Facebook Friendship Fraud: फेसबुक की दोस्ती से 82.63 लाख की ठगी, राजनीतिक पद का झांसा देने वाली महिला गिरफ्तार
बिलासपुर: सोशल मीडिया पर बनी दोस्ती कब भरोसे में बदल जाए और वही भरोसा आर्थिक नुकसान का कारण बन जाए, इसका एक गंभीर मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आया है। सरकंडा थाना क्षेत्र के एक युवक ने आरोप लगाया कि फेसबुक के जरिए संपर्क में आई महिला ने खुद को एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल से जुड़ा बताते हुए संगठन में बड़ा पद दिलाने और पार्टी फंड के नाम पर उससे 82.63 लाख रुपये ले लिए। मामले में पुलिस ने मनेंद्रगढ़ के खोंगापानी से निखत परवीन साबरी को गिरफ्तार किया है।
शिकायतकर्ता चेतन आनंद दुबे के अनुसार, महिला से उसकी पहचान करीब एक साल पहले फेसबुक के माध्यम से हुई थी। बातचीत आगे बढ़ने के बाद महिला ने राजनीतिक संपर्कों और बड़े नेताओं तक पहुंच होने का दावा किया। इसी दौरान जमीन से जुड़े एक विवाद में मदद मिलने के बाद शिकायतकर्ता का उस पर भरोसा और बढ़ गया। पुलिस के सामने दी गई शिकायत के मुताबिक, इसके बाद राजनीतिक संगठन में पद दिलाने की बात सामने आई और कथित तौर पर पार्टी फंड के नाम पर रकम मांगी जाने लगी।
छोटी-छोटी रकम से शुरू हुआ लेन-देन, आंकड़ा 82 लाख तक पहुंचा
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू रकम के भुगतान का तरीका है। शिकायत के मुताबिक, 11 जुलाई 2025 से 17 अगस्त 2026 के बीच अलग-अलग समय पर पैसे दिए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 62,63,194 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए, जबकि लगभग 20 लाख रुपये नकद दिए जाने का दावा है। कुछ रकम महिला की बहन के खाते में भी ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।
इस तरह शिकायत में कुल रकम 82,63,194 रुपये बताई गई है।
पुलिस जांच में अब बैंक खातों की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, बातचीत और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। खासकर यह पता लगाना जरूरी होगा कि अलग-अलग खातों में पहुंची रकम का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह हुआ और कथित तौर पर मांगी गई रकम का उद्देश्य क्या बताया गया था।
पद नहीं मिला तो शुरू हुआ विवाद
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लंबे समय तक रकम देने के बावजूद उसे वह राजनीतिक पद नहीं मिला, जिसका कथित तौर पर भरोसा दिलाया गया था। इसके बाद उसने रकम वापस मांगनी शुरू की। आरोप है कि इसी दौरान बातचीत बिगड़ गई और महिला ने उसे धमकी दी तथा बाद में संपर्क बंद कर दिया।
यही वह बिंदु था जहां मामला निजी विवाद से निकलकर पुलिस जांच तक पहुंचा। बैंक लेन-देन और शिकायत में दिए गए तथ्यों के आधार पर सरकंडा पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और आरोपी महिला को मनेंद्रगढ़ के खोंगापानी से पकड़ा।
जांच का दायरा बिलासपुर से मनेंद्रगढ़ तक
पुलिस की जांच केवल बिलासपुर के मामले तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार निखत परवीन के खिलाफ मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में भी शिकायतों और कथित लेन-देन से जुड़ी जानकारी सामने आई है। पुलिस इन तथ्यों की अलग से जांच कर रही है। किसी अन्य मामले में जिम्मेदारी तय करने से पहले पुलिस की जांच और संबंधित साक्ष्यों का सामने आना जरूरी होगा।
यही वजह है कि फिलहाल इस पूरे मामले में सामने आए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता। गिरफ्तार होना जांच की एक प्रक्रिया है; मामले में आरोपों की पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगी।
सोशल मीडिया से आर्थिक ठगी का नया जोखिम
इस मामले का सबसे बड़ा सबक केवल बड़ी रकम का नुकसान नहीं है। सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की पहचान, राजनीतिक संपर्क या प्रभावशाली लोगों तक पहुंच के दावे को वास्तविक मान लेना आर्थिक जोखिम पैदा कर सकता है।
खासकर जब कोई व्यक्ति राजनीतिक पद, सरकारी नियुक्ति, संगठनात्मक जिम्मेदारी या किसी प्रभावशाली व्यक्ति तक पहुंच दिलाने के नाम पर पैसे मांगता है, तो भुगतान से पहले स्वतंत्र रूप से उसकी पहचान और दावे की पुष्टि करना जरूरी है। किसी राजनीतिक दल का नाम इस्तेमाल किया जाना अपने आप में किसी व्यक्ति के अधिकृत प्रतिनिधि होने का प्रमाण नहीं है।
इस मामले में भी कथित तौर पर पहले व्यक्तिगत भरोसा बनाया गया और उसके बाद बड़े आर्थिक लेन-देन हुए। इसलिए जांच के साथ यह पहलू भी महत्वपूर्ण रहेगा कि भरोसा किस तरह बनाया गया और किस आधार पर शिकायतकर्ता ने लगातार भुगतान किया।
आगे पुलिस जांच में क्या सामने आ सकता है?
अब जांच में कई सवाल अहम होंगे—क्या कथित राजनीतिक पद के लिए वास्तव में किसी संगठनात्मक स्तर पर कोई प्रक्रिया चल रही थी? पार्टी फंड के नाम पर मांगी गई रकम का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड था या नहीं? अलग-अलग खातों में भेजी गई राशि कहां इस्तेमाल हुई? और क्या इसी तरीके से अन्य लोगों से भी रकम ली गई?
इन सवालों के जवाब बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल बातचीत, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से सामने आ सकते हैं। यदि जांच में अन्य शिकायतें भी पुष्ट होती हैं, तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।



