रजाई खरीदने की बड़ी गलती न करें: कॉटन या फाइबर, ठंड में कौन सा विकल्प देगा बेहतर आराम?
सर्दियों में रजाई खरीदना सिर्फ गर्म रजाई चुनने का मामला नहीं है। एक ही तरह दिखने वाली दो रजाइयों में वजन, भराव की मात्रा, हवा के आवागमन, सफाई और इस्तेमाल की सुविधा में काफी अंतर हो सकता है। खासकर कॉटन और फाइबर रजाई के बीच चुनाव करते समय केवल कीमत या बाहरी डिजाइन देखकर फैसला करना बाद में परेशानी का कारण बन सकता है।
रजाई की गर्माहट केवल उसके नाम से तय नहीं होती। उसमें इस्तेमाल होने वाली फिलिंग, उसकी मात्रा, सिलाई और रजाई की मोटाई भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञ स्रोतों के अनुसार, फिलिंग की मात्रा को GSM यानी ग्राम प्रति वर्ग मीटर में बताया जा सकता है और सामान्य तौर पर अधिक GSM का मतलब अधिक भराव और ज्यादा वजन होता है। हालांकि वास्तविक गर्माहट रजाई के निर्माण और इस्तेमाल किए गए मटेरियल पर भी निर्भर करती है।
कॉटन रजाई क्यों पसंद की जाती है?
कॉटन यानी रूई प्राकृतिक फाइबर है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सांस लेने की क्षमता है। कॉटन से बनी बेडिंग सामान्यतः हवा के आवागमन में मदद करती है, इसलिए जिन लोगों को रात में ज्यादा गर्मी महसूस होती है, उनके लिए यह आरामदायक विकल्प हो सकती है।
हालांकि कॉटन रजाई का अनुभव उसकी फिलिंग और निर्माण पर निर्भर करेगा। अच्छी तरह भरी और मजबूत सिलाई वाली रजाई लंबे समय तक उपयोगी रह सकती है, जबकि कम गुणवत्ता वाली रूई या कमजोर सिलाई समय के साथ रजाई की बनावट को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए दुकान पर रजाई खरीदते समय सिर्फ यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि उसमें रूई है या नहीं। रूई की गुणवत्ता, भराव का समान वितरण और सिलाई की मजबूती भी जांचनी चाहिए।
फाइबर रजाई का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
फाइबर रजाई में आमतौर पर सिंथेटिक फिलिंग, जैसे पॉलिएस्टर आधारित फाइबर, का इस्तेमाल किया जाता है। इनका बड़ा फायदा यह है कि कई मॉडल हल्के होते हैं और उन्हें मोड़कर रखना आसान होता है। सिंथेटिक फिलिंग की गुणवत्ता के अनुसार उसकी गर्माहट, टिकाऊपन और आकार बनाए रखने की क्षमता बदल सकती है।
फाइबर रजाई खरीदते समय GSM और फिलिंग का प्रकार देखना इसलिए जरूरी है। सिर्फ ‘फाइबर रजाई’ लिखा होना यह नहीं बताता कि वह कितनी गर्म होगी।
कुछ सिंथेटिक बेडिंग गर्मी को ज्यादा रोक सकती है और कॉटन की तुलना में कम सांस लेने वाली महसूस हो सकती है। इसलिए यदि आपको रात में पसीना या ज्यादा गर्मी महसूस होती है, तो बहुत मोटी या अत्यधिक गर्म सिंथेटिक रजाई लेने से पहले कमरे के तापमान और अपनी सोने की आदत को ध्यान में रखना बेहतर है।
असली फैसला मौसम नहीं, इस्तेमाल की जरूरत से करें
रजाई चुनने का कोई एक फार्मूला हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता। ठंडे इलाके में रहने वाले व्यक्ति के लिए ज्यादा भराव वाली रजाई उपयोगी हो सकती है, जबकि अपेक्षाकृत हल्की सर्दी वाले क्षेत्र में अत्यधिक मोटी रजाई असुविधाजनक लग सकती है।
यदि रजाई को बार-बार उठाना, मोड़ना या दूसरे कमरे में ले जाना है, तो वजन महत्वपूर्ण हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी बहुत भारी रजाई हमेशा सुविधाजनक नहीं होती।
वहीं जिन लोगों को प्राकृतिक और अधिक सांस लेने वाला मटेरियल पसंद है, वे कॉटन विकल्प पर विचार कर सकते हैं। दूसरी ओर, आसान रखरखाव और हल्के वजन को प्राथमिकता देने वाले खरीदार सिंथेटिक फाइबर विकल्प देख सकते हैं।
एलर्जी या धूल की समस्या में सिर्फ मटेरियल न देखें
एलर्जी वाले लोगों के लिए रजाई चुनते समय केवल कॉटन बनाम फाइबर का सवाल पर्याप्त नहीं है। बेडिंग की सफाई, कवर और धूल के संपर्क को भी ध्यान में रखना चाहिए। Mayo Clinic के अनुसार, एलर्जी को नियंत्रित करने के लिए बेडिंग की नियमित सफाई और allergen-proof कवर जैसे उपाय उपयोगी हो सकते हैं।
इसलिए रजाई खरीदने से पहले यह देखना भी जरूरी है कि निर्माता ने उसे धोने या साफ करने के लिए क्या निर्देश दिए हैं। हर फाइबर रजाई मशीन वॉश के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
खरीदते समय इन 6 चीजों की जांच करें
- फिलिंग: अंदर किस प्रकार का मटेरियल इस्तेमाल हुआ है।
- GSM: भराव की मात्रा और संभावित वजन का अंदाजा लगाने के लिए।
- सिलाई: फिलिंग को अपनी जगह बनाए रखने के लिए सिलाई मजबूत और समान हो।
- वजन: रोज इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के लिए रजाई बहुत भारी तो नहीं।
- केयर लेबल: मशीन वॉश, ड्राई क्लीन या अन्य सफाई निर्देश।
- मौसम और कमरा: आपके इलाके की ठंड और कमरे के तापमान के हिसाब से रजाई की मोटाई चुनें।



