22 जून की घटना की जांच में 25 वर्षीय जे. केनेथ के लैपटॉप से AI से संबंधित कई संदिग्ध सवाल मिलने का पुलिस का दावा; फॉरेंसिक जांच में डिजिटल रिकॉर्ड और घटनास्थल से मिले सामान की पड़ताल जारी
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बेंगलुरु। कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित सीगेहल्ली इलाके में जून 2026 में हुए ट्रिपल मर्डर केस की जांच में पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी अहम जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, मामले के आरोपी 25 वर्षीय जे. केनेथ के लैपटॉप की जांच के दौरान AI से जुड़े ऐसे सवालों का रिकॉर्ड मिला, जिनमें लोगों पर हिंसक हमला करने और उन्हें काबू करने जैसी परिस्थितियों के बारे में जानकारी तलाशने के संकेत मिले थे।
पुलिस के अनुसार, ये डिजिटल गतिविधियां 22 जून की घटना से पहले की हैं। हालांकि, जांच एजेंसियां अभी यह पूरी तरह स्थापित नहीं कर पाई हैं कि संबंधित AI सिस्टम ने केनेथ को वास्तव में क्या जवाब दिए थे। लैपटॉप और अन्य डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
AI सर्च हिस्ट्री से सामने आया डिजिटल सुराग
जांच के दौरान पुलिस को केनेथ के लैपटॉप में AI से संबंधित कई सवाल मिले। रिपोर्टों के मुताबिक, इन सवालों का संबंध अलग-अलग हिंसक परिस्थितियों और लोगों को काबू करने के तरीकों से था। इसके अलावा, डिजिटल रिकॉर्ड में बैंक से जुड़े कर्ज के दबाव और दिवालियापन से संबंधित सवाल भी पाए गए।
घटनास्थल से कुछ ऐसी सामग्री मिलने की भी जानकारी सामने आई है, जिसकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि डिजिटल सर्च और घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं।
मामला आर्थिक विवाद से भी जुड़ा
मामले की जांच में सामने आई चार्जशीट के अनुसार, इस घटना की पृष्ठभूमि में आर्थिक दबाव और पारिवारिक विवाद का भी उल्लेख है। रिपोर्टों के मुताबिक, श्वेता ने अपने लिव-इन पार्टनर के लिए करीब ₹52 लाख का कर्ज लिया था। कर्ज से जुड़े नोटिस परिवार तक पहुंचने के बाद विवाद बढ़ने की बात जांच में सामने आई है।
22 जून को सीगेहल्ली के एक अपार्टमेंट में श्वेता के माता-पिता और उनकी बहन पर हमला हुआ। पुलिस के अनुसार, तीनों की बाद में मौत हो गई। मामले में श्वेता और केनेथ को गिरफ्तार किया गया था।
AI की भूमिका पर उठे नए सवाल
इस मामले ने आपराधिक जांच में AI और डिजिटल रिकॉर्ड की भूमिका को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस की जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि AI से की गई बातचीत या सर्च गतिविधियों का कथित अपराध की तैयारी से कितना प्रत्यक्ष संबंध था।
यह भी महत्वपूर्ण है कि AI सर्च हिस्ट्री अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं करती। इसके लिए जांच एजेंसियों को डिजिटल रिकॉर्ड के साथ फॉरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध सबूतों को जोड़ना होगा।
बेंगलुरु पुलिस अब इस मामले में डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को मिलाकर आगे की जांच कर रही है।



