Health Alert: सुबह तकिए पर लार के निशान को न करें नजरअंदाज, इन 5 वजहों से हो सकती है परेशानी
सुबह उठते ही तकिए पर लार के गीले निशान दिखाई देना कई लोगों के लिए आम बात है। ज्यादातर मामलों में यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया से जुड़ा होता है और इसके लिए घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर ऐसा लगभग हर रात होने लगे, नाक अक्सर बंद रहे या सोते समय तेज खर्राटों के साथ सांस लेने में परेशानी हो, तो इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है।
नींद के दौरान शरीर की मांसपेशियां आराम की स्थिति में रहती हैं। इस दौरान मुंह खुला रहने या करवट लेकर सोने से लार बाहर निकल सकती है। हालांकि, लगातार ऐसा होने पर नाक से सांस लेने में रुकावट, मुंह और दांतों की समस्याएं, निगलने में कठिनाई या नींद से जुड़ी कुछ स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
1. नाक बंद होने पर मुंह से सांस लेना
सुबह तकिए पर लार मिलने की एक संभावित वजह नाक से ठीक तरह सांस न ले पाना है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी या साइनस से जुड़ी परेशानी के दौरान नाक बंद हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति सोते समय मुंह से सांस लेने लगता है और मुंह खुला रहने के कारण लार बाहर निकल सकती है।
यदि सुबह उठने पर मुंह सूखा रहता है, नाक बंद महसूस होती है या छींक और नाक बहने की समस्या बनी रहती है, तो इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
नाक बंद रहने की समस्या बार-बार होती है या लंबे समय तक ठीक नहीं होती, तो डॉक्टर से जांच करवाएं। बिना सलाह के लंबे समय तक नाक खोलने वाली दवाओं का इस्तेमाल करने से भी बचें।
2. सोने की मुद्रा भी हो सकती है वजह
हर बार तकिए पर लार मिलने का मतलब किसी बीमारी से नहीं होता। कुछ लोगों में करवट लेकर सोने या मुंह खुला रहने के कारण लार आसानी से बाहर निकल सकती है।
यदि कभी-कभार ऐसा होता है और खर्राटे, सांस लेने में परेशानी या निगलने की दिक्कत जैसे दूसरे लक्षण नहीं हैं, तो आमतौर पर तुरंत चिंता करने की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, यदि सोने की मुद्रा बदलने के बावजूद समस्या लगातार बनी रहती है, तो केवल इसे आदत मानकर छोड़ने के बजाय अन्य संभावित कारणों पर ध्यान देना उचित है।
3. स्लीप एपनिया के संकेतों को समझना जरूरी
यदि तकिए पर लार के निशान के साथ तेज खर्राटे, रात में बार-बार नींद खुलना, सुबह सिरदर्द या दिनभर अत्यधिक थकान भी महसूस होती है, तो नींद से जुड़ी समस्या की जांच जरूरी हो सकती है।
ऐसी ही एक स्थिति ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया है। इसमें नींद के दौरान ऊपरी सांस का रास्ता बार-बार संकरा या बंद हो जाता है, जिससे सांस लेने में रुकावट आती है। कुछ लोगों में मुंह खुला रहने और मुंह से सांस लेने की वजह से लार भी बाहर निकल सकती है।
ध्यान रहे कि केवल तकिए पर लार के निशान स्लीप एपनिया की पुष्टि नहीं करते। लेकिन खर्राटों, सांस रुकने के देखे गए संकेतों या दिन में बहुत ज्यादा नींद आने के साथ यह समस्या हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर नींद से संबंधित जांच की जा सकती है।
4. मुंह, दांत या निगलने से जुड़ी परेशानी
लार मुंह को नम रखने और भोजन निगलने में मदद करती है। कुछ लोगों में लार का उत्पादन बढ़ सकता है, जबकि अन्य लोगों को सामान्य लार निगलने में कठिनाई हो सकती है। दोनों ही स्थितियों में लार मुंह से बाहर आने की संभावना बढ़ सकती है।
मुंह और दांतों की कुछ समस्याएं, कुछ दवाओं के प्रभाव या निगलने से जुड़ी परेशानियां इसके संभावित कारण हो सकते हैं।
यदि दिन में भी बार-बार लार बाहर आती है, खाना या पानी निगलने में दिक्कत होती है, खाते समय खांसी आती है या आवाज में बदलाव महसूस होता है, तो चिकित्सकीय जांच करवाएं। कारण जाने बिना खुद से दवा लेना उचित नहीं है।
5. कब सामान्य समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए?
सोते समय कभी-कभी लार निकलना और लगातार लार टपकने के साथ दूसरे लक्षण होना अलग-अलग स्थितियां हैं। समस्या की अवधि और उसके साथ दिखाई देने वाले लक्षण यह तय करने में मदद करते हैं कि जांच की जरूरत है या नहीं।
डॉक्टर से संपर्क करें यदि:
- लगभग हर रात लार तकिए पर गिरती है और समस्या लगातार बनी हुई है।
- तेज खर्राटे आते हैं या सोते समय सांस रुकने के संकेत दिखाई देते हैं।
- सुबह उठने पर बार-बार सिरदर्द या दिनभर अत्यधिक थकान रहती है।
- निगलने में परेशानी, बार-बार खांसी या भोजन के दौरान घुटन महसूस होती है।
- नाक बंद रहने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
एक जरूरी चेतावनी: यदि अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकने लगे, बोलने में परेशानी हो या शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य लार टपकने की समस्या न समझें। ये स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
घर पर किन बातों का ध्यान रखें?
यदि समस्या हल्की है, तो कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं। नाक बंद होने पर उसके कारण का उचित उपचार करवाएं, सोने की नियमित दिनचर्या बनाए रखें और मुंह तथा दांतों की सफाई का ध्यान रखें। यदि किसी दवा के बाद लार बढ़ने की समस्या शुरू हुई है, तो डॉक्टर से चर्चा करें; अपनी मर्जी से दवा बंद न करें।
यदि खर्राटे और सांस लेने में परेशानी भी होती है, तो केवल तकिया बदलने या सोने की मुद्रा पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।
निष्कर्ष: तकिए पर लार के निशान हमेशा बीमारी नहीं, लेकिन संकेतों पर रखें नजर
सुबह तकिए पर लार दिखाई देना कई बार सोने की मुद्रा या मुंह खुला रहने जैसी सामान्य वजहों से होता है। लेकिन लगातार समस्या, नाक से सांस लेने में कठिनाई, तेज खर्राटे या निगलने की परेशानी किसी अन्य स्थिति की ओर संकेत कर सकती है।
सही कदम यह है कि केवल एक लक्षण देखकर किसी बीमारी का अनुमान न लगाएं, बल्कि उसके साथ मौजूद दूसरे संकेतों पर भी ध्यान दें। यदि समस्या नियमित हो रही है या नींद और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर डाल रही है, तो डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर रहेगा।




