Raigarh Drug Crackdown: गांजा तस्करी का बड़ा खुलासा, सप्लायर और खरीदार गिरफ्तार; ₹2.40 लाख की संपत्ति जब्त
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस ने केवल माल लेकर आ रहे व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसे खरीदने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। पुसौर थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई में करीब 2.893 किलोग्राम गांजा, एक बाइक और मोबाइल फोन सहित लगभग 2.40 लाख रुपये की संपत्ति जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह मामला बताता है कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार की जांच में सप्लाई के साथ-साथ खरीदारों तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण है।
ओडिशा से रायगढ़ तक पहुंच रहा था गांजा
पुलिस को सूचना मिली थी कि ओडिशा की ओर से चंद्रपुर होते हुए एक व्यक्ति बाइक पर गांजा लेकर रायगढ़ आ रहा है। इसके बाद पुसौर पुलिस ने ग्राम बड़े भंडार में मुख्य सड़क पर घेराबंदी की। प्रियंका किराना स्टोर के सामने संदिग्ध बाइक सवार को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें काले बैग से तीन पैकेट गांजा बरामद हुआ।
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए व्यक्ति की पहचान 30 वर्षीय लब सा के रूप में हुई है। वह मूल रूप से ओडिशा के झारसुगुड़ा का निवासी बताया गया है और वर्तमान में चंद्रपुर क्षेत्र में रह रहा था। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 1.40 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने गांजा और बाइक जब्त कर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(ख) के तहत मामला दर्ज किया।
मोबाइल और भुगतान के जरिए खरीदार तक पहुंची पुलिस
इस कार्रवाई का अहम पहलू यह रहा कि जांच केवल गांजा बरामद होने तक सीमित नहीं रही। पुलिस के अनुसार, पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर उस व्यक्ति की पहचान की गई जिसने गांजा मंगवाया था।
पुलिस ने 39 वर्षीय राजू दास महंत को कोतरारोड थाना क्षेत्र के बरमुड़ा गांव से हिरासत में लिया। आरोप है कि उसने मोबाइल फोन के माध्यम से सप्लायर से संपर्क किया था और करीब तीन किलोग्राम गांजा मंगवाया था। इसके भुगतान के लिए कियोस्क बैंक ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से 14,850 रुपये ट्रांसफर किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस ने खरीदार के कब्जे से दो मोबाइल फोन जब्त किए। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
नशे के कारोबार पर रोक के लिए क्यों जरूरी है पूरी सप्लाई चेन की जांच?
गांजा जैसे मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल परिवहन के दौरान माल पकड़ना पर्याप्त नहीं होता। यदि जांच यह पता लगाने में सफल होती है कि पदार्थ कहां से आया, किसे दिया जाना था और भुगतान किस माध्यम से हुआ, तो इससे कारोबार से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की जानकारी मिल सकती है।
इस मामले में मोबाइल फोन और डिजिटल भुगतान से जुड़े विवरण जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बन सकते हैं। हालांकि, इन साक्ष्यों से किसी व्यापक नेटवर्क की मौजूदगी अपने आप साबित नहीं होती। इसके लिए लेनदेन, संचार और अन्य संबंधित तथ्यों का सत्यापन जरूरी होगा।
ऐसी कार्रवाई का असर तभी लंबे समय तक दिखाई देता है, जब पुलिस बरामदगी के साथ-साथ स्रोत, वितरण और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की भी जांच करे। इससे भविष्य में जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, बशर्ते पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हों।
युवाओं और परिवारों पर नशे के कारोबार का असर
नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री का प्रभाव कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता। नशे की उपलब्धता बढ़ने पर परिवारों, युवाओं और स्थानीय समुदायों के सामने सामाजिक तथा आर्थिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए तस्करी पर कार्रवाई के साथ जागरूकता, समय पर सहायता और नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास पर ध्यान देना भी जरूरी है।
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के अनुसार, जिले में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई जारी है। इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जब्त किए गए पदार्थ की आपूर्ति और खरीद से जुड़े अन्य कोई संपर्क भी थे या नहीं।




