Raigarh Cyber Fraud: शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹34 लाख की बड़ी ठगी, इंदौर से 5 संदिग्ध गिरफ्तार
रायगढ़। शेयर बाजार में बेहतर रिटर्न पाने की उम्मीद को साइबर अपराधी किस तरह जाल में बदल सकते हैं, इसका गंभीर मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में सामने आया है। शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का भरोसा दिलाकर एक डॉक्टर से ₹34,17,531 लेने के मामले की जांच करते हुए पुलिस ने इंदौर से तीन युवतियों और दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को जांच के दौरान बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े एक दूसरे संदिग्ध मामले के संकेत भी मिले हैं।
इस प्रकरण की अहमियत केवल बड़ी रकम की ठगी तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आए तथ्यों से यह भी पता चलता है कि साइबर अपराध में बैंक खाते, मोबाइल नंबर और अलग-अलग लोगों के बीच संपर्क की कड़ियां किस तरह इस्तेमाल की जा सकती हैं। फिलहाल पुलिस जब्त मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच कर रही है। मामले में आरोपियों की भूमिका और कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुनाफे का आंकड़ा दिखा, लेकिन रकम निकालने का रास्ता नहीं मिला
पुलिस के मुताबिक, सोनकरपारा निवासी डॉक्टर दिलीप कुमार मिश्रा की मार्च 2025 में मोबाइल फोन के जरिए सुनील नाम के व्यक्ति से पहचान हुई थी। उन्हें शेयर ट्रेडिंग में निवेश कर अधिक मुनाफा कमाने का प्रस्ताव दिया गया और स्पार्टन ट्रेड कंपनी में पैसा लगाने के लिए कहा गया।
शिकायत के अनुसार, 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डॉक्टर ने कुल ₹34,17,531 निवेश किए। बातचीत में अन्य लोग भी शामिल होते रहे और अलग-अलग समय पर और रकम लगाने के लिए कहा जाता रहा। निवेश से जुड़े पोर्टफोलियो में कथित तौर पर बढ़ता मुनाफा दिखाई देता था, जिससे निवेश जारी रखने का भरोसा बना रहा।
लेकिन स्क्रीन पर दिखने वाला लाभ और वास्तव में खाते में उपलब्ध पैसा दो अलग-अलग चीजें हैं। जब डॉक्टर ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की और पैसा नहीं मिला, तब उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
यह पहलू निवेशकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है: किसी ऐप, वेबसाइट या ऑनलाइन पोर्टफोलियो पर दिखाई देने वाला मुनाफा अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं होता कि निवेश वास्तविक है या रकम सुरक्षित तरीके से निकाली जा सकती है।
दूसरे बैंक खाते की जांच से खुली नई कड़ी
जांच के दौरान पुलिस को सूरज शर्मा के बैंक खाते से जुड़े एक अन्य मामले की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, सूरज ने शिकायत की थी कि उसके पंजाब नेशनल बैंक खाते में 12 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच 18 बार में कुल ₹2,97,298 का लेनदेन हुआ। रकम मिलने और नकदी निकाले जाने के बाद अलग-अलग राज्यों में शिकायतें दर्ज हुईं, जिसके चलते खाता फ्रीज कर दिया गया था।
पुलिस ने जब लेनदेन की पड़ताल की, तो सूरज के खाते के साइबर ठगी की रकम के कथित प्रवाह में इस्तेमाल होने का संदेह सामने आया। जांच में इंदौर की गायत्री विश्वकर्मा के जरिए सूरज को नकद और UPI से कमीशन मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि खाते के इस्तेमाल के बदले आर्थिक लाभ दिया गया और खाते पर रोक लगने के बाद की गई शिकायत पुलिस को गुमराह करने की कोशिश हो सकती थी।
इन आरोपों की पुष्टि बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच के बाद ही हो सकेगी। हालांकि, यह मामला एक महत्वपूर्ण जोखिम की ओर ध्यान दिलाता है: किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना या उसके कहने पर रकम प्राप्त कर आगे भेजना भी गंभीर कानूनी मुश्किलें पैदा कर सकता है।
मोबाइल नंबर के जरिए इंदौर तक पहुंची जांच
दोनों मामलों की जांच के दौरान पुलिस को एक साझा मोबाइल नंबर मिला। जांच में यह नंबर इंदौर की तनिषा पाटिल के इस्तेमाल में होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के बीच संपर्क तथा कथित साइबर गतिविधियों से संबंधित साक्ष्यों की भी पड़ताल की।
इसके बाद रायगढ़ साइबर पुलिस की टीम ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित एक कॉल सेंटर पर दबिश दी। वहां से गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल को पकड़ा गया। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने ज्योति मालवीय और तरुण नागर को भी गिरफ्तार किया। सूरज शर्मा को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया।
इस तरह दोनों मामलों को जोड़कर कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं और संबंधित बैंक खातों तथा लेनदेन की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों के बारे में भी जानकारी मिली है और उनकी तलाश की जा रही है।
साइबर ठगी से बचने के लिए निवेश से पहले क्या जांचें?
ऑनलाइन निवेश के मामलों में ठगी अक्सर भरोसा बनाने से शुरू होती है। शुरुआत में लगातार संपर्क, आकर्षक रिटर्न और स्क्रीन पर बढ़ती रकम निवेशक को यह महसूस करा सकती है कि सब कुछ सामान्य है। इसलिए पैसा भेजने से पहले कुछ बुनियादी जांच जरूरी हैं।
- कंपनी और ब्रोकर की वैधता जांचें: केवल नाम, लोगो, वेबसाइट या सोशल मीडिया प्रोफाइल देखकर निवेश का फैसला न लें। संबंधित वित्तीय संस्था और ब्रोकर की आधिकारिक नियामकीय जानकारी सत्यापित करें।
- गारंटीड मुनाफे के दावों से सावधान रहें: शेयर बाजार में अधिक रिटर्न का लालच और बिना जोखिम लाभ का वादा खतरे का संकेत हो सकता है।
- पैसे निकालने की शर्तें पहले समझें: यदि रकम निकालने के लिए बार-बार अतिरिक्त जमा, टैक्स, शुल्क या नया निवेश करने को कहा जाए, तो आगे भुगतान रोककर स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें।
- अपना बैंक खाता या सिम किसी को न दें: किसी अनजान व्यक्ति के लिए पैसा प्राप्त करना, नकद निकालना या UPI से आगे भेजना आपको संदिग्ध लेनदेन से जोड़ सकता है।
- संदेह होने पर तुरंत कार्रवाई करें: बैंक को सूचित करें, लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और साइबर अपराध की शिकायत शीघ्र दर्ज कराएं। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्ट के लिए हेल्पलाइन 1930 का उपयोग किया जा सकता है।
जांच के नतीजे क्यों अहम होंगे?
इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि डॉक्टर से ली गई रकम किन खातों से गुजरी, किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी और क्या अन्य पीड़ित या सहयोगी भी इस नेटवर्क से जुड़े हैं। मोबाइल फोन और बैंक रिकॉर्ड की डिजिटल जांच कथित लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में अहम हो सकती है।
रायगढ़ पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने लोगों को अनजान व्यक्तियों या कंपनियों के कहने पर निवेश नहीं करने और बैंक खाते, सिम कार्ड तथा पहचान से जुड़े दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए नहीं देने की सलाह दी है।
यह मामला ऑनलाइन निवेश करने वालों के लिए स्पष्ट संदेश देता है: निवेश का निर्णय केवल स्क्रीन पर दिख रहे मुनाफे या किसी व्यक्ति के भरोसे पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र सत्यापन और आधिकारिक जानकारी के आधार पर होना चाहिए। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ कथित नेटवर्क की वास्तविक संरचना और अन्य संभावित पीड़ितों से जुड़े तथ्य सामने आने की उम्मीद है।




