्मचारियों की जवाबदेही महत्वपूर्ण मानी जाती है।
निगम प्रशासन के सामने अब क्या चुनौती?
इस कार्रवाई के बाद निगम प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। पहली, निर्वाचन से जुड़े सभी लंबित कार्यों को निर्धारित समय में पूरा कराना। दूसरी, यह सुनिश्चित करना कि अनुशासनात्मक कार्रवाई निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत हो और संबंधित कर्मचारियों के स्पष्टीकरण पर उचित विचार किया जाए।
सिर्फ निलंबन या नोटिस जारी करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। कार्यों की नियमित समीक्षा, स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारण, कर्मचारियों को तकनीकी सहायता और समय-सीमा की निगरानी भी जरूरी है। यदि सॉफ्टवेयर या कार्य आवंटन से जुड़ी कोई व्यावहारिक बाधा सामने आती है, तो उसका समाधान करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
आयुक्त सुरुचि सिंह के नेतृत्व में की गई यह कार्रवाई निर्वाचन संबंधी कार्यों को गंभीरता से लेने का संदेश देती है। अब आगे यह देखना होगा कि नोटिस के जवाबों पर क्या निर्णय होता है और मतदाता सूची तैयार करने का काम कितनी तेजी से पूरा किया जाता है।




