ओमान के पास MV Cape Dao पर हमला, भारतीय नाविक की मौत; 19 भारतीयों की सुरक्षा पर नजर
नई दिल्ली/मस्कट। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब समुद्र में काम करने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। भारत की ओर बढ़ रहे मालवाहक जहाज MV Cape Dao पर ओमान के पास हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। भारतीय दूतावास ने बुधवार को घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जहाज पर 19 भारतीय नागरिक सवार थे और उनकी सुरक्षा को लेकर ओमानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।
फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी सूरज यादव के रूप में की है। यूनियन के मुताबिक यादव जहाज पर ‘वाइपर’ के पद पर कार्यरत थे। दूसरी ओर, जहाज पर कुल भारतीय क्रू सदस्यों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। भारतीय दूतावास ने 19 भारतीय नागरिकों की जानकारी दी है, जबकि FSUI और एक समुद्री प्रशासन रिपोर्ट का हवाला देने वाली रिपोर्टों में कुल 28 क्रू सदस्यों में 20 भारतीय बताए गए हैं।
व्यापारी जहाज अब सिर्फ व्यापार का माध्यम नहीं, जोखिम वाले क्षेत्र में काम करने की जगह बन गया
MV Cape Dao पर हमला ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया का समुद्री क्षेत्र पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। यह जहाज भारत की ओर जा रहा था और रिपोर्टों के मुताबिक उस पर दो टॉरपीडो से हमला किया गया। दोनों हमलों से जहाज के बाईं ओर के हिस्से को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
FSUI के अनुसार एक हमला पोर्ट साइड के C-deck के आवासीय हिस्से के पास और दूसरा इंजन रूम के करीब हुआ। हालांकि हमले के जिम्मेदार पक्ष की अभी आधिकारिक पहचान नहीं हुई है। इसलिए किसी संगठन या देश को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
सूरज यादव की मौत कैसे हुई?
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सूरज यादव को हमले में सिर पर चोट लगी थी। जहाज के क्रू को सुरक्षित निकालकर ओमान में तट तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों में बताया गया है कि एक अन्य भारतीय इंजीनियर को मामूली चोट आई, जबकि बाकी बचे क्रू सदस्यों को सुरक्षित बताया गया है।
भारतीय दूतावास ने सूरज यादव की मौत पर दुख जताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मिशन संबंधित RPSL एजेंसी और परिवार के संपर्क में है तथा ओमानी अधिकारियों के साथ क्रू की सुरक्षा को लेकर समन्वय कर रहा है।
हमले की जिम्मेदारी अभी साफ नहीं
इस घटना का एक अहम पहलू यह है कि हमले की जिम्मेदारी अभी किसी पक्ष ने आधिकारिक रूप से नहीं ली है। इसलिए हमले के पीछे कौन था, इसका निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा।
समुद्री सुरक्षा के लिहाज से यह पहलू महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाए जाने की स्थिति में हमले का स्रोत, इस्तेमाल किए गए हथियार और जहाज के रूट की जानकारी आगे की सुरक्षा व्यवस्था तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
होर्मुज क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा क्यों अहम है?
भारत के लिए यह मामला सिर्फ एक जहाज पर हुए हमले तक सीमित नहीं है। भारतीय नागरिक वैश्विक समुद्री परिवहन क्षेत्र में बड़ी संख्या में काम करते हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अस्थिरता सीधे भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की सुरक्षा से जुड़ जाती है।
किसी व्यापारी जहाज पर हमला होने से केवल चालक दल की जान खतरे में नहीं पड़ती। जहाजों के रूट बदलने, सुरक्षा लागत बढ़ने, बीमा प्रीमियम बढ़ने और माल ढुलाई में देरी जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। इसका असर आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
जहाज के क्रू की संख्या को लेकर दो अलग आंकड़े क्यों?
इस घटना की रिपोर्टिंग में एक तथ्य विशेष ध्यान देने योग्य है। भारतीय दूतावास ने जहाज पर 19 भारतीय नागरिकों की मौजूदगी बताई है। वहीं FSUI ने 28 सदस्यीय क्रू में 20 भारतीय होने का दावा किया है। हिंदुस्तान टाइम्स ने समुद्री प्रशासन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए भी 28 क्रू और 20 भारतीयों की जानकारी दी है।
ऐसे मामलों में क्रू सूची, शिपिंग एजेंसी और आधिकारिक प्रशासनिक रिकॉर्ड के अपडेट होने के साथ आंकड़ों में अंतर दिखाई दे सकता है। इसलिए अंतिम संख्या के लिए आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।
नाविक संगठन ने उठाए सुरक्षा को लेकर सवाल
FSUI ने घटना के बाद नागरिक नाविकों की सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री मार्ग की मांग की है। संगठन ने सूरज यादव की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।
यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यापारी जहाजों के नाविक किसी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं होते। वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और माल परिवहन की व्यवस्था में काम करने वाले नागरिक कर्मचारी होते हैं। इसलिए संघर्ष वाले समुद्री क्षेत्रों में उनके लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल और सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
आगे क्या होगा?
अब जांच में तीन सवाल सबसे अहम होंगे—हमला किसने किया, जहाज को निशाना बनाने का कारण क्या था और पश्चिम एशिया के संवेदनशील समुद्री मार्गों पर भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था किस तरह मजबूत की जाएगी।
भारतीय दूतावास और ओमानी अधिकारी क्रू की सुरक्षा तथा मृतक नाविक के परिवार से जुड़े मामलों पर समन्वय कर रहे हैं। वहीं शिपिंग कंपनियों और RPSL एजेंसियों के लिए भी यह घटना जोखिम मूल्यांकन और क्रू सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा का कारण बन सकती है।



