बेमेतरा में चौंकाने वाला खुलासा: बच्चा चोरी की कहानी निकली झूठी, मेडिकल जांच ने खोला बड़ा राज
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के नवागढ़ क्षेत्र में नवजात शिशु को दो अज्ञात महिलाओं द्वारा ले जाने की शिकायत ने पुलिस को जांच में उलझा दिया था। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर मामला बिल्कुल अलग निकला। पुलिस के मुताबिक, बच्चा चोरी की बताई गई घटना के पीछे किसी अज्ञात गिरोह का हाथ नहीं था, बल्कि परिवार से सच्चाई छिपाने के लिए प्रसव की झूठी कहानी गढ़ी गई थी।
यह मामला केवल पुलिस को गुमराह करने की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इससे यह भी सामने आता है कि पारिवारिक दबाव और सामाजिक प्रतिक्रिया का डर किस तरह किसी व्यक्ति को गंभीर कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है। हालांकि, ऐसी परिस्थितियां झूठी शिकायत को उचित नहीं ठहरातीं, क्योंकि इससे पुलिस के संसाधन खर्च होते हैं और वास्तविक अपराधों की जांच प्रभावित हो सकती है।
शिकायत के बाद सक्रिय हुई पुलिस, अज्ञात महिलाओं की तलाश शुरू
पुलिस के अनुसार, नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम जेवरा-एस में 3 अक्टूबर 2026 को कथित घटना हुई थी। अगले दिन, 4 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में बताया गया कि घर के सदस्य बाहर गए थे, तभी दो अज्ञात महिलाओं ने प्रसव कराया और नवजात शिशु को लेकर चली गईं।
नवजात के गायब होने की सूचना गंभीर थी। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई, घटनास्थल का निरीक्षण, संबंधित लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच बेहद जरूरी होती है। इसी वजह से पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच अभियान शुरू किया।
पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हरीश यादव और एसडीओपी भूषण एक्का के नेतृत्व में टीम ने घटनास्थल की जांच की। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद भी ली गई और कथित रूप से बच्चे को ले जाने वाली महिलाओं की तलाश की गई।
परिवार से सच्चाई छिपाने के लिए बनाई गई थी कहानी
पुलिस की विवेचना में सामने आया कि महिला ने परिवार के सामने खुद को गर्भवती बताया था, जबकि पुलिस के मुताबिक, फरवरी 2026 में उसका गर्भपात हो चुका था। इससे पहले भी तीन बार गर्भपात होने की बात जांच के दौरान सामने आई।
पुलिस के अनुसार, महिला को आशंका थी कि यदि परिवार को वास्तविक स्थिति का पता चला, तो उसे गलत समझा जाएगा। इसी डर के कारण उसने गर्भवती होने की बात जारी रखी। पेट बड़ा दिखाने के लिए साड़ी को दोहरा मोड़कर पहनने और घटना के दिन शरीर पर आलता-माहुर रंग लगाकर प्रसव जैसी स्थिति दर्शाने की बात भी पुलिस ने बताई।
परिजनों के घर लौटने पर महिला ने कथित तौर पर कहानी सुनाई कि दो अज्ञात महिलाएं नवजात को अपने साथ ले गईं। शुरुआत में यह शिकायत बच्चे के अपहरण की आशंका पैदा कर रही थी, लेकिन आगे की जांच में इसके आधार पर सवाल उठने लगे।
मेडिकल जांच ने बदली जांच की दिशा
मामले में निर्णायक भूमिका चिकित्सकीय परीक्षण की रही। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में घटना के आसपास महिला के गर्भवती होने या प्रसव होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद पूछताछ और अन्य जांच के आधार पर पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि नवजात को चोरी किए जाने की कहानी झूठी थी।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान महिला ने कहानी गढ़ने की बात स्वीकार की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे पुलिस की जांच में सामने आया निष्कर्ष मानना चाहिए; मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सक्षम न्यायिक प्राधिकारी के निष्कर्ष अलग विषय हैं।
झूठी सूचना देने पर बीएनएस की धारा 217 के तहत कार्रवाई
पूरी विवेचना के बाद पुलिस ने झूठी सूचना देकर सरकारी अधिकारी को गुमराह करने के आरोप में महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 217 के तहत कार्रवाई की है।
इस तरह की शिकायतों का असर केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने, संभावित संदिग्धों की तलाश करने, पूछताछ और फॉरेंसिक जांच में समय लगाना पड़ता है। यदि शिकायत के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति पर संदेह किया जाए, तो उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा और निजी जीवन भी प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, ऐसे मामलों की जांच में यह भी जरूरी है कि पुलिस हर शिकायत को पहले गंभीरता से ले और फिर साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाले। शुरुआती सूचना को अंतिम सच मान लेने के बजाय मेडिकल रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और बयानों का मिलान करना निष्पक्ष जांच के लिए अहम है।
सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव पर भी जरूरी है ध्यान
इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू पारिवारिक और सामाजिक दबाव है। गर्भावस्था, गर्भपात और संतान से जुड़े विषय कई परिवारों में संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे मामलों में ताने, दोषारोपण या सामाजिक अस्वीकृति का डर व्यक्ति को सच बताने से रोक सकता है।
लेकिन डर या शर्म के कारण झूठी कहानी गढ़ना समस्या का समाधान नहीं है। परिवारों में संवेदनशील मुद्दों पर संवाद, भावनात्मक सहयोग और बिना अपमान के बात सुनने का माहौल जरूरी है। इससे संकट की स्थिति में व्यक्ति को तथ्य छिपाने के बजाय मदद मांगने का अवसर मिल सकता है।
पुलिस की अपील: शिकायत दर्ज कराते समय सही जानकारी दें
बेमेतरा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी घटना की सूचना देते समय सही और तथ्यात्मक जानकारी दें। झूठी रिपोर्ट से बचना जरूरी है, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है और कानून के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इस मामले में पुलिस की जांच ने कथित बच्चा चोरी की कहानी को गलत साबित किया। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया में आरोपों का निपटारा कानून के अनुसार होगा। घटना यह भी याद दिलाती है कि गंभीर शिकायतों में त्वरित कार्रवाई जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है साक्ष्यों के आधार पर सच तक पहुंचना।



