ECI की बड़ी बैठक: Form-6 विवाद पर आयोग का रुख साफ, SIR और चुनावी व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की मौजूदगी में शनिवार, 26 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई। बैठक ऐसे समय में हुई है जब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता पंजीकरण के Form-6 और आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर सार्वजनिक बहस तेज है।
बैठक में आयोग ने कई प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर सहमति जताई। आयोग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, Form-6 के साथ Declaration को लेकर उठे विवाद को उसने SIR की प्रक्रिया के संदर्भ में अलग नजरिए से देखा है। आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था न्यायिक जांच के दायरे में भी आ चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में SIR के दौरान नए मतदाताओं से Form-6 के साथ Declaration Form लेने की व्यवस्था का उल्लेख किया था।
हालांकि, Form-6 को लेकर सार्वजनिक विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। 26 सितंबर की रिपोर्टिंग में विपक्षी दलों की ओर से आरोप लगाए गए कि Form-6 में बदलाव और उसके साथ मांगी गई अतिरिक्त जानकारी को लेकर कानूनी और प्रक्रियात्मक सवाल हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि उसके निर्णय संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। इसलिए मौजूदा विवाद को समझने के लिए आयोग के आधिकारिक पक्ष और राजनीतिक दलों के आरोपों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
SIR में नोटिस पाने वालों के लिए प्रक्रिया में बदलाव
बैठक में तय किया गया कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। आयोग ने संकेत दिया कि हर मामले में अलग से सुनवाई करना सामान्य प्रक्रिया नहीं होगी।
यह बदलाव प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े पैमाने पर मतदाता सूची के सत्यापन में प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से कार्यालय बुलाना समय और संसाधन दोनों पर दबाव डाल सकता है। घर-घर दस्तावेज संग्रह की व्यवस्था से ऐसे मतदाताओं को भी सुविधा मिल सकती है जो उम्र, आर्थिक स्थिति, रोजगार या अन्य कारणों से कार्यालय तक आसानी से नहीं पहुंच पाते।
आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए आवश्यकता के अनुसार हेल्प डेस्क स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेजी सत्यापन की प्रक्रिया में कमजोर वर्ग प्रशासनिक सहायता से वंचित न रह जाएं।
Form-6 विवाद क्यों बना हुआ है महत्वपूर्ण?
Form-6 नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रमुख आवेदन है। इसलिए इसमें किसी भी अतिरिक्त घोषणा, दस्तावेज या डिजिटल प्रक्रिया का सीधा संबंध पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों से पड़ सकता है।
यही वजह है कि Form-6 को लेकर उठे सवाल केवल तकनीकी विवाद नहीं हैं। इसका संबंध इस बात से है कि पात्र नागरिक मतदाता सूची में किस तरह शामिल होंगे और सत्यापन प्रक्रिया कितनी सरल या जटिल होगी।
सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले में SIR के लिए आयोग द्वारा Form-6 के साथ Declaration Form लेने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। अदालत ने SIR की संवैधानिक और वैधानिक पृष्ठभूमि पर भी विस्तार से विचार किया।
वहीं दूसरी ओर, 26 सितंबर को सामने आए राजनीतिक और सार्वजनिक विवादों में यह सवाल उठाया गया कि Form-6 या उससे जुड़ी घोषणा में बदलाव की प्रक्रिया किस कानूनी आधार पर हुई। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया को देखना जरूरी है।
ECINET की स्वतंत्र समीक्षा पर भी फैसला
बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET से जुड़ा है। आयोग ने तय किया है कि इसकी समीक्षा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्तों (DEC) और स्वतंत्र IIT/IIM विशेषज्ञों की समिति द्वारा की जाएगी।
यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि ECINET को आयोग ने मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची खोज, आवेदन की स्थिति, BLO से संपर्क, e-EPIC और शिकायत निवारण जैसी कई चुनावी सेवाओं को एकीकृत करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है। आयोग के अनुसार ECINET में 40 से अधिक ऐप और पोर्टल की सेवाओं को एकीकृत किया गया है।
ऐसे में स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा का महत्व केवल सॉफ्टवेयर की कार्यक्षमता तक सीमित नहीं है। मतदाता डेटा की शुद्धता, रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया, एक्सेस कंट्रोल और शिकायतों के समाधान की पारदर्शिता भी डिजिटल चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ी हुई है।
बैठकों में एजेंडा और कार्यवाही को लेकर भी बड़ा फैसला
आयोग ने अपनी बैठकों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए तय किया है कि सभी बैठकों का एजेंडा पहले से भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही भी जारी की जाएगी।
वर्तमान विवाद के संदर्भ में यह निर्णय विशेष महत्व रखता है। आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आने की खबरों के बाद संस्थागत निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई है। आयोग की ओर से पहले यह कहा गया है कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं तथा निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
इस लिहाज से बैठक के एजेंडा और कार्यवाही को व्यवस्थित रूप से दर्ज करना भविष्य में निर्णयों की प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकता है।
अधिकारियों की जवाबदेही और विदेश यात्राओं पर भी नियम
बैठक में अधिकारियों की APAR रिपोर्ट हर वर्ष निर्धारित समयसीमा, यानी 31 दिसंबर तक पूरी करने का फैसला लिया गया। साथ ही अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
इसके अलावा आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के अनुपालन को सख्ती से सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। ये फैसले सीधे मतदाता सूची से जुड़े नहीं हैं, लेकिन चुनाव आयोग की प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में देखे जा सकते हैं।
दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा
बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़े दावे-आपत्तियों की समयसीमा में भी बदलाव का फैसला बताया गया है। आयोग के अनुसार दिल्ली में अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
SIR के व्यापक कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग चरण और समयसीमाएं निर्धारित की गई हैं। इसलिए संबंधित राज्य के मतदाताओं के लिए स्थानीय निर्वाचन कार्यालय की अधिसूचना और आधिकारिक निर्देशों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा। ECI की उपलब्ध समय-सारणी में महाराष्ट्र और दिल्ली समेत कई राज्यों के लिए SIR की अलग-अलग प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं।
आगे क्या होगा?
26 सितंबर की बैठक का सबसे बड़ा असर यह हो सकता है कि चुनाव आयोग अब SIR और मतदाता सूची से जुड़े प्रशासनिक कामकाज को अधिक स्पष्ट प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ाए। खासकर Form-6 और ECINET जैसे मुद्दों पर आने वाले समय में आयोग के आधिकारिक दस्तावेज, न्यायिक कार्यवाही और राज्यों से मिलने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगी।
एक तरफ आयोग का कहना है कि Form-6 से जुड़ी Declaration व्यवस्था कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में कायम है, जबकि दूसरी तरफ इसके स्वरूप और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में विवाद का वास्तविक समाधान केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि स्पष्ट नियम, सार्वजनिक रिकॉर्ड, पारदर्शी प्रक्रिया और पात्र मतदाताओं के लिए आसान शिकायत निवारण से होगा।



