भारत का शानदार खेल अभियान: कोहली की धमाकेदार पारी से नीरू धांडा के ऐतिहासिक स्वर्ण तक, एशियन गेम्स में बढ़ा दबदबा
भारतीय खेल जगत में बुधवार का दिन कई अलग-अलग वजहों से खास रहा। क्रिकेट में विराट कोहली की बड़ी पारी ने एक बार फिर उनके प्रभाव की चर्चा तेज कर दी, वहीं एशियन गेम्स 2026 में निशानेबाजी और स्क्वैश से भारत के लिए लगातार अच्छी खबरें आईं। इसी बीच भारत-श्रीलंका पुरुष क्रिकेट सेमीफाइनल से पहले मौसम ने मुकाबले की तैयारियों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
एक तरफ अनुभवी खिलाड़ियों की निरंतरता दिखाई दे रही है, तो दूसरी ओर नीरू धांडा जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए इतिहास लिख रहे हैं। यही भारतीय खेल अभियान की मौजूदा तस्वीर को दिलचस्प बनाता है।
कोहली की 139 रन की पारी ने फिर खींचा ध्यान
वेस्टइंडीज के खिलाफ तिरुवनंतपुरम वनडे में विराट कोहली ने नाबाद 139 रन की पारी खेलकर भारत को आठ विकेट से जीत दिलाई। इस पारी के दौरान उन्होंने वनडे क्रिकेट में 15,000 रन का आंकड़ा भी पार किया और सचिन तेंदुलकर के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे बल्लेबाज बने।
कोहली की इस पारी का असर केवल स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं रहा। भारतीय टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने उन्हें नई पीढ़ी के क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बताते हुए कहा कि टीम खुद को भाग्यशाली मानती है कि उसके पास उनके जैसा खिलाड़ी है।
सैमसन की टिप्पणी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि किसी अनुभवी खिलाड़ी की अहमियत केवल उसके आंकड़ों से तय नहीं होती। ड्रेसिंग रूम में उसकी तैयारी, फिटनेस, मैच के प्रति रवैया और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता भी युवा खिलाड़ियों के लिए सीख का माध्यम बनती है।
यही कारण है कि कोहली का प्रभाव उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड से आगे जाता दिखाई देता है।
अब नजर भारत-श्रीलंका सेमीफाइनल पर
एशियन गेम्स 2026 में पुरुष क्रिकेट का भारत और श्रीलंका के बीच सेमीफाइनल भी महत्वपूर्ण मुकाबला है। हालांकि इस मैच से पहले दोनों टीमों की तैयारी मौसम की वजह से प्रभावित हुई है।
नागोया पहुंचने के बाद भारी बारिश के कारण भारतीय टीम को पर्याप्त अभ्यास का अवसर नहीं मिला। क्वार्टर फाइनल मुकाबले भी बारिश के कारण नहीं हो सके और चारों मैच रद्द होने के बाद बेहतर आईसीसी रैंकिंग वाली टीमों को सेमीफाइनल में जगह मिली।
इसका मतलब यह है कि सेमीफाइनल में पहुंची चारों टीमों को प्रतियोगिता में वास्तविक मैच अभ्यास के बिना मैदान पर उतरना पड़ सकता है।
अगर मौसम साफ रहता है तो खिलाड़ियों को परिस्थितियों को जल्दी समझना होगा। पिच की गति, गेंद की उछाल और आउटफील्ड की स्थिति जैसे छोटे पहलू भी ऐसे मुकाबले में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
गुरुवार और शुक्रवार को मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है, जबकि शनिवार को फाइनल के दिन बारिश की संभावना बताई गई है। ऐसे में सेमीफाइनल का परिणाम ही नहीं, मैच के दौरान मौसम की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
नीरू धांडा ने रचा निशानेबाजी में नया इतिहास
एशियन गेम्स में भारत के लिए सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में से एक नीरू धांडा की रही।
26 वर्षीय निशानेबाज ने पहले महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास बनाया। इसके बाद काइनन चेनाई के साथ मिश्रित टीम ट्रैप स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीत लिया।
भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 40 में से 34 निशाने लगाए और एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण अपने नाम किया। कतर की जोड़ी 32 निशानों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
इससे पहले नीरू महिलाओं की टीम ट्रैप स्पर्धा में रजत भी जीत चुकी थीं। इस तरह उनका अभियान तीन पदकों के साथ समाप्त हुआ।
बीमारी के बाद वापसी ने उपलब्धि को बनाया खास
नीरू की उपलब्धि का एक दूसरा पहलू भी है।
एशियन गेम्स से लगभग 10 दिन पहले बीमारी के चलते उन्हें भारत में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था और प्रतियोगिता से पहले वह कमजोरी से भी जूझ रही थीं।
ऐसे में लगातार तीन पदक जीतना सिर्फ निशानेबाजी कौशल का मामला नहीं था। प्रतियोगिता के दौरान शारीरिक तैयारी, मानसिक मजबूती और दबाव से निपटना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा होगा।
उनका प्रदर्शन भारतीय शूटिंग के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि महिला शॉटगन वर्ग में भारत की पदक संभावनाएं अब सिर्फ कुछ स्थापित नामों तक सीमित नहीं रह गई हैं।
स्क्वैश में भी भारत ने बढ़ाई पदक की उम्मीद
एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला स्क्वैश टीमों ने भी सेमीफाइनल में पहुंचकर दो और पदक सुनिश्चित कर दिए हैं।
मौजूदा चैंपियन और शीर्ष वरीयता प्राप्त भारतीय पुरुष टीम ने क्वार्टर फाइनल में कुवैत को 2-0 से हराया। वहीं महिला टीम ने सिंगापुर को 2-0 से मात देकर अंतिम चार में जगह बनाई।
पुरुष टीम की शुरुआत पूल ए में चीन के खिलाफ 3-0 की जीत से हुई थी। इसके बाद नॉकआउट चरण में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच मुकाबले अपने पक्ष में किए।
कुवैत के खिलाफ वीर छोटरानी को शुरुआती मुकाबले में कड़ी चुनौती मिली। दूसरा गेम गंवाने के बाद उन्होंने वापसी करते हुए मैच अपने नाम किया। इसके बाद अभय सिंह ने अम्मार अल्तामिमी को सीधे गेमों में हराकर भारत की जीत सुनिश्चित कर दी।
यह परिणाम बताता है कि भारतीय स्क्वैश टीम में सिर्फ शीर्ष खिलाड़ियों पर निर्भरता नहीं है, बल्कि अलग-अलग मैच परिस्थितियों में मुकाबला खत्म करने की क्षमता भी मौजूद है।
भारत के खेल अभियान की बड़ी तस्वीर क्या है?
क्रिकेट, शूटिंग और स्क्वैश से आई इन खबरों को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ देखा जाए तो भारतीय खेल की एक व्यापक तस्वीर सामने आती है।
क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों की निरंतरता दिखाई दे रही है। शूटिंग में नए नाम इतिहास बना रहे हैं और स्क्वैश में टीम स्पर्धाओं में भारत पदक की दौड़ में मजबूती से मौजूद है।
एशियन गेम्स जैसे बड़े बहु-खेल आयोजन में असली चुनौती केवल पदक जीतना नहीं होती। अलग-अलग खेलों में लगातार अंतिम दौर तक पहुंचने के लिए मजबूत प्रतिभा प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और दबाव में प्रदर्शन की क्षमता जरूरी होती है।
नीरू धांडा की सफलता विशेष रूप से इस बात की ओर ध्यान खींचती है कि भारतीय खेलों में महिला खिलाड़ियों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। वहीं स्क्वैश टीमों का सेमीफाइनल तक पहुंचना भारत की रैकेट स्पोर्ट्स में गहराती प्रतिस्पर्धा को दिखाता है।
Sukma Student Death: दर्दनाक घटना के बाद आश्रम की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल, जांच से खुलेगा सच
अब क्रिकेट में भारत-श्रीलंका सेमीफाइनल पर नजर होगी। मौसम इसमें सबसे बड़ा अनिश्चित कारक बना हुआ है। दूसरी तरफ निशानेबाजी और स्क्वैश से भारत पहले ही मजबूत पदक आधार तैयार कर चुका है।



