गर्दन दर्द का खतरनाक कारण: मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने वालों के लिए 5 असरदार एक्सरसाइज
लंबे समय तक मोबाइल पर वीडियो देखना, लैपटॉप पर काम करना या झुककर पढ़ना आज की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। लेकिन जब यही आदत रोज कई घंटों तक जारी रहती है, तो गर्दन में अकड़न, कंधों में खिंचाव और सिर के पीछे दर्द जैसी परेशानियां उभरने लगती हैं। शुरुआत में लोग इन्हें थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि बार-बार होने वाला दर्द उनकी काम करने की क्षमता और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।
गर्दन की परेशानी का समाधान केवल महंगी कुर्सी खरीदना या बैठने का तरीका बदलना नहीं है। नियमित रूप से शरीर को हिलाना, स्क्रीन इस्तेमाल करते समय छोटे ब्रेक लेना और गर्दन की मांसपेशियों की क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। कुछ आसान एक्सरसाइज इसमें मदद कर सकती हैं, हालांकि हर तरह के गर्दन दर्द के लिए एक ही व्यायाम उपयुक्त नहीं होता।
मोबाइल पर झुककर देखने से गर्दन पर क्या असर पड़ता है?
मानव सिर का वजन सामान्यतः लगभग 4 से 6 किलोग्राम होता है। जब सिर कंधों के ऊपर संतुलित रहता है, तो गर्दन की मांसपेशियां और जोड़ उसे सहारा देने का काम करते हैं। लेकिन सिर को लंबे समय तक आगे झुकाकर रखने पर गर्दन के आसपास के ऊतकों पर पड़ने वाला यांत्रिक दबाव और मांसपेशियों का काम बढ़ सकता है।
यही वजह है कि मोबाइल को नीचे रखकर लगातार देखने या लैपटॉप की स्क्रीन की ओर झुकने से कुछ लोगों में गर्दन और कंधों की परेशानी बढ़ जाती है। हालांकि, गर्दन पर पड़ने वाले दबाव को किसी एक निश्चित वजन के रूप में बताना सही नहीं होगा, क्योंकि यह सिर के झुकाव, शरीर की बनावट और मांसपेशियों की सक्रियता पर निर्भर करता है।
समस्या केवल गलत मुद्रा की नहीं है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर को लगातार स्थिर रखने के बजाय बीच-बीच में उठना, चलना और सहज तरीके से गर्दन को हिलाना मांसपेशियों की अकड़न कम करने में मदद कर सकता है।
गर्दन दर्द को नजरअंदाज करना क्यों पड़ सकता है भारी?
गर्दन का दर्द कई कारणों से हो सकता है। मांसपेशियों में खिंचाव, लंबे समय तक एक मुद्रा में रहना, उम्र के साथ जोड़ों और डिस्क में होने वाले बदलाव तथा कुछ मामलों में नसों पर दबाव इसके संभावित कारण हैं।
समय-समय पर होने वाली हल्की अकड़न अक्सर गतिविधि और आराम के संतुलन से बेहतर हो सकती है। लेकिन बार-बार लौटने वाला दर्द, गर्दन घुमाने में लगातार परेशानी या हाथ तक फैलने वाला दर्द जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।
डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए सबसे उपयोगी रणनीति है कि दर्द बढ़ने का इंतजार न किया जाए। काम के दौरान नियमित अंतराल पर स्थिति बदलना, स्क्रीन को आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रखना और शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करना लंबे समय में मददगार हो सकता है।
गर्दन को राहत देने के लिए 5 आसान एक्सरसाइज
नीचे दिए गए व्यायाम सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें धीरे-धीरे और बिना जोर लगाए करना चाहिए। यदि किसी व्यायाम से दर्द बढ़े, चक्कर आए, झनझनाहट हो या हाथ में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत रुकें और चिकित्सकीय सलाह लें।
1. गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं घुमाएं
कैसे करें:
- कुर्सी पर सीधे बैठें और कंधों को आराम की स्थिति में रखें।
- सिर को धीरे-धीरे दाईं ओर घुमाएं, जहां तक आराम से जा सकें।
- कुछ सेकंड रुकें और सिर को वापस बीच में लाएं।
- अब इसी तरह बाईं ओर घुमाएं।
- शुरुआत में दोनों तरफ 2–3 बार दोहराएं। सहज लगे तो धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाया जा सकता है।
इस व्यायाम का उद्देश्य गर्दन की सहज गति बनाए रखना है, न कि उसे जबरदस्ती अधिक घुमाना। दर्द होने पर गति की सीमा कम रखें।
2. ठुड्डी को हल्का अंदर खींचें
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से कुछ लोगों में सिर कंधों के आगे की ओर रहने की आदत विकसित हो जाती है। ठुड्डी को हल्का अंदर खींचने का अभ्यास सिर और गर्दन को अधिक संतुलित स्थिति में लाने में मदद कर सकता है।
कैसे करें:
- सीधे बैठें और सामने की ओर देखें।
- बिना सिर नीचे झुकाए ठुड्डी को धीरे से पीछे की ओर खींचें।
- कल्पना करें कि सिर के पिछले हिस्से को ऊपर की ओर लंबा किया जा रहा है।
- 3–5 सेकंड तक सहज स्थिति बनाए रखें और फिर आराम करें।
- इसे 5 बार से शुरू करें।
इस दौरान गर्दन पर जोर न डालें और दांतों को कसकर न भींचें। व्यायाम का लक्ष्य स्वाभाविक संतुलन है, किसी एक मुद्रा में घंटों जमे रहना नहीं।
3. कंधों को पीछे और नीचे ले जाएं
गर्दन और कंधों की मांसपेशियां एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करती हैं। इसलिए केवल गर्दन पर ध्यान देने के बजाय कंधों की स्थिति और ऊपरी पीठ की गतिविधि पर भी ध्यान देना उपयोगी है।
कैसे करें:
- सीधे बैठें या खड़े हों।
- कंधों को धीरे से पीछे की ओर ले जाएं।
- फिर उन्हें आराम से नीचे आने दें।
- कुछ सेकंड रुककर सामान्य स्थिति में लौटें।
- इस प्रक्रिया को 8–10 बार दोहराएं।
कंधों को बहुत ज्यादा पीछे खींचने या कमर को अस्वाभाविक रूप से मोड़ने की जरूरत नहीं है। हल्की और नियंत्रित गति पर्याप्त है।
4. गर्दन की अंदरूनी मांसपेशियों को सक्रिय करें
गर्दन के आगे और गहरे हिस्से में मौजूद मांसपेशियां सिर को स्थिर रखने में भूमिका निभाती हैं। कुछ लोगों के लिए इन मांसपेशियों का नियंत्रित अभ्यास उपयोगी हो सकता है, लेकिन यदि पहले से गर्दन में दर्द है तो सही तकनीक सीखना जरूरी है।
हल्का अभ्यास कैसे करें:
- पीठ के बल लेटें और घुटनों को मोड़कर आराम से रखें।
- सिर को उठाए बिना ठुड्डी को हल्का अंदर की ओर खींचें।
- सिर के पीछे का हिस्सा सतह पर ही रहने दें।
- 3–5 सेकंड तक स्थिति बनाए रखें और फिर पूरी तरह आराम करें।
- शुरुआत में 5 बार करें, बशर्ते इससे दर्द न बढ़े।
इस शुरुआती अभ्यास में सिर को हाथ से उठाने या गर्दन को जोर से मोड़ने की जरूरत नहीं है। यदि दर्द हाथ तक फैलता है या पहले से गर्दन की बीमारी है, तो फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेकर ही आगे बढ़ें।
5. स्क्रीन के बीच सक्रिय ब्रेक लें
गर्दन को स्वस्थ रखने के लिए हर बार अलग व्यायाम करना जरूरी नहीं। नियमित रूप से बैठने की स्थिति बदलना और चलना भी महत्वपूर्ण है।
इसे दिनचर्या में कैसे शामिल करें:
- लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में खड़े हों।
- कुछ मिनट चलें और कंधों को सहज तरीके से हिलाएं।
- मोबाइल को यथासंभव आंखों के करीब ऊंचाई पर रखें।
- लैपटॉप पर काम करते समय स्क्रीन की ऊंचाई और कुर्सी की स्थिति को आराम के अनुसार व्यवस्थित करें।
- फोन देखते समय ठुड्डी को लगातार छाती की ओर झुकाए रखने से बचें।
यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति एक ही समय-सारणी का पालन करे। अपने काम और सुविधा के अनुसार छोटे, नियमित ब्रेक लेना अधिक व्यावहारिक है।
क्या उम्र बढ़ने से गर्दन का दर्द रोकना असंभव है?
उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क, जोड़ और दूसरे ऊतकों में बदलाव आना सामान्य है। स्कैन में ऐसे बदलाव दिखाई देना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति को दर्द भी होगा। कई लोगों में उम्र से जुड़े बदलाव होते हैं, लेकिन उन्हें कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती।
इसलिए लक्ष्य शरीर में होने वाले हर बदलाव को रोकना नहीं, बल्कि गर्दन की गतिशीलता, मांसपेशियों की क्षमता और रोजमर्रा की कार्यक्षमता को बनाए रखना होना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि, जरूरत के अनुसार ताकत बढ़ाने वाले व्यायाम और सही समय पर जांच इस दिशा में मदद कर सकते हैं।
बच्चों और किशोरों में रीढ़ की असामान्य वक्रता, जैसे स्कोलियोसिस, को केवल खराब मुद्रा या मोबाइल इस्तेमाल का परिणाम मानना भी सही नहीं है। इसके कई कारण हो सकते हैं और इसका आकलन विशेषज्ञ करते हैं। यदि बच्चे के कंधों या कमर की ऊंचाई में स्पष्ट अंतर दिखाई दे, तो चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।
गर्दन दर्द में कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
यदि दर्द कई दिनों तक बना रहता है, बार-बार लौटता है या कामकाज में बाधा डालता है, तो डॉक्टर या योग्य फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें। हाथ में सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी होने पर भी जांच जरूरी हो सकती है।
यदि गर्दन में दर्द किसी गंभीर चोट या दुर्घटना के बाद शुरू हुआ है, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी आती है, चलने या संतुलन बनाने में परेशानी होती है, या तेज दर्द के साथ बुखार अथवा गंभीर अस्वस्थता महसूस होती है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।



