महासमुंद में मजदूरों को कर्ज के जाल में फंसाने वाला नेटवर्क बेनकाब, नाबालिग से जुड़े मामले ने खोली पूरी परत
महासमुंद। गरीब परिवार के सामने जब अचानक पैसों की जरूरत आती है तो कुछ हजार रुपये की एडवांस रकम भी बड़ी मदद नजर आती है। लेकिन महासमुंद में सामने आया मामला बताता है कि यही आर्थिक मजबूरी कथित तौर पर मजदूरों को ऐसे जाल में धकेल सकती है, जहां कर्ज चुकाने के नाम पर उनकी मेहनत और आजादी दोनों पर नियंत्रण स्थापित किया जाता है।
महासमुंद पुलिस ने कथित मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी से जुड़े एक नेटवर्क के खिलाफ छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआत एक नाबालिग के अस्पताल पहुंचने और उसके गर्भवती होने की सूचना से हुई। जांच आगे बढ़ी तो दूसरे राज्यों में मजदूरों को भेजने और उनसे जुड़े आर्थिक लेनदेन के कथित नेटवर्क के संकेत मिले।
अस्पताल की सूचना से खुलती गई नेटवर्क की कड़ियां
पुलिस के अनुसार, 21 सितंबर को मिले अस्पताल मेमो के बाद जांच शुरू हुई। नाबालिग से जुड़े मामले की जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर ऐसे लोगों के बारे में जानकारी मिली जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में काम के लिए भेजते थे।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, मजदूरों को छत्तीसगढ़ से बाहर ईंट भट्ठों और अन्य कामों में भेजे जाने की व्यवस्था की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस व्यवस्था में किस स्तर पर दलाल, श्रमिक ठेकेदार और दूसरे लोग जुड़े थे तथा मजदूरों से संबंधित लेनदेन किस तरीके से होता था।
कुछ हजार का एडवांस, फिर कर्ज और निर्भरता का आरोप
इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू कथित आर्थिक जाल है। पुलिस के मुताबिक परिवारों को पहले एडवांस रकम दी जाती थी। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में काम के लिए भेजा जाता था और कथित रूप से कर्ज तथा दबाव के जरिए मजदूरी कराई जाती थी।
ऐसी व्यवस्था में वास्तविक स्थिति समझना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि शुरुआत में मजदूर और उसका परिवार इसे रोजगार का अवसर मान सकता है। लेकिन यदि एडवांस रकम को लगातार बढ़ते कर्ज के रूप में दिखाया जाए, मजदूरी का पूरा भुगतान न हो या काम छोड़ने की स्वतंत्रता प्रभावित हो, तो रोजगार और बंधुआ श्रम के बीच का अंतर बेहद गंभीर हो जाता है।
यही कारण है कि पुलिस द्वारा बरामद किए गए मजदूर पलायन से जुड़े रजिस्टर, डायरियां, बैंक दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड इस जांच में अहम माने जा रहे हैं। इनसे यह समझने में मदद मिल सकती है कि कितने लोगों को कहां भेजा गया और पैसों का लेनदेन किस तरह हुआ।
नाबालिग से जुड़े मामले ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
जांच में सामने आया नाबालिग से जुड़ा मामला इस पूरे प्रकरण का सबसे संवेदनशील पक्ष है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नाबालिग को भी उसके परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर भेजे जाने की बात सामने आई है। वहां उसके कथित शोषण और गर्भवती होने की सूचना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
नाबालिग से जुड़े आरोपों की जांच अलग से महत्वपूर्ण है। इसमें पीड़िता की सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, बयान और कानूनी संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी होता है। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए नेटवर्क के दूसरे संभावित सदस्यों की भूमिका भी खंगालनी शुरू की है।
10 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई, करोड़ों की नकदी बरामद
पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। कार्रवाई में ₹1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा मजदूरों के पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरियां, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज स्टांप से जुड़े दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन भी जब्त की गई है।
पुलिस के लिए अब इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को जोड़ना अहम होगा। बैंक खातों की जांच से आर्थिक लेनदेन की कड़ियां सामने आ सकती हैं, जबकि मोबाइल और कॉल रिकॉर्ड से नेटवर्क के बीच संपर्कों का पता लगाया जा सकता है।
पांच गिरफ्तार, जांच का दायरा अभी बाकी
महासमुंद पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार लोगों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा से जुड़े आरोपी शामिल हैं। पुलिस की जांच फिलहाल यह पता लगाने पर केंद्रित है कि नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं तथा अलग-अलग राज्यों में कितने मजदूरों को इसके जरिए भेजा गया।
खल्लारी थाने में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। विवेचना के दौरान पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जानकारी दी है।
अब जांच का सबसे अहम हिस्सा क्या होगा?
इस कार्रवाई के बाद केवल गिरफ्तार आरोपियों तक जांच सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा। बरामद रजिस्टरों में दर्ज मजदूरों की पहचान, उनके परिवारों से संपर्क, दूसरे राज्यों में भेजे गए स्थान, भुगतान का रिकॉर्ड और ईंट भट्ठों या अन्य रोजगार स्थलों से संबंध—इन सभी कड़ियों को जोड़ना जांच के लिए महत्वपूर्ण होगा।
यदि पुलिस को रिकॉर्ड से बड़े पैमाने पर मजदूरों के शोषण की पुष्टि मिलती है, तो यह मामला केवल एक जिले की कार्रवाई नहीं रह जाएगा। इससे अंतरराज्यीय श्रमिक पलायन की निगरानी, मजदूरों के पंजीकरण और दूसरे राज्यों में भेजे जाने वाले श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठेंगे।



