संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान का असली चेहरा एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। एक रिपोर्ट और बयान के जरिए यह स्पष्ट हुआ कि पाकिस्तान लंबे समय से भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकियों को भेजता रहा है। पाकिस्तान के प्रतिनिधि द्वारा दिए गए कबूलनामे ने न केवल उसकी झूठी नीतियों को उजागर किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारत में हो रहे कई आतंकी हमलों के पीछे पड़ोसी देश की साजिश रही है।
भारत के खिलाफ आतंक की फैक्ट्री बना पाकिस्तान
यूएन में हुए एक सत्र के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने यह स्वीकार किया कि “भारत में सक्रिय कुछ आतंकी समूहों की जड़ें पाकिस्तान की भूमि से जुड़ी हैं।” यह बयान उस समय आया जब कई देशों ने आतंकवाद पर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए। दरअसल, पिछले कई दशकों से भारत लगातार यह दावा करता आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) भारत विरोधी आतंकी संगठनों को फंडिंग और ट्रेनिंग देती है। अब पाकिस्तान के खुद के स्वीकार करने से यह दावा और भी मजबूत हो गया है।
भारत की सख्त प्रतिक्रिया: ‘दुनिया देखे पाकिस्तान का असली चेहरा’
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में तुरंत जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान को अब यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि आतंकवाद उसकी विदेश नीति का अहम हिस्सा बन चुका है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा,
पाकिस्तान के इस कबूलनामे ने यह साबित कर दिया है कि भारत में होने वाले आतंकी हमले सिर्फ सीमा पार के नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी से संचालित साजिशें हैं।” भारत ने यूएन में यह भी कहा कि पाकिस्तान अपने आतंकी ढांचे को खत्म करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठ फैलाने में जुटा रहता है। लेकिन अब सच्चाई पूरी दुनिया के सामने आ गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया: ‘PAK पर कार्रवाई जरूरी’
पाकिस्तान के इस बयान के बाद अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान सहित कई देशों ने कहा कि अब समय आ गया है जब पाकिस्तान को आतंकवाद पर दोहरा रवैया छोड़ना होगा। संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद निरोधक समिति (UN CTC) ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कोई भी देश अगर मदद करता है, तो वह खुद अपराधी की श्रेणी में आता है। यह बयान पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश है, जो दशकों से “पीड़ित देश” होने का नाटक करता आ रहा था।
कश्मीर से लेकर मुंबई तक – PAK की साजिशों की लंबी फेहरिस्त
भारत में आतंक फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका नई नहीं है। 1993 के मुंबई धमाकों से लेकर 26/11 के आतंकी हमले, पठानकोट एयरबेस हमला, उरी हमला और पुलवामा ब्लास्ट—हर बार सबूत पाकिस्तान की ओर इशारा करते रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि पाकिस्तान के आतंकी कैंपों में सैकड़ों आतंकी भारत में घुसपैठ की ट्रेनिंग लेते हैं। हाल ही में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के कई मॉड्यूल्स का भंडाफोड़ किया, जिनका सीधा कनेक्शन पाकिस्तान से पाया गया। अब पाकिस्तान के आधिकारिक प्रतिनिधि का बयान इस कड़ी को और मजबूत करता है।
पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर लगा बड़ा धब्बा
यूएन में हुए इस खुलासे से पाकिस्तान की वैश्विक छवि को तगड़ा झटका लगा है। पहले से ही FATF (Financial Action Task Force) की निगरानी में रहा पाकिस्तान अब एक बार फिर से आतंक के समर्थन के कारण निशाने पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद को रोकने के ठोस कदम नहीं उठाता, तो उसे आर्थिक और कूटनीतिक रूप से भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
भारत ने कहा – आतंक के खिलाफ वैश्विक एकजुटता जरूरी
भारत ने यूएन में अपने बयान में कहा कि आतंकवाद किसी धर्म, समुदाय या देश का नहीं होता। इसलिए पूरी दुनिया को एकजुट होकर ऐसे देशों के खिलाफ कड़ा कदम उठाना चाहिए जो आतंकवाद को “राज्य नीति” की तरह अपनाए हुए हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि पाकिस्तान जैसे देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएं ताकि आतंक के वित्तीय स्रोत पूरी तरह खत्म किए जा सकें।


