छत्तीसगढ़ का बीजापुर जिला एक बार फिर माओवादी हिंसा से दहल गया है। शुक्रवार देर रात नक्सलियों ने दो निर्दोष ग्रामीणों की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी। यह घटना बीजापुर के गंगालूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक सुदूर गांव में हुई, जहां ग्रामीणों को पहले धमकाया गया और बाद में जान से मार दिया गया। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
गांव में रात के अंधेरे में घुसे नक्सली
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करीब आधा दर्जन हथियारबंद माओवादी शुक्रवार देर रात गांव में पहुंचे। उन्होंने गांव के दो लोगों — माडवी सोमडू और कोसा हिड़मे — को घर से बाहर बुलाया और उन पर “पुलिस मुखबिरी” का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। सुबह जब गांववालों ने शव देखे, तो इलाके में मातम छा गया। पुलिस के मुताबिक, यह घटना नक्सलियों की रणनीतिक हिंसा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों में डर पैदा करना और सुरक्षा बलों के खिलाफ माहौल बनाना है।
घटना की पुष्टि और पुलिस की कार्रवाई
बीजापुर के एसपी जयंत वैश्य ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि “गंगालूर थाना क्षेत्र में माओवादियों ने दो ग्रामीणों की हत्या की है। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके के लिए रवाना किया गया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है और इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की इस घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। CRPF, DRG और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम को जंगलों में कॉम्बिंग ऑपरेशन के लिए भेजा गया है।
माओवादियों का डर और ग्रामीणों की परेशानियां
बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे इलाके लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के केंद्र रहे हैं। यहां के ग्रामीण अक्सर माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच फंसे रहते हैं। नक्सली अक्सर ग्रामीणों को “पुलिस मुखबिर” कहकर जान से मार देते हैं, जिससे गांवों में आतंक का माहौल बना रहता है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हम न पुलिस के पक्ष में बोल सकते हैं, न नक्सलियों के खिलाफ। अगर कुछ कहा, तो जान चली जाती है।” ऐसी घटनाओं के कारण ग्रामीणों में लगातार डर बना रहता है और विकास कार्यों पर भी असर पड़ता है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति
राज्य सरकार ने बीजापुर सहित पूरे बस्तर क्षेत्र में एंटी-माओवादी अभियान तेज कर दिया है। सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक और ड्रोन की मदद से जंगलों में नक्सलियों की तलाश करने के निर्देश दिए गए हैं। गृह मंत्री विजय शर्मा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि “नक्सलवाद का खात्मा हमारी प्राथमिकता है। निर्दोष ग्रामीणों की हत्या मानवता के खिलाफ है, और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” इसके साथ ही, सरकार ने प्रभावित गांवों में विशेष राहत पैकेज और सुरक्षा चौकियों को मजबूत करने की घोषणा की है।
लगातार बढ़ रही माओवादी गतिविधियां
बीते कुछ महीनों में बीजापुर और सुकमा में नक्सली घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। सितंबर में भी नक्सलियों ने एक सड़क निर्माण कंपनी के दो कर्मचारियों की हत्या कर दी थी। वहीं, अगस्त में एक IED धमाके में दो पुलिस जवान शहीद हो गए थे। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अब माओवादी संगठन अपनी पकड़ कमजोर होते देख आम लोगों पर हमले बढ़ा रहे हैं ताकि वे अपनी मौजूदगी का संदेश दे सकें।
जनता में आक्रोश और शांति की अपील
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा और आक्रोश दोनों देखने को मिला है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन उन्हें सुरक्षा प्रदान करे और गांवों में पुलिस की स्थायी चौकी बनाई जाए। बीजापुर प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और पुलिस के साथ सहयोग करने की अपील की है। साथ ही, क्षेत्र में जल्द ही शांति समिति की बैठक बुलाई जाएगी ताकि ग्रामीणों का विश्वास बहाल किया जा सके।


