CPR से बच सकती है जान! कार्डियक अरेस्ट में ये 5 जरूरी कदम कभी न भूलें
कार्डियक अरेस्ट के दौरान किसी की जान बचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार करना ही काफी नहीं होता। कई बार अस्पताल पहुंचने से पहले के कुछ मिनट सबसे अहम साबित होते हैं। ऐसे समय में सही तरीके से दिया गया कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) व्यक्ति के शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद कर सकता है और बचने की संभावना बढ़ा सकता है।
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आम लोग अक्सर बेहोशी, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच अंतर नहीं समझ पाते। कुछ लोग मदद करने से डरते हैं, जबकि कुछ गलत समय पर छाती दबाने लगते हैं। इसलिए जरूरी है कि आपात स्थिति के संकेत पहचानें, तुरंत मदद बुलाएं और अपनी जानकारी के अनुसार सही कदम उठाएं।
कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती मिनट इतने अहम क्यों हैं?
कार्डियक अरेस्ट वह स्थिति है, जब दिल अचानक प्रभावी ढंग से रक्त पंप करना बंद कर देता है। इससे मस्तिष्क और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना तेजी से कम हो जाता है। समय पर मदद न मिलने पर गंभीर नुकसान हो सकता है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही चीज नहीं हैं। हार्ट अटैक में आमतौर पर दिल की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनी में रुकावट होती है। वहीं, कार्डियक अरेस्ट में दिल की पंपिंग अचानक बंद हो सकती है। हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण भी बन सकता है।
सीपीआर का उद्देश्य दिल को सामान्य रूप से दोबारा चालू करना नहीं, बल्कि छाती पर दबाव के जरिए रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद करना है। यदि उपलब्ध हो, तो ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि कुछ प्रकार के कार्डियक अरेस्ट में बिजली का नियंत्रित झटका दिल की सामान्य लय बहाल करने में मदद करता है।
CPR कब देना चाहिए? इन संकेतों को पहचानें
यदि कोई वयस्क अचानक गिर जाए, आवाज देने और कंधे पर हल्के से थपथपाने पर प्रतिक्रिया न दे और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका मानकर तुरंत कार्रवाई करें।
ध्यान रखें कि कभी-कभी व्यक्ति की सांस सामान्य होने के बजाय अनियमित हांफने जैसी हो सकती है। इसे सामान्य सांस समझकर इंतजार न करें।
ऐसी स्थिति में:
- आसपास की जगह सुरक्षित है या नहीं, यह देखें।
- व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांस को तेजी से जांचें।
- भारत में एंबुलेंस के लिए 112 या 108 पर कॉल करें, जहां सेवा उपलब्ध हो। फोन पर आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।
- किसी दूसरे व्यक्ति से AED लाने को कहें, यदि वह उपलब्ध हो।
- यदि व्यक्ति बेहोश है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा, तो तुरंत सीपीआर शुरू करें।
सांस जांचने में ज्यादा समय न लगाएं। यदि आप प्रशिक्षित नहीं हैं, तो नाड़ी खोजने में समय बर्बाद करने के बजाय आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करना बेहतर है।
वयस्क को CPR देने का सही तरीका
1. व्यक्ति को सख्त और समतल सतह पर लिटाएं
यदि आसपास खतरा नहीं है, तो व्यक्ति को पीठ के बल किसी सख्त सतह पर रखें। किसी को आपातकालीन सेवा बुलाने के लिए कहें। यदि आप अकेले हैं, तो फोन को स्पीकर पर रखकर ऑपरेटर के निर्देश लेते हुए मदद शुरू करें।
2. छाती के बीचोंबीच दबाव दें
एक हथेली का निचला हिस्सा छाती के बीच में, छाती की हड्डी पर रखें। दूसरी हथेली उसके ऊपर रखें और उंगलियों को आपस में जोड़ लें। अपनी कोहनियां सीधी रखें और कंधों को हाथों के ठीक ऊपर रखें।
3. दबाव की गति और गहराई सही रखें
वयस्क की छाती को लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर नीचे दबाएं। गति एक मिनट में 100 से 120 दबाव की होनी चाहिए। हर दबाव के बाद छाती को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौटने दें और दबावों के बीच अनावश्यक रुकावट न करें।
4. मदद मिलने तक सीपीआर जारी रखें
सीपीआर तब तक जारी रखें, जब तक व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने या प्रतिक्रिया देने न लगे, प्रशिक्षित मदद आकर जिम्मेदारी न संभाल ले, जगह असुरक्षित न हो जाए या आप शारीरिक रूप से इसे जारी रखने में असमर्थ न हों।
5. AED उपलब्ध हो तो उसके निर्देश मानें
यदि AED उपलब्ध है, तो उसे चालू करें और उसकी आवाज या स्क्रीन पर दिए निर्देशों का पालन करें। उपकरण के पैड लगाने और विश्लेषण के दौरान किसी को व्यक्ति को छूने न दें। जरूरत पड़ने पर झटका देने के बाद तुरंत सीपीआर दोबारा शुरू करें, जैसा उपकरण निर्देश दे।
मुंह से सांस देना जरूरी है या केवल छाती दबाना काफी है?
यदि आप प्रशिक्षित नहीं हैं या बचाव वाली सांसें देने में असहज हैं, तो अचानक कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए वयस्क को केवल छाती पर दबाव देने वाला सीपीआर शुरू करना मददगार कदम है। मदद न करने से बेहतर है कि आप तुरंत दबाव देना शुरू करें और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देश मानें।
प्रशिक्षित व्यक्ति सामान्यतः 30 छाती दबाव के बाद 2 बचाव वाली सांसें दे सकता है। प्रत्येक सांस लगभग एक सेकंड में दें और देखें कि छाती ऊपर उठ रही है या नहीं। यदि सांस देना संभव न हो, तो छाती दबाना जारी रखें।
बच्चों और शिशुओं में सीपीआर की तकनीक वयस्कों से अलग होती है। ऐसे मामलों में प्रशिक्षण और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करना विशेष रूप से जरूरी है।
CPR कब नहीं देना चाहिए?
हर बेहोश व्यक्ति को सीपीआर की जरूरत नहीं होती। निर्णय व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सामान्य सांस के आधार पर करना चाहिए।
- व्यक्ति बेहोश है, लेकिन सामान्य रूप से सांस ले रहा है: छाती पर दबाव न दें। आपातकालीन सहायता बुलाएं और सांस पर नजर रखें। यदि चोट या रीढ़ की हड्डी की चोट की आशंका नहीं है, तो सुरक्षित करवट वाली स्थिति में रखा जा सकता है।
- व्यक्ति होश में है और सामान्य रूप से सांस ले रहा है: सीपीआर शुरू न करें। उसकी स्थिति का आकलन करें और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता लें।
- व्यक्ति सामान्य सांस नहीं ले रहा और प्रतिक्रिया नहीं दे रहा: सीपीआर शुरू करने में देरी न करें।
- आपके आसपास आग, बिजली या अन्य खतरा है: पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें और सुरक्षित तरीके से मदद करें।
यदि सीपीआर के दौरान व्यक्ति हिलने लगे या सामान्य सांस लेने लगे, तो छाती दबाना रोकें, उसकी सांस पर नजर रखें और आपातकालीन मदद आने तक निर्देशों का पालन करें।
क्या सीपीआर देने से पसलियां टूट सकती हैं?
वयस्क को प्रभावी सीपीआर देने के लिए छाती पर पर्याप्त दबाव जरूरी होता है। इस प्रक्रिया में कभी-कभी पसलियों या छाती की हड्डी में चोट लग सकती है। लेकिन यदि व्यक्ति कार्डियक अरेस्ट में है, तो दबाव न देने से जान जाने का खतरा कहीं अधिक गंभीर हो सकता है।
इसलिए संभावित चोट के डर से मदद शुरू करने में देरी न करें। सही तकनीक सीखना और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है।
सीपीआर की ट्रेनिंग क्यों जरूरी है?
कार्डियक अरेस्ट घर, सड़क, कार्यालय या किसी सार्वजनिक स्थान पर अचानक हो सकता है। ऐसे समय में आसपास मौजूद व्यक्ति की त्वरित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है। यदि परिवार में किसी को हृदय संबंधी जोखिम है, तो घर के सदस्यों को बेसिक लाइफ सपोर्ट और सीपीआर की व्यावहारिक ट्रेनिंग लेने पर विचार करना चाहिए।
सिर्फ वीडियो देखकर तकनीक समझ लेना और प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना एक जैसी बात नहीं है। मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण में छाती पर दबाव की गति, गहराई, सही हाथों की स्थिति और AED के इस्तेमाल का अभ्यास कराया जाता है।
सीपीआर हर व्यक्ति की जान बचा दे, इसकी गारंटी नहीं है। फिर भी कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तत्काल सीपीआर और समय पर डिफिब्रिलेशन से बचने की संभावना बेहतर हो सकती है। सबसे जरूरी बात है—लक्षण पहचानें, तुरंत मदद बुलाएं और कार्रवाई करने से डरें नहीं।



