Korba News: दुखद अंत! चार दिन बाद नहर के साइफन में मिला युवक का शव, पत्नी और दो बच्चों के सिर से उठा सहारा
छत्तीसगढ़ के कोरबा में चार दिनों से चल रही एक परिवार की उम्मीद आखिरकार मातम में बदल गई। सीतामढ़ी की नहर में तेज बहाव के दौरान लापता हुए सतीश रजक का शव शुक्रवार सुबह बरामद किया गया। वह पिछले चार दिनों से लापता था और परिजन लगातार उसके सुरक्षित मिलने की आस लगाए हुए थे। नहर के साइफन में फंसे शव को गोताखोरों की मदद से बाहर निकाला गया।
सतीश की मौत ने उसके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। वह हमाली का काम करके परिवार का भरण-पोषण करता था। पीछे पत्नी और 11 साल तथा 3 साल के दो बच्चे रह गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर शहर से गुजरने वाली नहरों के किनारे सुरक्षा इंतजामों और तेज बहाव के दौरान होने वाले जोखिमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर के पास नहर बनी हादसे की वजह
जानकारी के अनुसार, सीतामढ़ी निवासी सतीश रजक चार दिन पहले अपने घर के पास स्थित नहर की ओर गया था। बताया गया है कि वह एक अन्य व्यक्ति के साथ वहां पहुंचा था। इसी दौरान सीतामणी बसोड़ मोहल्ले के सामने उसका पैर फिसल गया और वह नहर के तेज बहाव में बह गया।
घटना के बाद साथ मौजूद व्यक्ति ने परिजनों को सूचना दी। देखते ही देखते मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और युवक की तलाश शुरू कर दी गई।
नहर का तेज बहाव घटना को और गंभीर बना रहा था। पानी की गति और अंदरूनी संरचना के कारण यह पता लगाना मुश्किल हो रहा था कि युवक कहां फंसा हो सकता है।
तीन दिन तक चला रेस्क्यू, तेज बहाव ने बढ़ाई मुश्किल
घटना की जानकारी मिलने पर डायल 112 और कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। जिला नगर सेना के गोताखोरों को भी तलाश अभियान में लगाया गया।
लगातार तीन दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन पानी का तेज बहाव गोताखोरों के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। नहर की गहराई और पानी के भीतर मौजूद संरचनाओं के कारण तलाशी अभियान में कठिनाई आई।
गुरुवार सुबह परिजनों ने कोतवाली थाने पहुंचकर पुलिस से तलाश तेज करने की गुहार भी लगाई थी। परिवार की उम्मीद थी कि सतीश कहीं सुरक्षित मिल जाए, लेकिन शुक्रवार सुबह मिली सूचना ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया।
साइफन में फंसा मिला शव, पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम
शुक्रवार सुबह स्थानीय लोगों ने सीतामणी नहर के साइफन में एक शव फंसा देखा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की सहायता से शव को बाहर निकलवाया।
शव की पहचान सतीश रजक के रूप में हुई। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई करते हुए उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू के अनुसार, परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि युवक किन परिस्थितियों में नहर में बहा था।
नहरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर उठता सवाल
इस हादसे का एक महत्वपूर्ण पहलू नहरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था है। शहर और रिहायशी इलाकों से गुजरने वाली नहरों के किनारे अक्सर लोगों का आना-जाना रहता है। कई स्थानों पर लोग रोजमर्रा के कामों के लिए भी पानी के नजदीक पहुंचते हैं।
ऐसे क्षेत्रों में फिसलन भरे किनारे, पर्याप्त रेलिंग का अभाव, चेतावनी संकेतों की कमी और तेज बहाव वाले स्थानों की पहचान न होना दुर्घटना का जोखिम बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नहरों के संवेदनशील हिस्सों पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षित पैदल रास्ते और नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी हैं। साइफन और पानी के निकास वाले हिस्सों को विशेष रूप से चिह्नित किया जाना चाहिए, क्योंकि वहां पानी का दबाव और बहाव सामान्य हिस्सों से अलग हो सकता है।
एक मजदूर की मौत से परिवार के सामने भविष्य का संकट
सतीश रजक हमाली का काम करके अपने परिवार की जरूरतें पूरी करता था। उसकी कमाई पर पत्नी और दो छोटे बच्चों की निर्भरता थी। ऐसे में उसकी अचानक मौत परिवार के सामने भावनात्मक दुख के साथ आर्थिक चुनौती भी खड़ी करती है।
विशेषकर तीन साल के छोटे बच्चे और 11 साल के स्कूली बच्चे की परवरिश, शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी अब परिवार के लिए बड़ी चिंता होगी।
ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय प्रशासन को परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन कर पात्रता के अनुसार सरकारी सहायता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी मदद उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।
हादसे से सबक लेना जरूरी, ताकि दोबारा न उजड़े कोई परिवार
सतीश रजक की मौत ने सीतामढ़ी क्षेत्र में एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। अब पुलिस की जांच के साथ यह भी जरूरी है कि नहर के उस हिस्से का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, जहां युवक बहा था।
यदि वहां सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आती हैं, तो उन्हें तत्काल दूर किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों को भी तेज बहाव वाले हिस्सों से दूरी बनाए रखने और नहर के किनारों पर सावधानी बरतने की जरूरत है।
चार दिनों की तलाश के बाद शव मिलना रेस्क्यू अभियान का दुखद अंत है, लेकिन इस घटना से मिलने वाली सीख भविष्य में किसी दूसरी जिंदगी को बचाने का आधार बन सकती है।




