हाशिम मूसा एनकाउंटर: पहलगाम हमले के आरोपी आतंकी के खात्मे से सुरक्षा अभियान को बड़ी बढ़त
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग इलाके में सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने की खबर सामने आई है। सुरक्षा बलों के मुताबिक, विशेष खुफिया सूचना के आधार पर कोराग क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया गया था। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने के बाद जवानों ने चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हुई और मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। बाद की तलाशी में उसके शव के साथ युद्ध संबंधी सामान बरामद होने की जानकारी दी गई है। अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
इस कार्रवाई का महत्व केवल एक आतंकी के मारे जाने तक सीमित नहीं है। हाशिम मूसा का नाम 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान सामने आया था। हमले में 26 लोगों की जान गई थी। हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मूसा समेत तीन संदिग्ध आतंकियों की जानकारी देने पर इनाम घोषित किया था।
सुरक्षा अभियानों के लिहाज से यूसमर्ग क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत भी है कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर आतंकियों की मौजूदगी वाले इलाकों में लगातार दबाव बनाए रखा जा रहा है। इस ऑपरेशन में सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त भागीदारी रही। सेना के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान संदिग्ध गतिविधि मिलने के बाद मुठभेड़ शुरू हुई।
पहलगाम केस से कैसे जुड़ा था मूसा?
पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान का स्केच जारी किया था और उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी सूचना के लिए इनाम की घोषणा की थी। बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की जांच ने हमले की साजिश और पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा तथा उसके सहयोगी नेटवर्क की भूमिका को अपनी चार्जशीट में दर्ज किया। दिसंबर 2025 में दाखिल 1,597 पन्नों की चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट समेत सात आरोपियों को मामले में नामजद किया गया था।
NIA ने अपनी जांच में हमले की योजना, उसे अंजाम देने की तैयारी और उससे जुड़े नेटवर्क का विवरण अदालत के सामने रखा था। बाद की जांच में पाकिस्तान स्थित हैंडलर साजिद जट्ट का नाम भी सामने आया। 2026 में NIA ने मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की।
अब आगे क्या होगा?
मूसा के मारे जाने के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि उसके साथ कोई अन्य आतंकी मौजूद था या नहीं और उसके पास से मिले सामान से नेटवर्क के बारे में कौन-सी अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। इसी वजह से सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान जारी रखा है।
विशेषज्ञ दृष्टि से देखें तो किसी ऐसे आरोपी की गिरफ्तारी या मुठभेड़ में मौत, जिसका नाम पहले से किसी बड़े आतंकी मामले की जांच में सामने आ चुका हो, जांच एजेंसियों के लिए संभावित डिजिटल, हथियारों या नेटवर्क संबंधी सुरागों का महत्व बढ़ा सकती है। हालांकि किसी बरामद सामग्री से क्या नई जानकारी मिलती है, यह जांच पूरी होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।



