Chhattisgarh News: सख्त एक्शन! CM हेल्पलाइन की समीक्षा में तहसीलदार सस्पेंड, राशन में वसूली गई अतिरिक्त रकम लौटाने के आदेश
छत्तीसगढ़ में सरकारी शिकायतों के निपटारे को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन 1076 की समीक्षा के दौरान कबीरधाम जिले के पिपरिया तहसीलदार प्रमोद कुमार चंद्रवंशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की जानकारी दी। वहीं, सक्ती जिले की एक राशन दुकान में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शक्कर बेचने की शिकायत पर ग्रामीणों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस कराने के निर्देश दिए गए।
इस समीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब सरकारी विभागों के प्रदर्शन को केवल निपटाई गई शिकायतों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी परखने की बात कही गई है कि शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में हल हुई या नहीं।
शिकायत बंद करना पर्याप्त नहीं, समाधान जरूरी
सीएम हेल्पलाइन 1076 का उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक माध्यम उपलब्ध कराना है। राजस्व संबंधी विवाद, राशन वितरण, बिजली आपूर्ति, पेयजल और सरकारी योजनाओं की किस्तों जैसी समस्याओं के लिए लोग इस व्यवस्था का सहारा लेते हैं।
मुख्यमंत्री की समीक्षा में सामने आए मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था की दो अलग तस्वीरें पेश कीं। एक तरफ ऐसे नागरिक थे, जिनकी शिकायत के बाद समस्या का समाधान हुआ। दूसरी तरफ ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने या रिकॉर्ड में त्रुटि बने रहने की शिकायत की गई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिकायत का निपटारा दर्ज कर देने भर से अधिकारी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। शिकायतकर्ता से सीधे संपर्क कर यह पता लगाया जाएगा कि उसे वास्तविक राहत मिली है या नहीं।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी सरकारी पोर्टल पर शिकायत का बंद दिखाई देना और नागरिक की समस्या का हल होना हमेशा एक ही बात नहीं होती।
तीन महीने में 2.31 लाख शिकायतें, करीब 2 लाख का निराकरण
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि लगभग तीन महीने में सीएम हेल्पलाइन पर अलग-अलग विभागों से संबंधित करीब 2 लाख 31 हजार शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से लगभग 2 लाख शिकायतों के निराकरण की जानकारी दी गई।
इतनी बड़ी संख्या में शिकायतों का दर्ज होना बताता है कि नागरिक प्रशासन तक अपनी समस्याएं पहुंचाने के लिए इस माध्यम का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, शिकायतों की संख्या और उनके निपटारे का आंकड़ा व्यवस्था की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
असल मूल्यांकन के लिए यह जानना भी जरूरी है कि कितने मामलों में समस्या स्थायी रूप से सुलझी, कितने प्रकरण दोबारा सामने आए और कितने शिकायतकर्ताओं को समाधान के बाद भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने ‘स्पेशल क्लोज्ड’ सहित निराकृत शिकायतों की अचानक जांच कराने और शिकायतकर्ताओं से फोन पर प्रतिक्रिया लेने की बात कही।
यदि किसी मामले में वास्तविक समाधान के बिना शिकायत बंद की गई पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के साथ व्यवस्था की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
डेढ़ साल से सीमांकन का इंतजार, तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल
समीक्षा बैठक के दौरान कबीरधाम जिले की पिपरिया तहसील के छबील पाली निवासी एक ग्रामीण से मुख्यमंत्री ने सीधे फोन पर बात की। ग्रामीण ने बताया कि उसने अप्रैल 2025 में जमीन के सीमांकन के लिए आवेदन दिया था, लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई।
जमीन का सीमांकन ग्रामीण क्षेत्रों में केवल राजस्व विभाग की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। इसका संबंध खेत की वास्तविक सीमा, कब्जे, भूमि विवाद और कई बार परिवारों के बीच संपत्ति संबंधी मतभेदों से भी होता है।
ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर कर सकती है। इससे समय और पैसे का नुकसान होने के साथ विवाद बढ़ने की आशंका भी रहती है।
इसी मामले की समीक्षा के दौरान पिपरिया तहसीलदार प्रमोद कुमार चंद्रवंशी को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कबीरधाम जिला निर्धारित किया गया है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि सरकार राजस्व संबंधी शिकायतों में देरी को गंभीरता से लेने का संदेश देना चाहती है। हालांकि, ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि भूमि संबंधी निर्णय नियमानुसार और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर लिए जाएं।
आदेश पारित, फिर भी जमीन के रिकॉर्ड में सुधार नहीं
बिलासपुर जिले की पचपेड़ी तहसील के कुकुलकाल गांव से जुड़ी एक अन्य शिकायत भी समीक्षा में सामने आई। ग्रामीण व्यास ने बताया कि वर्ष 2023 में जमीन के बंटवारे का आदेश पारित हो चुका था, लेकिन आठ खसरों में से एक के रिकॉर्ड में तकनीकी त्रुटि के कारण सुधार नहीं हो पाया।
यह मामला राजस्व प्रशासन की एक ऐसी समस्या को सामने लाता है, जिसमें आदेश जारी होने के बाद भी उसका व्यावहारिक लाभ नागरिक तक नहीं पहुंचता।
भूमि के रिकॉर्ड में त्रुटि होने से भविष्य में जमीन बेचने, नामांतरण कराने, बैंक से ऋण लेने या अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है। इसलिए बंटवारे या अन्य राजस्व आदेशों के बाद रिकॉर्ड को सही करना भी उतना ही जरूरी है जितना आदेश पारित करना।
मुख्यमंत्री ने इस मामले में संबंधित तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
यह कदम प्रशासनिक प्रक्रिया के उस हिस्से पर ध्यान खींचता है, जहां आदेश और उसके क्रियान्वयन के बीच अंतर रह जाता है।
राशन दुकान में ज्यादा वसूली पर ग्रामीणों को पैसा लौटाने के निर्देश
सक्ती जिले की एक राशन दुकान में शक्कर के निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे लेने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त वसूली गई रकम ग्रामीणों को वापस दिलाने के निर्देश दिए।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्देश्य पात्र परिवारों तक जरूरी खाद्य सामग्री निर्धारित शर्तों और कीमतों पर पहुंचाना है। यदि लाभार्थियों से तय कीमत से अधिक वसूली होती है, तो सरकारी व्यवस्था के जरिए मिलने वाली राहत का वास्तविक लाभ कम हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित ग्रामीणों से ली गई अतिरिक्त राशि वापस कराई जाए।
ऐसी शिकायतों में केवल रकम वापस कराना ही नहीं, बल्कि यह जांचना भी जरूरी होता है कि अतिरिक्त वसूली कितने लोगों से हुई, कुल कितनी राशि ली गई और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
पारदर्शी दर सूची, नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई राशन वितरण व्यवस्था में नागरिकों का भरोसा बनाए रखने के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
जहां हेल्पलाइन बनी राहत का माध्यम
समीक्षा बैठक में कुछ ऐसे उदाहरण भी सामने आए, जहां शिकायत दर्ज होने के बाद नागरिकों को राहत मिली।
गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के दमन साहू ने बताया कि गांव का ट्रांसफॉर्मर खराब होने से लगभग 80 से 85 परिवारों की बिजली आपूर्ति बाधित थी। हेल्पलाइन पर शिकायत के करीब एक सप्ताह के भीतर नया ट्रांसफॉर्मर लगाए जाने से बिजली बहाल हो गई।
इसी तरह जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के वीरेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त नहीं मिलने की शिकायत की थी। उनके अनुसार, शिकायत दर्ज कराने के करीब 10 दिन के भीतर 55 हजार रुपये की किस्त उनके बैंक खाते में पहुंच गई।
ये उदाहरण बताते हैं कि शिकायत निवारण की व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम करे, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ सकता है।
बिजली की उपलब्धता से घरेलू जरूरतें और स्थानीय गतिविधियां प्रभावित होती हैं, जबकि आवास योजना की किस्त में देरी से निर्माण कार्य रुक सकता है। ऐसे मामलों में समय पर समाधान सरकारी योजनाओं को जमीन पर प्रभावी बनाने में मदद करता है।
अब हर महीने होगी समीक्षा, अधिकारियों की जवाबदेही पर नजर
मुख्यमंत्री ने सीएम हेल्पलाइन की हर महीने समीक्षा करने की बात कही। लंबित मामलों, अधिक समय लेने वाली शिकायतों, ‘स्पेशल क्लोज्ड’ प्रकरणों और शिकायतकर्ताओं की प्रतिक्रिया पर नजर रखी जाएगी।
समीक्षा में राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, नगरीय प्रशासन, पेयजल और बिजली सहित विभिन्न विभागों की शिकायतों पर चर्चा हुई। सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।
नियमित समीक्षा का उद्देश्य केवल लंबित शिकायतों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि उन विभागों और प्रक्रियाओं की पहचान करना भी होना चाहिए, जहां बार-बार देरी या लापरवाही सामने आती है।
यदि एक ही तरह की समस्या किसी क्षेत्र से लगातार आ रही है, तो हर शिकायत का अलग-अलग निपटारा करने के बजाय उसकी मूल वजह दूर करना अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
क्या बदलेगी आम नागरिक की सरकारी दफ्तरों तक पहुंच?
सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा में सामने आए फैसलों का असर इस बात से तय होगा कि निर्देश कितनी प्रभावी तरह से लागू किए जाते हैं।
अचानक शिकायतकर्ताओं से संपर्क करना और बंद मामलों की जांच करना शिकायत निवारण व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। इससे अधिकारियों के लिए शिकायतों को केवल कागजों पर निपटाने के बजाय वास्तविक समाधान सुनिश्चित करने का प्रोत्साहन पैदा हो सकता है।
हालांकि, प्रभावी व्यवस्था के लिए तीन चीजें जरूरी हैं: शिकायतों पर समयसीमा के भीतर कार्रवाई, निर्णयों की गुणवत्ता की जांच और समस्या का समाधान नहीं होने पर स्पष्ट जवाबदेही।
इसके साथ ही नागरिकों को भी अपनी शिकायत की स्थिति जानने, संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और असंतोषजनक समाधान के बारे में प्रतिक्रिया देने का अवसर मिलना चाहिए।




