होर्मुज का नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’! अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का नया कदम, 7 दिन में रास्ता खोलने को तैयार ईरान
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के केंद्र में अब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा गलियारों में से एक होर्मुज की खाड़ी भी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर होर्मुज स्ट्रेट को “Trump Strait” के नाम से दर्शाने वाला नक्शा साझा किया है। ट्रंप इससे पहले भी इस जलमार्ग का नाम बदलने की बात कह चुके हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर साझा किया गया नक्शा अपने आप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी समुद्री मार्ग का आधिकारिक नाम नहीं बदलता।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज को दोबारा खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, यदि अमेरिका कुछ शर्तों को स्वीकार करता है तो सात दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है और बातचीत बहाल की जा सकती है।
एक नाम से कहीं बड़ा है होर्मुज का सवाल
होर्मुज स्ट्रेट केवल ईरान और आसपास के देशों के बीच स्थित एक समुद्री मार्ग नहीं है। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धुरी है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में इस मार्ग से औसतन करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल का आवागमन हुआ, जो दुनिया की पेट्रोलियम तरल खपत के लगभग पांचवें हिस्से के बराबर था। इसी रास्ते से वैश्विक LNG व्यापार का भी बड़ा हिस्सा गुजरता है।
यही कारण है कि होर्मुज में तनाव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर परिवहन लागत, बीमा प्रीमियम और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका प्रभाव आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई तक पहुंच सकता है।
ईरान का 7 दिन वाला प्रस्ताव क्या है?
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान ने मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा है। इसके तहत आवश्यक शर्तें पूरी होने के बाद सात दिनों में होर्मुज को सामान्य समुद्री आवाजाही के लिए खोला जा सकता है और परमाणु वार्ता फिर शुरू हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक दबाव और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों को इस प्रस्ताव से जोड़ा है।
इसका मतलब यह है कि होर्मुज अब केवल सैन्य टकराव का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि संभावित कूटनीतिक बातचीत में भी एक महत्वपूर्ण सौदेबाजी का विषय बन चुका है।
ट्रंप के ‘Trump Strait’ संदेश का क्या मतलब?
ट्रंप ने 2 सितंबर को Truth Social पर सवाल उठाया था कि अमेरिका के नियंत्रण में होने के बाद क्या होर्मुज स्ट्रेट का नाम बदलकर “TRUMP STRAIT” कर दिया जाना चाहिए। इसके बाद व्हाइट हाउस की ओर से भी ऐसा नक्शा साझा किया गया जिसमें जलमार्ग को इसी नाम से दर्शाया गया था।
हालांकि, किसी समुद्री मार्ग का अंतरराष्ट्रीय नाम केवल किसी नेता के सोशल मीडिया पोस्ट या नक्शे से नहीं बदल जाता। इसलिए फिलहाल इसे ट्रंप द्वारा दिया गया राजनीतिक संदेश और नाम बदलने का प्रस्ताव मानना अधिक सटीक है, न कि होर्मुज के आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय नाम में बदलाव।
आगे क्या होगा?
अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर व्यावहारिक समझौता बनता है। यदि बातचीत आगे बढ़ती है और समुद्री यातायात सामान्य होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है। इसके उलट, यदि सैन्य तनाव और समुद्री प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहते हैं तो तेल आपूर्ति और शिपिंग लागत पर दबाव बना रह सकता है।
EIA के अनुसार, होर्मुज से निकलने वाले तेल के लिए कुछ वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग मौजूद हैं, लेकिन उनकी क्षमता पूरे समुद्री प्रवाह की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि इस जलमार्ग की स्थिति पर दुनिया के ऊर्जा बाजारों की नजर बनी हुई है।



