दुर्ग में बड़ी चोरी का चौंकाने वाला खुलासा! सूने मकान से ₹1.60 लाख का सामान पार, 3 आरोपी और 2 नाबालिग पकड़े गए
दुर्ग समाचार: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में लंबे समय से बंद पड़े एक मकान को चोरों ने निशाना बनाया। आरोपियों ने पहले घर की रेकी की, फिर पीछे का दरवाजा तोड़कर नकदी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और घरेलू सामान चोरी कर लिया। उतई थाना पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों और दो अपचारी बालकों को अभिरक्षा में लिया है। वहीं, चोरी का सामान खरीदने के संदेह में दो अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
विदेश में रहता है मकान मालिक, बंद घर को बनाया निशाना
यह मामला उतई थाना क्षेत्र के ग्राम डुण्डेरा स्थित कचरू नगर का है। मकान मालिक आनंदु सुकुमारन काम के सिलसिले में विदेश में रहते हैं, जबकि उनका घर लंबे समय से बंद था। परिवार के दूसरे स्थान पर रहने के कारण मकान पर नियमित आवाजाही भी नहीं थी। इसी स्थिति का फायदा उठाकर आरोपियों ने चोरी की योजना बनाई।
इस घटना से यह सवाल भी उठता है कि लंबे समय तक खाली रहने वाले मकानों की सुरक्षा कितनी मजबूत है। ऐसे घर चोरों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं, खासकर जब आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने या नियमित जांच की व्यवस्था न हो।
पीछे का दरवाजा तोड़कर घर में घुसे चोर
चोरी का पता 9 अक्टूबर को तब चला, जब एक पड़ोसी ने मकान के पीछे रसोई का दरवाजा खुला होने की सूचना दी। इसके बाद मकान मालिक के बड़े भाई सदीश कुमार मौके पर पहुंचे। जांच करने पर दरवाजा टूटा मिला और घर के भीतर सामान बिखरा हुआ था।
घर से एलईडी टीवी, लैपटॉप, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, पंखे, मोबाइल फोन, सोने के आभूषण और अन्य घरेलू सामान गायब मिले। इसके बाद सदीश कुमार ने उतई थाने में शिकायत दर्ज कराई। चोरी गए सामान की कुल कीमत करीब 1.60 लाख रुपये बताई गई है।
तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण और पूछताछ के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में सामने आया कि वारदात से पहले बंद मकान की रेकी की गई थी। इसके बाद पीछे का दरवाजा तोड़कर चोरी की गई।
पुलिस ने राहुल धनकर (18), दुरपत धनकर (45) और रवि कुमार यादव (26) को पकड़ा है। इनके साथ दो अपचारी बालकों को भी अभिरक्षा में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर 58,500 रुपये नकद के अलावा टीवी, लैपटॉप, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, पंखे और अन्य घरेलू सामान बरामद किया गया है। चोरी के कुछ सामान को बेचने और उससे मिली रकम आपस में बांटने की बात भी जांच में सामने आई है।
चोरी का सामान खरीदने वालों की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर चोरी का सामान खरीदा था। इस मामले में विनोद देवांगन और अजय धनकर की तलाश जारी है।
चोरी की घटनाओं में सामान खरीदने वाले लोगों की भूमिका अहम हो सकती है, क्योंकि ऐसे खरीदार चोरी की वस्तुओं को बाजार में खपाने का रास्ता उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305, 331(4), 317(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
खाली मकान की सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है?
दुर्ग की यह घटना उन परिवारों के लिए चेतावनी है, जिनके मकान नौकरी, कारोबार या अन्य कारणों से लंबे समय तक खाली रहते हैं। केवल दरवाजे पर ताला लगाना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। कुछ सावधानियां चोरी का जोखिम कम कर सकती हैं:
- घर की नियमित निगरानी के लिए भरोसेमंद पड़ोसी या रिश्तेदार की मदद लें।
- मुख्य दरवाजे के साथ पीछे के दरवाजे और खिड़कियों की सुरक्षा भी जांचें।
- जरूरत के अनुसार सीसीटीवी कैमरे, मोशन सेंसर या अलार्म लगवाएं।
- घर लंबे समय तक बंद रहने पर समय-समय पर उसकी स्थिति की जांच कराएं।
- घर में नकदी, आभूषण और महंगे उपकरण रखने से बचें या उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें।
आगे की जांच पर रहेगी नजर
पुलिस की कार्रवाई से चोरी गए सामान का एक हिस्सा नहीं, बल्कि बड़ी मात्रा में नकदी और घरेलू वस्तुओं की बरामदगी की जानकारी सामने आई है। अब जांच का अगला महत्वपूर्ण पहलू फरार संदिग्धों की तलाश, चोरी के सामान की बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका और बरामदगी का पूरा हिसाब स्पष्ट करना होगा।
यह मामला सिर्फ एक परिवार के आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। यह दिखाता है कि लंबे समय से खाली पड़े मकानों की निगरानी और स्थानीय स्तर पर सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। पड़ोसियों की समय पर सूचना ने इस घटना को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई।



