Fever Symptoms: बुखार में शरीर गर्म फिर भी क्यों लगती है तेज ठंड? जानिए इसके पीछे का चौंकाने वाला वैज्ञानिक कारण
बुखार होने पर एक अजीब स्थिति अक्सर देखने को मिलती है। शरीर का तापमान बढ़ रहा होता है, माथा गर्म महसूस होता है, लेकिन मरीज को ठंड लगती है। कई बार इतनी कंपकंपी होती है कि व्यक्ति कंबल ओढ़ने के बाद भी राहत महसूस नहीं करता। कुछ लोगों के दांत किटकिटाने लगते हैं और हाथ-पैर भी ठंडे पड़ जाते हैं।
सवाल यह है कि जब शरीर के अंदर गर्मी बढ़ रही है, तब दिमाग ठंड महसूस करने का संकेत क्यों देता है? इसका जवाब हमारे मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के बीच होने वाली प्रक्रिया में छिपा है। दरअसल, बुखार केवल शरीर का गर्म होना नहीं है, बल्कि संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा तंत्र की एक नियंत्रित प्रतिक्रिया भी है।
दिमाग का Hypothalamus तय करता है शरीर कितना गर्म रहेगा
हमारे मस्तिष्क में हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) नाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसे शरीर का प्राकृतिक तापमान नियंत्रक कहा जा सकता है। इसका काम शरीर के तापमान को सामान्य सीमा में बनाए रखने में मदद करना है।
एक स्वस्थ वयस्क का औसत शरीर तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस माना जाता है, हालांकि यह उम्र, दिन के समय और तापमान मापने के तरीके के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।
जब शरीर में वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण होता है, तब प्रतिरक्षा प्रणाली सक्रिय हो जाती है। इस दौरान शरीर में कुछ रासायनिक संदेशवाहक निकलते हैं, जो मस्तिष्क तक तापमान बढ़ाने का संकेत पहुंचाते हैं।
इन संदेशों के प्रभाव से हाइपोथैलेमस शरीर का निर्धारित तापमान यानी सेट पॉइंट बढ़ा देता है। यहीं से बुखार चढ़ने की प्रक्रिया शुरू होती है।
शरीर गर्म होने के बावजूद ठंड क्यों महसूस होती है?
बुखार के दौरान ठंड लगने की सबसे बड़ी वजह शरीर के वास्तविक तापमान और मस्तिष्क द्वारा निर्धारित नए तापमान के बीच का अंतर है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का सामान्य तापमान 37 डिग्री है और संक्रमण के कारण हाइपोथैलेमस इसे 39 डिग्री तक पहुंचाने का संकेत देता है, तो शरीर का मौजूदा तापमान दिमाग के हिसाब से अभी कम होता है।
ऐसे में मस्तिष्क शरीर को गर्म करने के लिए कई प्रतिक्रियाएं शुरू कर देता है।
इस दौरान शरीर में तीन प्रमुख बदलाव होते हैं:
- मांसपेशियों में कंपकंपी: मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती और ढीली होती हैं। इससे शरीर में अतिरिक्त गर्मी पैदा होती है।
- त्वचा की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ना: शरीर गर्मी को बाहर जाने से रोकने के लिए त्वचा की रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है। इसलिए हाथ-पैर ठंडे महसूस हो सकते हैं।
- ठंड महसूस होना: व्यक्ति को ऐसा लगता है कि आसपास का वातावरण बहुत ठंडा है, जबकि शरीर का तापमान वास्तव में बढ़ रहा होता है।
इसी वजह से बुखार चढ़ने के समय मरीज को कंबल ओढ़ने, गर्म कपड़े पहनने या गर्म वातावरण में रहने की इच्छा होती है।
बुखार उतरते ही पसीना क्यों आने लगता है?
बुखार चढ़ने और उतरने के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है।
जब संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया कम होने लगती है या बुखार कम करने वाली दवा असर दिखाती है, तब हाइपोथैलेमस तापमान का निर्धारित स्तर दोबारा नीचे कर देता है।
अब शरीर का वास्तविक तापमान नए निर्धारित स्तर से अधिक होता है। इसलिए शरीर अतिरिक्त गर्मी बाहर निकालने की कोशिश करता है।
इस प्रक्रिया में:
- पसीने की ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं।
- त्वचा की रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं।
- शरीर से गर्मी बाहर निकलती है।
- धीरे-धीरे तापमान कम होने लगता है।
यही कारण है कि कई लोगों को बुखार उतरते समय अचानक बहुत पसीना आता है और शरीर पहले की तुलना में हल्का महसूस होने लगता है।
क्या बुखार शरीर के लिए हमेशा नुकसानदायक होता है?
बुखार को हर स्थिति में बीमारी मानकर तुरंत दबाना सही समझ नहीं है। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का हिस्सा है। कुछ संक्रमणों के दौरान बढ़ा हुआ तापमान रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों के लिए प्रतिकूल वातावरण बना सकता है और प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि तेज बुखार को नजरअंदाज कर देना चाहिए। बहुत अधिक तापमान, लंबे समय तक बुखार या अन्य गंभीर लक्षण शरीर के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
इसलिए बुखार का कारण समझना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
बुखार होने पर क्या करें और किन गलतियों से बचें?
बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ सकता है, खासकर जब पसीना अधिक निकल रहा हो। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए।
कुछ जरूरी सावधानियां:
- शरीर का तापमान थर्मामीटर से नियमित रूप से जांचें।
- पर्याप्त आराम करें और हल्के, आरामदायक कपड़े पहनें।
- पानी, सूप और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लेते रहें।
- बहुत मोटे कंबलों में शरीर को जरूरत से ज्यादा न ढकें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाएं न लें।
- बुखार कम करने की दवा उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और उचित खुराक के अनुसार ही लें।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में बुखार को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
सामान्य बुखार कई बार कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, लेकिन कुछ संकेत गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।
यदि बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, बेहोशी, भ्रम, दौरे, गर्दन में अकड़न या अत्यधिक कमजोरी हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। लगातार तेज बुखार या हालत बिगड़ने पर भी डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
तीन महीने से कम उम्र के शिशु का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
समझिए शरीर के इस संकेत का असली मतलब
बुखार में ठंड लगना कोई विरोधाभास नहीं, बल्कि शरीर के तापमान नियंत्रण की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। संक्रमण के दौरान मस्तिष्क तापमान का लक्ष्य बढ़ाता है और शरीर उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कंपकंपी तथा रक्त वाहिकाओं में बदलाव जैसी प्रतिक्रियाएं करता है।
जब तापमान का लक्ष्य वापस सामान्य होता है, तब पसीने के जरिए शरीर अतिरिक्त गर्मी बाहर निकालता है।
इसलिए अगली बार बुखार के दौरान कंपकंपी महसूस हो तो यह समझना जरूरी है कि शरीर के अंदर तापमान नियंत्रित करने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन लक्षणों की गंभीरता को नजरअंदाज करने के बजाय सही समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।




