इस्लामाबाद: पाकिस्तान इस समय भीषण बारिश और बाढ़ संकट से जूझ रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने पंजाब प्रांत में असाधारण चेतावनी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि भारत के दो बड़े बांधों से पानी छोड़े जाने और लगातार बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि छह जिलों में सेना को मदद के लिए बुलाया गया है।

Punjab प्रांत में सबसे भयंकर असर
पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, जिसे देश की “फूड फैक्ट्री” कहा जाता है, इस बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। पाकिस्तान की कुल 24 करोड़ आबादी में से आधी से ज्यादा यहीं रहती है। लगातार बारिश और भारत से छोड़े गए पानी ने रावी, चिनाब और सतलुज नदियों को खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है।
कई जगहों पर बांधों में दरारें पड़ी हैं, पुल बह गए हैं और संपर्क मार्ग टूटने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। नरोवाल, सियालकोट और शकरगढ़ जैसे इलाके बुरी तरह प्रभावित बताए जा रहे हैं।
NDMA का हाई अलर्ट
NDMA ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में हालात को “बेहद गंभीर” बताया। जस्सर में रावी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और तटबंध डूबने का खतरा है। चिनाब और सतलुज नदियों में भी लगातार पानी बढ़ रहा है। एजेंसी ने निचले इलाकों के परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने की अपील की है।
छह जिलों में बुलाई गई सेना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने रावी नदी में करीब 2,00,000 क्यूसेक और चिनाब नदी में 1,00,000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ा है। इससे आने वाले 48 घंटे पाकिस्तान के लिए बेहद खतरनाक बताए जा रहे हैं।
बाढ़ के हालात से निपटने के लिए लाहौर, कसूर, सियालकोट, फैसलाबाद, नरोवाल और ओकारा जिलों में सेना को तैनात किया गया है। सेना और रेस्क्यू टीमें मिलकर प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत कार्यों में लगी हैं।
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