छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर: 28 साल बाद खुले गंगरेल के सभी 14 गेट, बस्तर में बाढ़ से बिगड़े हालात
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में सामान्य जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। खासकर बस्तर संभाग में इंद्रावती और शबरी जैसी नदियों के उफान पर आने से बाढ़ का खतरा गंभीर हो गया है। कई निचले इलाकों में पानी भरने के बाद प्रशासन और आपदा राहत दलों को ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटना पड़ा है। इसी बीच धमतरी के गंगरेल बांध से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिणी ओडिशा के ऊपर बने डिप्रेशन के प्रभाव से प्रदेश में भारी बारिश की स्थिति बनी है। 25 सितंबर को छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना भी जताई गई थी।
बस्तर में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
बस्तर संभाग में लगातार बारिश का सबसे बड़ा असर नदी-नालों और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। इंद्रावती का जलस्तर बढ़ने और ओडिशा के खाटीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के बीच नदी किनारे के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई है और SDRF की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगाई गई हैं।
सुकमा में शबरी नदी के उफान के कारण कई पंचायतों का संपर्क प्रभावित हुआ है, जबकि बीजापुर में इंद्रावती के बढ़ते जलस्तर को लेकर भी अलर्ट की स्थिति बनी हुई है।
बस्तर जिले में कुछ गांवों से ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया गया है। लगातार पानी आने से मकानों, सड़कों और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसी परिस्थितियों में सबसे बड़ी चुनौती केवल बाढ़ का पानी नहीं, बल्कि प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री, स्वास्थ्य सेवाएं और आवागमन बनाए रखना होती है।
28 साल बाद गंगरेल के सभी 14 गेट खोलने की नौबत
धमतरी का गंगरेल बांध भी इस बारिश के केंद्र में आ गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार करीब 28 साल बाद बांध के सभी 14 गेट खोले गए और बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया। यह कदम लगातार हो रही बारिश और जलस्तर प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
गंगरेल जैसे बड़े जलाशयों में जल निकासी का फैसला केवल मौजूदा बारिश को देखकर नहीं लिया जाता। इसमें जलाशय का वर्तमान स्तर, आने वाले पानी की मात्रा और आगे के मौसम पूर्वानुमान जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है। ऐसे समय में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी हो जाता है।
सड़क, रेल और हवाई संपर्क पर भी असर
बाढ़ और भूस्खलन का असर बस्तर के परिवहन नेटवर्क पर भी पड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक रायपुर-कोंटा राष्ट्रीय राजमार्ग-30 और जगदलपुर-बीजापुर-भोपालपत्तनम मार्ग पर कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित हुआ। वहीं किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन के कोरापुट रेलखंड में भूस्खलन से रेल परिचालन भी बाधित हुआ है।
यह स्थिति बस्तर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि सड़क और रेल संपर्क प्रभावित होने पर दूरस्थ इलाकों तक राहत पहुंचाना कठिन हो सकता है। बारिश थमने के बाद भी क्षतिग्रस्त सड़कों और रेल पटरियों की मरम्मत में समय लग सकता है।
रायपुर में भी तेज बारिश, दूसरे जिलों में असर
राजधानी रायपुर में भी भारी बारिश दर्ज की गई है। लगातार वर्षा के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी है। वहीं बारिश के कारण राजनांदगांव में प्रस्तावित झांकी कार्यक्रम को एक दिन के लिए स्थगित किया गया।
इससे साफ है कि मौसम का असर केवल नदी किनारे के जिलों तक सीमित नहीं है। शहरी क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था, यातायात और सार्वजनिक कार्यक्रम भी लगातार बारिश से प्रभावित हो रहे हैं।
26 सितंबर को भी मौसम पर नजर
IMD के अनुसार 26 सितंबर को भी छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने दक्षिण छत्तीसगढ़ में बने सिस्टम के प्रभाव को देखते हुए सतर्कता बनाए रखने की जरूरत बताई है।
रविवार से बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना बताई गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में पहले से जलभराव या नदी का जलस्तर ऊंचा है, वहां खतरा बारिश कम होने के तुरंत बाद खत्म नहीं होता। जलाशयों से पानी छोड़े जाने और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले अतिरिक्त जल के कारण नदियों का स्तर कुछ समय तक ऊंचा रह सकता है।
अब सबसे जरूरी है सतर्कता
मौजूदा हालात में नदी, नाले और जलभराव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश जोखिम बढ़ा सकती है। प्रशासन के राहत शिविरों और स्थानीय चेतावनियों को प्राथमिकता देना जरूरी है। खासकर बस्तर, सुकमा और बीजापुर जैसे प्रभावित क्षेत्रों में मौसम और नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।



