Kawardha Gold Fraud: सोना डबल करने का खतरनाक झांसा, 7 लाख के जेवर ठगे; महाराष्ट्र से आरोपी गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के कवर्धा में कम समय में सोना दोगुना करने का लालच एक सराफा व्यापारी को भारी पड़ गया। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर भरोसा जीतकर करीब 7 लाख रुपये के सोने के आभूषण ठग लिए गए। मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका दूसरा साथी अब भी फरार है। इस घटना ने एक बार फिर सामने ला दिया है कि लालच और अंधविश्वास का इस्तेमाल करके ठग किस तरह लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं।
धार्मिक आस्था को बनाया ठगी का हथियार
कवर्धा की सराफा लाइन में रहने वाले व्यापारी छोटे लाल सोनी के प्रतिष्ठान पर 6 अक्टूबर 2026 को दो व्यक्ति पहुंचे थे। आरोपियों ने पूजा-पाठ के जरिए सोने को दोगुना करने का दावा किया। अपनी बात पर भरोसा दिलाने के लिए उन्होंने प्रतिष्ठान के सामने स्थित शक्ति मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान करने का प्रस्ताव रखा।
इसी प्रक्रिया के दौरान व्यापारी को विश्वास में लेकर उसकी सोने की चैन, अंगूठी और लॉकेट अपने कब्जे में ले लिए गए। इन आभूषणों का कुल वजन 65.5 ग्राम बताया गया है, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 7 लाख रुपये थी। जेवर मिलने के बाद दोनों आरोपी वहां से फरार हो गए।
इस मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि ठगी के लिए किसी तकनीकी कमजोरी के बजाय धार्मिक विश्वास और जल्दी फायदा कमाने की इच्छा का इस्तेमाल किया गया।
महाराष्ट्र तक पहुंची जांच, सीसीटीवी से मिली अहम मदद
शिकायत मिलने के बाद कवर्धा सिटी कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास किया गया।
जांच के दौरान महाराष्ट्र के जलगांव जिले के भुसावल निवासी 18 वर्षीय हसनैन नासिर अली ईरानी का नाम सामने आया। पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी को नोटिस तामील कराया। पुलिस के मुताबिक, जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने और नोटिस की शर्तों का पालन नहीं किए जाने के बाद वैधानिक प्रक्रिया के तहत उसे हिरासत में लिया गया।
इसके बाद आरोपी को कवर्धा लाया गया, जहां शिकायतकर्ता से उसकी पहचान कराई गई। पूछताछ में उसने कथित तौर पर अपने एक साथी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की।
48 हजार रुपये का हिस्सा, 15 हजार नकद बरामद
पुलिस के अनुसार, ठगी से प्राप्त रकम में आरोपी का हिस्सा 48 हजार रुपये था। इसमें से बची हुई 15 हजार रुपये की नकद राशि उसकी निशानदेही पर बरामद की गई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया।
हालांकि, इस मामले में अभी पूरी रकम और ठगे गए आभूषणों की बरामदगी नहीं हुई है। दूसरा आरोपी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। इसलिए जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण फरार आरोपी तक पहुंचना और शेष संपत्ति का पता लगाना होगा।
सोना डबल करने का दावा आखिर कितना भरोसेमंद?
सोने की कीमत अधिक होने के कारण इससे जुड़े कारोबार में लोगों का आर्थिक हित काफी बड़ा होता है। ऐसे में सोना दोगुना करने, चमत्कारिक तरीके से कीमती धातु बढ़ाने या पूजा-पाठ से धन में असाधारण वृद्धि करने जैसे दावे ठगी का माध्यम बन सकते हैं।
व्यापारियों और आम नागरिकों को यह समझना जरूरी है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से सोने का वास्तविक वजन या शुद्धता अपने आप दोगुनी नहीं हो जाती। ऐसे दावों पर बिना वैज्ञानिक और प्रमाणिक जांच के भरोसा करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
खासतौर पर कारोबारियों को किसी अनजान व्यक्ति को दुकान में रखे कीमती सामान का कब्जा नहीं देना चाहिए। किसी भी असामान्य प्रक्रिया के लिए आभूषण बाहर ले जाने या अपने नियंत्रण से हटाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
फरार आरोपी की गिरफ्तारी और जेवरों की बरामदगी पर नजर
कवर्धा का यह मामला केवल एक व्यापारी के साथ हुई आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि ठगी करने वाले लोग लोगों की आस्था, भरोसे और जल्दी मुनाफा कमाने की चाह को निशाना बना सकते हैं।
अब पुलिस के सामने फरार आरोपी को पकड़ने, ठगी के बाकी पैसों का पता लगाने और आभूषणों की बरामदगी की चुनौती है। मामले की जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे प्रभावी बचाव है। सोना, पैसा या कोई भी कीमती वस्तु किसी के हवाले करने से पहले उसके दावे की वास्तविकता जांचना जरूरी है। चमत्कार के नाम पर किया गया कोई भी आर्थिक वादा सावधानी बरतने का संकेत होना चाहिए।




