Sports Update: राजनांदगांव हॉकी को बड़ी राहत! 2 करोड़ के बेल्जियम ब्लू टर्फ से लौटेगी मैदान की रौनक
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हॉकी की पहचान केवल एक खेल तक सीमित नहीं रही है। इस शहर ने लंबे समय तक खिलाड़ियों को मंच दिया और खेल प्रेमियों के बीच अपनी अलग जगह बनाई। लेकिन अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम की खराब होती सतह ने इस परंपरा को बड़ा झटका दिया। मैदान की स्थिति ऐसी हो गई कि प्रतिष्ठित अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन भी पिछले दो वर्षों से अटका हुआ है।
अब स्टेडियम में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से नया बेल्जियम निर्मित नीला एस्ट्रोटर्फ बिछाने की तैयारी ने उम्मीद जगाई है। यह बदलाव सिर्फ मैदान का रंग और स्वरूप बदलने वाला नहीं है, बल्कि राजनांदगांव में प्रतिस्पर्धी हॉकी को फिर से सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
खराब मैदान ने रोकी थी हॉकी की रफ्तार
किसी भी खेल में खिलाड़ियों की प्रतिभा के साथ-साथ अभ्यास और प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त मैदान जरूरी होता है। खासकर आधुनिक हॉकी में एस्ट्रोटर्फ की गुणवत्ता सीधे खेल की गति, गेंद के नियंत्रण और खिलाड़ियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है।
पुराने टर्फ के खराब होने का असर केवल स्टेडियम की सुविधाओं पर नहीं पड़ा। जब मैदान बड़े टूर्नामेंट के मानकों के अनुरूप नहीं रहता, तो बाहर की टीमें वहां खेलने से बच सकती हैं। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के सामने अपनी क्षमता परखने के अवसर कम मिलते हैं।
राजनांदगांव में पिछले दो वर्षों से अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट का नहीं हो पाना इसी समस्या का संकेत है। ऐसे आयोजन किसी शहर के खेल कैलेंडर का हिस्सा भर नहीं होते; वे स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों से सीखने और चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने का अवसर भी देते हैं।
दो करोड़ की परियोजना में कैसे तैयार होगा नया मैदान?
स्टेडियम में पुराने टर्फ को हटाकर नई सतह तैयार करने का काम किया जा रहा है। निर्माण प्रक्रिया में पहले आधार को तैयार किया जाएगा। इसके लिए डामर की परत बिछाई जा रही है, जिसके ऊपर काले रबर की परत तैयार होगी। इसके बाद नीले रंग का नया एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा।
इस परियोजना में बेल्जियम से टर्फ मंगाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश में इस तरह के एस्ट्रोटर्फ का निर्माण नहीं होने के कारण विदेशी कंपनी को ऑर्डर दिया गया है। आपूर्ति में समय लगने के चलते मैदान को पूरी तरह तैयार होने में अभी इंतजार करना पड़ सकता है।
यहां एक महत्वपूर्ण पहलू गुणवत्ता का है। केवल नया टर्फ बिछा देना पर्याप्त नहीं होगा। उसकी सतह की समतलता, जल निकासी, जोड़, गेंद की गति और खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा मानकों की जांच भी जरूरी होगी। मैदान की नियमित देखभाल की व्यवस्था नहीं बनी तो कुछ वर्षों बाद वही समस्या दोबारा सामने आ सकती है।
टूर्नामेंट की वापसी से स्थानीय खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा मंच
राजनांदगांव के खेल जगत के लिए सबसे बड़ी उम्मीद अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट की वापसी है। ऐसे आयोजनों में अलग-अलग राज्यों की टीमें हिस्सा लेती हैं। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा देखने और उसमें खेलने का मौका मिलता है।
युवा खिलाड़ियों के विकास में इस तरह के मुकाबलों की भूमिका अहम होती है। उन्हें तेज खेल, बेहतर रणनीति, फिटनेस और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता सीखने का अवसर मिलता है। स्थानीय प्रशिक्षकों को भी दूसरे क्षेत्रों की खेल शैली समझने और अपनी प्रशिक्षण पद्धति में सुधार करने का मौका मिलता है।
हालांकि, नए टर्फ के तैयार होते ही टूर्नामेंट की तारीख तय मान लेना जल्दबाजी होगी। आयोजन के लिए मैदान की तकनीकी जांच, जरूरी सुविधाएं, टीमों की भागीदारी और आयोजन संबंधी तैयारियां भी पूरी करनी होंगी।
सिर्फ टर्फ नहीं, पूरी खेल व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
राजनांदगांव को हॉकी के पुराने गौरव से जोड़ने के लिए स्टेडियम का नवीनीकरण पहला कदम है। इसके बाद खिलाड़ियों के लिए नियमित अभ्यास सत्र, प्रशिक्षित कोच, फिटनेस सुविधाएं और आयु वर्ग के अनुसार प्रतियोगिताएं आयोजित करना भी जरूरी होगा।
खासकर स्कूल और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को पहचानने के लिए जिला स्तर पर चयन और प्रशिक्षण शिविरों की नियमित व्यवस्था होनी चाहिए। यदि नए मैदान का उपयोग केवल बड़े टूर्नामेंट के दौरान होगा और बाकी समय अभ्यास गतिविधियां सीमित रहेंगी, तो निवेश का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
स्टेडियम के रखरखाव के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी और नियमित बजट तय करना भी महत्वपूर्ण है। टर्फ की सफाई, पानी की व्यवस्था, जल निकासी और समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण जैसी प्रक्रियाएं मैदान की उम्र और गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
खेल से शहर की पहचान और अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है फायदा
बड़े हॉकी टूर्नामेंट केवल खिलाड़ियों और दर्शकों तक सीमित नहीं रहते। इनके आयोजन से शहर के होटल, भोजनालय, परिवहन और स्थानीय कारोबार को भी गतिविधि मिलती है। बाहर से आने वाली टीमों, अधिकारियों और दर्शकों के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच सकता है।
यदि राजनांदगांव नियमित रूप से राज्य और राष्ट्रीय स्तर की हॉकी प्रतियोगिताओं की मेजबानी करने लगे, तो उसकी खेल पहचान और मजबूत हो सकती है। इससे स्थानीय युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ खेल पर्यटन की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
असली सफलता खिलाड़ियों को मिलने वाले अवसरों से तय होगी
करीब दो करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला नया ब्लू टर्फ राजनांदगांव के हॉकी स्टेडियम को नई शुरुआत दे सकता है। लेकिन इस परियोजना की वास्तविक सफलता उद्घाटन या मैदान की चमक से नहीं, बल्कि वहां होने वाले नियमित अभ्यास, प्रतियोगिताओं और आगे बढ़ने वाले खिलाड़ियों से मापी जानी चाहिए।
राजनांदगांव में हॉकी की परंपरा पहले से मौजूद है। अब जरूरत उस परंपरा को आधुनिक सुविधाओं और लगातार अवसरों से जोड़ने की है। यदि टर्फ का काम समय पर पूरा हुआ और उसके बाद खेल गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा मिला, तो यह मैदान छत्तीसगढ़ की नई हॉकी प्रतिभाओं के लिए फिर से एक मजबूत केंद्र बन सकता है।




