कॉलेज की फीस नहीं थी, 3 दिन रोए… फिर कंप्यूटर के सामने बिताए घंटे, 25 की उम्र में करोड़पति बनने का दावा
नई दिल्ली। कभी करीब एक लाख रुपये की कॉलेज फीस का इंतजाम न कर पाने की वजह से पढ़ाई का एक साल रुक गया था। हालात ऐसे थे कि मनोज सारू के मुताबिक वह लगातार तीन दिन तक रोते रहे। लेकिन इसी मुश्किल दौर ने उन्हें इंटरनेट की दुनिया में ऐसा रास्ता तलाशने के लिए प्रेरित किया, जिसने आगे चलकर उनके करियर की दिशा बदल दी।
आज मनोज सारू ‘Technology Gyan’ नाम के टेक्नोलॉजी चैनल से जुड़े हैं और उनके चैनल पर करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं। हालांकि उनकी कहानी को केवल ‘गरीबी से करोड़पति’ बनने की कहानी के तौर पर देखना अधूरा होगा। इसके पीछे लंबे समय तक सीखना, कंटेंट बनाना, असफलताओं से वापस लौटना और डिजिटल प्लेटफॉर्म की बदलती अर्थव्यवस्था को समझना भी शामिल है।
फीस नहीं जुटी तो टूटने के बजाय रास्ता खोजा
मनोज के अनुसार, बीटेक में दाखिले के लिए करीब एक लाख रुपये की जरूरत थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि यह रकम आसानी से जुटाई जा सके। कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाने के बाद उन्होंने एक साल का गैप लिया।
यही वह समय था जब कंप्यूटर और इंटरनेट में उनकी पुरानी दिलचस्पी ने उन्हें नया रास्ता दिखाया। इंटरनेट से घर बैठे कमाई के बारे में पढ़ने के बाद उन्होंने ऑनलाइन काम के विकल्प तलाशने शुरू किए।
यह वह दौर भी था जब भारत में सस्ता मोबाइल इंटरनेट तेजी से फैल रहा था। इंटरनेट केवल सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का माध्यम नहीं रह गया था; धीरे-धीरे यह सीखने, काम करने और कंटेंट से कमाई करने का प्लेटफॉर्म भी बन रहा था।
पहला YouTube चैनल चला, फिर एक झटके में हो गया डिलीट
मनोज ने टेक्नोलॉजी से जुड़ा अपना पहला YouTube चैनल शुरू किया। शुरुआती मेहनत का असर दिखा और चैनल पर करीब 25-26 हजार सब्सक्राइबर्स पहुंच गए। कुछ वीडियो को भी अच्छी प्रतिक्रिया मिलने लगी।
लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शुरुआती सफलता हमेशा स्थायी नहीं होती। मनोज के मुताबिक, उन्हें YouTube की कम्युनिटी गाइडलाइंस की पूरी जानकारी नहीं थी और उनका पहला चैनल डिलीट हो गया।
यह उनके लिए बड़ा झटका था। जिस काम में समय और मेहनत लगाई थी, उसका डिजिटल आधार ही खत्म हो गया। लेकिन उन्होंने इसी अनुभव को अगली शुरुआत की सीख में बदल दिया।
‘Technology Gyan’ से शुरू हुआ दूसरा अध्याय
पहले चैनल के बाद उन्होंने ‘Technology Gyan’ नाम से नया चैनल बनाया। इस बार उनका फोकस केवल वीडियो अपलोड करने पर नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म को समझने और लगातार सीखने पर भी रहा।
करीब दो साल की मेहनत के बाद उन्हें YouTube से पहली पेमेंट मिली। यह रकम 250 डॉलर थी। उनके लिए इसका महत्व रकम से कहीं ज्यादा था, क्योंकि पहली बार यह साबित हुआ कि उनके बनाए डिजिटल कंटेंट से वास्तविक आय संभव है।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने शुरुआती कमाई को केवल निजी खर्च में इस्तेमाल करने के बजाय वेबसाइट, डोमेन और प्रमोशन जैसे कामों में लगाया। यानी कमाई को दोबारा उसी डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने में लगाया, जिससे आय पैदा हो रही थी।
कॉलेज के साथ 17-18 घंटे काम करने का दावा
मनोज की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी कार्यशैली से जुड़ा है। उनके मुताबिक, कॉलेज की पढ़ाई के साथ वह YouTube और ब्लॉगिंग पर काम करते थे और कई बार 17-18 घंटे तक कंप्यूटर पर समय बिताते थे।
छोटे कमरे, आसपास के शोर और सीमित संसाधनों के बीच वीडियो तैयार करना, रिसर्च करना, लेख लिखना और एडिटिंग करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। कई बार उन्हें रात देर तक काम करना पड़ता था।
हालांकि यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है—सफलता के लिए लगातार 17-18 घंटे काम करना कोई सार्वभौमिक फॉर्मूला नहीं है। मनोज की कहानी में मेहनत के साथ कंटेंट की उपयोगिता, टेक्नोलॉजी की समझ, लंबे समय तक निरंतरता और सही समय पर डिजिटल अवसर का फायदा भी महत्वपूर्ण रहे।
शुरुआत में ब्रांड्स ने जवाब नहीं दिया, बाद में खुद आने लगे
डिजिटल क्रिएटर के शुरुआती दौर में सबसे कठिन चीजों में से एक पहचान बनाना होती है। मनोज के मुताबिक, शुरुआत में जब वह ब्रांड्स को ईमेल करते थे तो अक्सर कोई जवाब नहीं मिलता था।
फिर उनके टेक्नोलॉजी ट्यूटोरियल्स को दर्शकों का रिस्पॉन्स मिलने लगा। 2018-19 के दौरान उनके चैनल के कई वीडियो तेजी से लोकप्रिय हुए और सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ती चली गई। बाद में चैनल ने 10 लाख सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा भी पार किया।
यह बदलाव बताता है कि डिजिटल क्रिएटर के लिए शुरुआती दौर में कमाई से ज्यादा महत्वपूर्ण विश्वसनीय ऑडियंस बनाना होता है। जब किसी चैनल के पास ऐसी ऑडियंस बन जाती है जिसे कंटेंट पर भरोसा हो, तो विज्ञापन, ब्रांड डील और दूसरे डिजिटल बिजनेस अवसरों के रास्ते खुल सकते हैं।
25 साल में करोड़पति बनने का दावा कितना महत्वपूर्ण है?
मनोज सारू के मुताबिक, उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में करोड़पति बनने का मुकाम हासिल किया। आज उनके YouTube चैनल पर 1.61 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स होने का दावा किया जाता है और वह लाखों रुपये की मासिक कमाई की बात भी करते हैं।
इन निजी आय और संपत्ति संबंधी दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना आसान नहीं है, इसलिए इन्हें उनके अपने दावे के रूप में देखना चाहिए। लेकिन उनके डिजिटल करियर की लंबी यात्रा यह जरूर दिखाती है कि YouTube अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा। टेक्नोलॉजी, शिक्षा, फाइनेंस, स्किल्स और अन्य क्षेत्रों में उपयोगी कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए यह एक व्यावसायिक प्लेटफॉर्म भी बन चुका है।
इस कहानी की असली सीख सिर्फ करोड़पति बनना नहीं
मनोज सारू की कहानी का सबसे बड़ा सबक शायद यह नहीं है कि किसी व्यक्ति ने कम उम्र में कितनी संपत्ति बनाई। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि एक असफल शुरुआत के बाद उन्होंने अपनी दिशा बदली, डिजिटल स्किल सीखी और लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में काम जारी रखा।
पहला चैनल डिलीट होना उनके लिए अंत हो सकता था, लेकिन उन्होंने उसे सीख में बदला। पहली YouTube पेमेंट छोटी थी, लेकिन उसी ने आगे निवेश करने का आत्मविश्वास दिया। शुरुआत में ब्रांड्स ने जवाब नहीं दिया, लेकिन लगातार काम के बाद वही स्थिति बदल गई।



