Asian Games 2026: हरिता भद्रा ने 200 मीटर में जीता कांस्य, 0.01 सेकंड ने बदली तस्वीर; अनिमेष कुजूर पांचवें स्थान पर
नई दिल्ली। एशियाई खेल 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए 200 मीटर स्प्रिंट का दिन दो अलग-अलग कहानियां लेकर आया। महिला वर्ग में हरिता भद्रा ने बेहद करीबी मुकाबले में कांस्य पदक अपने नाम किया, जबकि पुरुष वर्ग में भारत के अनिमेष कुजूर पदक से चूककर पांचवें स्थान पर रहे। हरिता का 23.20 सेकंड का समय उन्हें जापान की अबिगेइरुफुका इडो से महज 0.01 सेकंड आगे ले गया।
आखिरी मीटर में हरिता ने हासिल किया एशियाई खेलों का पदक
महिला 200 मीटर फाइनल में हरिता भद्रा ने 23.20 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। सिंगापुर की शांति परेरा ने 22.78 सेकंड के साथ स्वर्ण और चीन की चेन युजी ने 22.93 सेकंड के साथ रजत पदक जीता।
भारत के लिए हरिता की उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि कांस्य और चौथे स्थान के बीच अंतर केवल एक सेकंड का सौवां हिस्सा था। जापान की इडो ने 23.21 सेकंड का समय दर्ज किया। यानी फिनिश लाइन पर शरीर की स्थिति और आखिरी क्षण की तकनीक ने पदक का फैसला किया।
यह पदक भारतीय महिला 200 मीटर के लिए भी लंबे इंतजार के बाद आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस स्पर्धा में भारत का पिछला एशियाई खेल पदक 2018 में आया था। हरिता इस इवेंट में पदक जीतने वाली चुनिंदा भारतीय महिलाओं की सूची में शामिल हो गई हैं।
राष्ट्रीय स्तर की तेजी को एशियाई मंच पर बदला
हरिता का प्रदर्शन अचानक सामने आई सफलता नहीं है। एशियाई खेलों से पहले उन्होंने राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 23.14 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था। एशियाई खेलों में उनका 23.20 सेकंड का प्रदर्शन उस स्तर के बेहद करीब रहा।
यही निरंतरता किसी स्प्रिंटर के विकास का महत्वपूर्ण संकेत होती है। 100 और 200 मीटर जैसी स्पर्धाओं में मामूली समय अंतर भी अंतिम परिणाम बदल सकता है। हरिता का प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हासिल की गई गति को बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोहराना पदक की दौड़ में निर्णायक हो सकता है।
फाइनल में भारत की दूसरी धावक उन्नति अयप्पा बोलैंड 23.46 सेकंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं।
अनिमेष कुजूर की रफ्तार पदक तक नहीं पहुंची
पुरुष 200 मीटर फाइनल में अनिमेष कुजूर ने 20.80 सेकंड में दौड़ पूरी की और पांचवें स्थान पर रहे। भारतीय धावक ने प्रतियोगिता में फाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता दिखाई, लेकिन पदक के लिए जिस स्तर की गति की जरूरत थी, वह इस दौड़ में हासिल नहीं कर सके।
दूसरी ओर, थाईलैंड के पुरिपोल बूनसन ने 19.88 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। चीन के हुआंग यूवेन ने 20.45 सेकंड में रजत और जापान के सोशी मिजुबुको ने 20.56 सेकंड में कांस्य हासिल किया।
कुजूर का पांचवां स्थान उनकी हाल की प्रगति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। वह 200 मीटर में भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्तर की रफ्तार तक पहुंच चुके हैं और इस साल घरेलू प्रतियोगिताओं में 20.59 सेकंड का समय भी दर्ज कर चुके हैं। इसलिए एशियाई खेलों का यह परिणाम उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगले सुधार की दिशा तय करने वाला अनुभव हो सकता है।
भारतीय स्प्रिंट के लिए क्या संकेत?
हरिता का कांस्य केवल एक पदक नहीं है। महिला 200 मीटर में लंबे अंतराल के बाद भारत की वापसी और पुरुष 200 मीटर में कुजूर की लगातार मौजूदगी बताती है कि भारतीय स्प्रिंट में प्रतिस्पर्धा का स्तर बढ़ रहा है।
हालांकि, एशिया के शीर्ष धावकों के साथ अंतर अभी भी समय के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। ऐसे में अगले चरण में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, रेस-विशिष्ट तैयारी, चोट से बचाव, रिकवरी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव महत्वपूर्ण होंगे।
हरिता के लिए यह पहला एशियाई खेल पदक उनके करियर में नई उम्मीद खोलता है। वहीं कुजूर के लिए पांचवां स्थान यह बताता है कि फाइनल तक पहुंचने के बाद अगली चुनौती शीर्ष तीन में जगह बनाने के लिए आखिरी कुछ सेकंड के हिस्सों को बेहतर करना है।



