Gold-Silver Price Crash: सोना-चांदी में तेज गिरावट का अलर्ट! कच्चे तेल की महंगाई ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
नई दिल्ली: सोना और चांदी की कीमतों में बुधवार, 21 अक्टूबर को कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बाजार को आशंका है कि यदि ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकते हैं या मौद्रिक नीति को ज्यादा समय तक सख्त रख सकते हैं। इसी चिंता का असर कीमती धातुओं पर भी दिखाई दिया।
घरेलू वायदा बाजार में सोना करीब ₹1,46,100 प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग ₹2,09,750 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोना करीब 4,140 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 57.60 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर थी। ये कारोबार के दौरान उपलब्ध कीमतें हैं; दिन के अंत तक इनमें बदलाव संभव है।
कच्चा तेल महंगा होने से सोने पर क्यों पड़ा दबाव?
सोने को आमतौर पर महंगाई, आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इसका प्रदर्शन केवल इन परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करता। ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की नकदी संबंधी जरूरतें भी इसकी कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो परिवहन, उत्पादन और ऊर्जा की लागत पर दबाव पड़ सकता है। इससे महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका पैदा होती है। केंद्रीय बैंक ऐसी स्थिति में ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं।
सोना नियमित ब्याज नहीं देता। इसलिए जब ब्याज देने वाले निवेश विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक बने रहते हैं, तो सोने की मांग पर दबाव आ सकता है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बावजूद सोने की कीमतों में गिरावट संभव है।
हालांकि, यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता गहरी होती है, तो सुरक्षित निवेश की मांग दोबारा सोने को सहारा दे सकती है। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि तेल, डॉलर और ब्याज दरों में किस तरह का बदलाव होता है।
MCX पर सोने और चांदी की कीमतों का हाल
घरेलू वायदा बाजार में दोनों धातुओं के प्रमुख दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट कमजोर खुले।
| बाजार संकेतक | सोना | चांदी |
|---|---|---|
| शुरुआती कीमत | ₹1,46,328 प्रति 10 ग्राम | ₹2,10,400 प्रति किलोग्राम |
| पिछला बंद भाव | ₹1,46,519 | ₹2,11,485 |
| कारोबार के समय कीमत | लगभग ₹1,46,130 | लगभग ₹2,09,752 |
| शुरुआती सपोर्ट | ₹1,45,750 | ₹2,08,570 |
| अगला सपोर्ट | ₹1,44,980 | ₹2,05,650 |
| शुरुआती रेजिस्टेंस | ₹1,47,320 | ₹2,13,920 |
कीमतें वायदा बाजार के कारोबार के दौरान उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। स्पॉट बाजार, स्थानीय सर्राफा बाजार और आभूषणों की खुदरा कीमतें अलग हो सकती हैं।
सोने के दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट में पिछले बंद भाव की तुलना में शुरुआती कमजोरी के बाद भी बिकवाली का दबाव बना रहा। चांदी में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार फिलहाल केवल सुरक्षित निवेश की मांग पर नहीं, बल्कि महंगाई और ब्याज दरों के संभावित असर पर भी प्रतिक्रिया दे रहा है।
सोने के लिए ₹1.45 लाख का स्तर क्यों अहम?
बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी आकलन के अनुसार, सोने के लिए ₹1,45,750 के आसपास शुरुआती सपोर्ट महत्वपूर्ण है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर ₹1,44,980 का स्तर अगला संभावित सहारा हो सकता है।
ऊपर की ओर ₹1,47,320 पहला प्रमुख रेजिस्टेंस माना गया है। यदि कीमत इस स्तर के ऊपर टिकती है, तो ₹1,48,120 की दिशा में बढ़ने की संभावना बन सकती है।
तकनीकी स्तर संभावित बाजार व्यवहार का आकलन करने में मदद करते हैं, लेकिन ये निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं। कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल या वैश्विक घटनाओं में अचानक बदलाव आने पर बाजार इन स्तरों को तेजी से पार कर सकता है।
चांदी में गिरावट के बाद क्या तेजी लौट सकती है?
चांदी की स्थिति सोने से कुछ अलग है। इसका इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक मांग का प्रभाव भी पड़ता है।
तकनीकी आकलन में चांदी के लिए ₹2,08,570 शुरुआती सपोर्ट और ₹2,05,650 अगला महत्वपूर्ण स्तर है। यदि कीमत में सुधार आता है, तो ₹2,13,920 पहला रेजिस्टेंस होगा। इसके ऊपर टिकने पर ₹2,16,360 की दिशा में तेजी की संभावना बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी में शॉर्ट कवरिंग के संकेतों का अर्थ यह हो सकता है कि कुछ कारोबारी अपनी पहले की बिकवाली वाली पोजीशन बंद कर रहे हैं। लेकिन केवल इस संकेत के आधार पर नई तेजी की पुष्टि नहीं की जा सकती। कीमत और ओपन इंटरेस्ट में बदलाव को साथ देखकर ही बाजार की स्थिति समझना बेहतर होता है।
इस साल के ऊंचे स्तरों से कितनी दूर हैं कीमतें?
इस साल सोने और चांदी दोनों ने ऊंचे स्तर देखे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, MCX पर सोने का वायदा भाव पहले ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा था, जबकि चांदी ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम के स्तर तक गई थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का उच्च स्तर 5,586.20 डॉलर प्रति औंस और चांदी का 121.79 डॉलर प्रति औंस बताया गया है।
इन ऊंचे स्तरों और मौजूदा भावों के बीच बड़ा अंतर यह दिखाता है कि कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव कितना तेज हो सकता है। हालांकि, अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट, समयावधि और बाजार के आंकड़ों की तुलना करते समय सावधानी जरूरी है। केवल पुराने उच्च स्तर देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि कीमतें फिर वहां तक पहुंचेंगी।
आम खरीदार और निवेशक क्या रणनीति अपनाएं?
कीमतों में गिरावट देखकर तुरंत खरीदारी करना या घबराकर अपनी होल्डिंग बेच देना, दोनों ही जोखिम भरे फैसले हो सकते हैं। बेहतर रणनीति निवेश के उद्देश्य और समयावधि के आधार पर तय की जानी चाहिए।
अगर शादी या किसी जरूरी काम के लिए सोना खरीदना है: खरीदारी को केवल बाजार की रोजाना की चाल पर निर्भर न रखें। जरूरत, बजट और समयसीमा के अनुसार खरीदारी की योजना बनाएं। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज, शुद्धता और लागू करों को भी ध्यान में रखें।
अगर लंबी अवधि के लिए निवेश करना है: अपने कुल निवेश में सोने की भूमिका, जोखिम सहने की क्षमता और अन्य संपत्तियों में निवेश को देखते हुए फैसला लें। एक ही दिन की गिरावट को लंबी अवधि के रुझान का निर्णायक संकेत न मानें।
अगर वायदा कारोबार करते हैं: लेवरेज के कारण छोटी कीमत-चाल भी बड़ा नुकसान करा सकती है। सपोर्ट और रेजिस्टेंस के साथ जोखिम सीमा तय करना जरूरी है। केवल तेजी या गिरावट के अनुमान पर बड़ी पोजीशन लेना जोखिम बढ़ा सकता है।
आगे सोना-चांदी किस दिशा में जा सकते हैं?
निकट अवधि में बाजार की दिशा तीन प्रमुख कारकों से प्रभावित हो सकती है—कच्चे तेल की कीमतें, ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों के संकेत और डॉलर की चाल। पश्चिम एशिया में तनाव से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ती है, तो महंगाई की चिंता मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर, यदि तनाव कम होता है और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है, तो कीमती धातुओं को राहत मिल सकती है।
चांदी के मामले में औद्योगिक मांग और वैश्विक विकास की संभावनाएं भी अहम रहेंगी। इसलिए दोनों धातुओं में एक जैसी दिशा या समान गति की उम्मीद करना उचित नहीं होगा।




