Kanker Crime: युवती से दुष्कर्म का गंभीर मामला, धमकी और मारपीट के आरोपी को जेल
कांकेर। यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ित के लिए शिकायत दर्ज कराने तक पहुंचना भी कई बार कठिन हो सकता है, खासकर जब धमकी या हिंसा का डर हो। छत्तीसगढ़ के कांकेर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में 40 वर्षीय मनीष गोस्वामी को गिरफ्तार किया है। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, युवती ने 28 अक्टूबर को कांकेर कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 5 मार्च 2026 को आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। युवती के मुताबिक, जब उसने घटना की जानकारी अपने परिजनों को देने की बात कही, तो आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने बताया कि धमकियों के कारण वह तत्काल परिजनों को घटना के बारे में नहीं बता सकी।
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्रवाई
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 64(2)(3), 115(2) और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बरदेभाटा स्थित अपने निवास पर मौजूद है। इसके बाद टीम ने कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया।
आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो चुके हैं। मामले में साक्ष्यों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों पर अंतिम निर्णय होगा।
धमकी का डर शिकायत में देरी की वजह बन सकता है
इस मामले का एक अहम पहलू शिकायतकर्ता का यह कथन है कि कथित धमकियों के कारण वह घटना की जानकारी अपने परिवार को नहीं दे सकी। यौन हिंसा के मामलों में डर, सामाजिक दबाव, सुरक्षा की चिंता और आरोपी की प्रतिक्रिया का भय पीड़ित को सहायता मांगने से रोक सकते हैं। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और शिकायत दर्ज होने के समय के आधार पर अकेले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
ऐसे मामलों में पीड़ित की बात को संवेदनशीलता से सुनना, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिना दोषारोपण के उसे कानूनी तथा मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। परिवार और समाज की भूमिका भी अहम है—पीड़ित को चुप रहने के लिए दबाव देने के बजाय उसकी बात गंभीरता से सुनना चाहिए।
जांच में साक्ष्य और पीड़िता की सुरक्षा अहम
अब मामले की आगे की जांच में शिकायत में बताए गए घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित बयानों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। पुलिस को जांच के दौरान पीड़िता की निजता और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में भी पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले विवरणों से बचना आवश्यक है।
यदि किसी व्यक्ति को यौन हिंसा या धमकी का सामना करना पड़े, तो वह सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर भरोसेमंद व्यक्ति, पुलिस या योग्य सहायता सेवा से संपर्क कर सकता है। तत्काल खतरे की स्थिति में आपातकालीन सहायता लेना प्राथमिकता होनी चाहिए।
कांकेर के इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए घटना से जुड़े तथ्यों का निर्धारण किया जाएगा।




