कोरबा में अवैध खनिज कारोबार पर बड़ा प्रहार: 10 वाहन जब्त, रेत के अवैध भंडारण का भी खुलासा
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में अवैध खनिज कारोबार पर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। रेत, ईंट और गिट्टी के अवैध परिवहन के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान में खनिज विभाग की उड़नदस्ता टीम ने अलग-अलग इलाकों से 10 वाहन जब्त किए हैं। इसके साथ ही कोटमर्रा में रेत का अवैध भंडारण भी पकड़ा गया है। इस कार्रवाई से जिले में खनिज संसाधनों के दोहन और उनके परिवहन पर निगरानी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
चार क्षेत्रों में छापेमारी, अलग-अलग वाहनों पर कार्रवाई
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत खनिज विभाग ने पाली, हरदीबाजार, दीपका और उरगा क्षेत्रों में कार्रवाई की।
पाली में रेत और ईंट का अवैध परिवहन करते हुए चार ट्रैक्टर पकड़े गए। हरदीबाजार में तीन ट्रैक्टरों को रेत और ईंट ले जाते हुए जब्त किया गया। इसी क्षेत्र में गिट्टी का परिवहन कर रहे एक हाइवा पर भी कार्रवाई हुई।
दीपका में गिट्टी ले जा रहा एक ट्रेलर और उरगा में रेत का परिवहन कर रहा एक ट्रैक्टर जब्त किया गया। इस तरह कार्रवाई में कुल 10 वाहन प्रशासन के कब्जे में आए।
कोटमर्रा में रेत का भंडारण भी जांच के दायरे में
खनिज विभाग की कार्रवाई केवल सड़कों पर चल रहे वाहनों तक सीमित नहीं रही। कोटमर्रा में जांच के दौरान रेत का अवैध भंडारण मिलने पर उसे भी जब्त किया गया।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अवैध खनिज कारोबार में केवल बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन का मामला ही नहीं होता। कई बार खनिज के भंडारण और उसकी आपूर्ति की पूरी श्रृंखला की जांच भी जरूरी होती है। यदि निगरानी केवल वाहनों तक सीमित रहे, तो अवैध रूप से जमा सामग्री की बिक्री जारी रहने की आशंका बनी रहती है।
हालांकि, कोटमर्रा में पकड़े गए भंडारण की मात्रा, उसके स्वामित्व और उससे जुड़े कारोबार के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
सरकारी राजस्व से लेकर पर्यावरण तक पड़ता है असर
खनिजों का अवैध उत्खनन और परिवहन केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है। इसका सीधा संबंध सरकारी राजस्व, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय व्यवस्था से भी है।
रेत निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन है, जबकि गिट्टी और ईंट का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर भवन निर्माण में होता है। इन सामग्रियों की मांग अधिक होने के कारण इनकी आपूर्ति पर नियमित निगरानी जरूरी है। यदि खनिजों का कारोबार नियमों से बाहर संचालित होता है, तो शासन को मिलने वाले वैध राजस्व पर असर पड़ सकता है। वहीं, अवैध उत्खनन की स्थिति में नदी तंत्र, भूमि और आसपास के पर्यावरण पर भी दबाव बढ़ सकता है।
इसलिए ऐसी कार्रवाई का महत्व जब्त वाहनों की संख्या से आगे जाता है। वास्तविक परिणाम इस बात से तय होंगे कि अवैध गतिविधियों पर कितनी निरंतरता से नजर रखी जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया कितनी प्रभावी रहती है।
जब्त वाहनों पर कहां होगी आगे की कार्रवाई?
खनिज विभाग के अनुसार, जब्त वाहनों को हरदीबाजार, दीपका और पाली थानों के साथ हरदीबाजार खनिज जांच चौकी की अभिरक्षा में रखा गया है। संबंधित मामलों में खान एवं खनिज अधिनियम, छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमों और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी वाहन को जब्त करना शुरुआती कदम है। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच, मामले के तथ्यों का सत्यापन और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई से ही जवाबदेही तय होती है।
अभियान की सफलता अब लगातार निगरानी पर निर्भर
कोरबा में की गई कार्रवाई अवैध खनिज गतिविधियों पर प्रशासन की सक्रियता दिखाती है। लेकिन इस तरह की समस्या पर स्थायी नियंत्रण के लिए समय-समय पर छापेमारी के साथ नियमित जांच, परिवहन दस्तावेजों का सत्यापन और अवैध भंडारण स्थलों पर निगरानी भी आवश्यक है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। नागरिकों से भी ऐसी गतिविधियों की जानकारी संबंधित विभाग को देने की अपील की गई है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कार्रवाई के बाद अवैध खनिज कारोबार पर कितना प्रभाव पड़ता है। यदि निगरानी लगातार बनी रहती है और नियमों का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित होता है, तो इससे सरकारी राजस्व की सुरक्षा के साथ प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है।
फिलहाल, 10 वाहनों की जब्ती और कोटमर्रा में अवैध रेत भंडारण का मामला जिले में खनिज कारोबार की निगरानी को लेकर प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है।



