छत्तीसगढ़ में आवास योजना पर बड़ा एक्शन! अधूरे मकानों को जल्द पूरा कराने के सख्त निर्देश
रायपुर, 15 अक्टूबर 2026। अपना घर होना किसी परिवार के लिए सिर्फ छत मिलने का सवाल नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी है। लेकिन सरकारी योजना के तहत मकान स्वीकृत हो जाने और उसमें रहने लायक घर तैयार होने के बीच कई परिवारों को इंतजार करना पड़ता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी आवास योजना के तहत स्वीकृत मकानों का निर्माण जल्द पूरा कराने पर जोर दिया है।
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में महानदी भवन में हुई राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के पहले और दूसरे चरण की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और समय पर मकान पूरा करने वाले हितग्राहियों को प्रोत्साहित किया जाए।
2.43 लाख से ज्यादा मकान स्वीकृत, अब अधूरे निर्माण पर नजर
विभागीय जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में कुल 2,43,087 मकान स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 2,25,411 मकान पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 17,368 आवासों में निर्माण कार्य जारी है।
ये आंकड़े योजना के बड़े स्तर पर क्रियान्वयन को दर्शाते हैं। हालांकि, मकानों की स्वीकृति और निर्माण पूरा होने के बीच का अंतर यह भी बताता है कि अब निगरानी का ध्यान शेष कामों को समय पर पूरा कराने पर होना चाहिए। प्रत्येक अधूरे मकान के पीछे अलग परिस्थिति हो सकती है—कहीं निर्माण की गति धीमी हो सकती है, तो कहीं लाभार्थी को संसाधनों या दूसरी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए केवल निर्माण में तेजी लाने का निर्देश पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी है कि देरी के कारणों की पहचान कर उनके अनुसार समाधान भी किया जाए।
BLC श्रेणी में करीब 1.96 लाख मकान पूरे
बैठक में लाभार्थी आधारित निर्माण यानी बीएलसी (BLC) घटक की भी समीक्षा की गई। इस श्रेणी के तहत स्वीकृत 2,06,118 मकानों में से 1,96,144 मकान पूरे हो चुके हैं। वहीं, 9,666 आवासों का निर्माण अलग-अलग चरणों में जारी है।
बीएलसी मॉडल में लाभार्थी अपने आवास के निर्माण की प्रक्रिया में सीधे शामिल होता है। ऐसे में निर्माण की प्रगति पर नजर रखने के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि लोगों को योजना से जुड़ी आवश्यक जानकारी और निर्धारित सहायता समय पर मिलती रहे।
यदि किसी परिवार का मकान लंबे समय तक अधूरा रहता है, तो उसे किराये के मकान में रहने या अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ सकता है। इसलिए निर्माण में होने वाली देरी कम करना केवल सरकारी लक्ष्य पूरा करने का मामला नहीं, बल्कि परिवारों के आर्थिक दबाव को घटाने से भी जुड़ा है।
जल्दी मकान पूरा करने वालों को मिलेगा प्रोत्साहन
बैठक का एक अहम निर्देश उन हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने से जुड़ा रहा, जो अपने आवास का निर्माण शीघ्र पूरा कर रहे हैं। इस कदम से निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने की कोशिश की जा सकती है।
हालांकि, प्रोत्साहन की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसका स्वरूप क्या होगा और वह किन नियमों के तहत दिया जाएगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रोत्साहन की राशि, पात्रता या लागू किए जाने वाले किसी विशेष तरीके का विवरण नहीं दिया गया है।
नीतिगत स्तर पर यह भी जरूरी है कि निर्माण पूरा करने में देरी कर रहे परिवारों की समस्याओं को समझा जाए। आर्थिक कठिनाई, निर्माण सामग्री की उपलब्धता या अन्य स्थानीय परिस्थितियों से जूझ रहे लाभार्थियों को केवल तेजी लाने के लिए कहना पर्याप्त नहीं होगा। प्रशासनिक सहायता और नियमित मार्गदर्शन से ऐसे मामलों में अधिक ठोस परिणाम मिल सकते हैं।
PMAY-U 2.0 के साथ पुरानी योजना की भी समीक्षा
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाओं और भागीदारी में किफायती आवास (AHP) घटक की स्वीकृत परियोजनाओं पर चर्चा हुई। कुछ परियोजनाओं के निर्माण स्थल में बदलाव के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
वहीं, योजना के पहले चरण के अंतर्गत पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं में कटौती के बाद संशोधित परियोजनाओं को मंजूरी देने से जुड़े प्रस्ताव स्वीकार किए गए। नगरीय प्रशासन विभाग के अन्य प्रस्तावों पर भी निर्णय लिए गए।
इन प्रक्रियाओं का महत्व इसलिए है क्योंकि आवास परियोजनाओं को जमीन की उपलब्धता, स्थानीय जरूरतों और निर्माण की व्यावहारिक स्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ाना पड़ता है। समय पर निर्णय होने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
अब असली परीक्षा समय पर मकान सौंपने की
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी छत्तीसगढ़ के लिए अगला महत्वपूर्ण पड़ाव केवल स्वीकृत मकानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि निर्माणाधीन आवासों को पूरा कराकर परिवारों को उनका लाभ दिलाना है।
इसके लिए जिला और नगरीय निकाय स्तर पर नियमित प्रगति की निगरानी, निर्माण में देरी के कारणों का आकलन और जरूरतमंद लाभार्थियों को समय पर सहायता देना अहम होगा। साथ ही, योजना के आंकड़ों में पारदर्शिता बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि स्वीकृत, पूर्ण और निर्माणाधीन मकानों की स्थिति स्पष्ट बनी रहे।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, राज्य शहरी विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल तथा संबंधित विभागों और संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



