रात में कंधे का दर्द क्यों बढ़ जाता है? करवट लेते ही तकलीफ हो तो इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
दिनभर काम करते हुए कंधे का दर्द कई बार उतना परेशान नहीं करता, लेकिन रात को बिस्तर पर जाते ही वही दर्द तेज महसूस होने लगता है। करवट बदलने पर तकलीफ बढ़ना, प्रभावित कंधे के बल सो न पाना या दर्द के कारण बार-बार नींद खुलना ऐसी शिकायतें हैं जिन्हें केवल थकान या गलत सोने की पोजिशन मानकर छोड़ देना हमेशा सही नहीं होता।
रात में बढ़ने वाला कंधे का दर्द कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। कभी इसकी वजह दिनभर कंधे पर पड़ा अतिरिक्त दबाव या मामूली मांसपेशीय खिंचाव होती है, तो कई मामलों में रोटेटर कफ की समस्या, बर्साइटिस, फ्रोजन शोल्डर या आर्थराइटिस जैसी स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए दर्द की अवधि, उसकी जगह और हाथ की गतिविधियों पर उसके प्रभाव को समझना जरूरी है।
लेटते ही दर्द ज्यादा क्यों महसूस होता है?
कंधा शरीर के सबसे अधिक गतिशील जोड़ों में से एक है। हाथ को ऊपर उठाने, पीछे ले जाने और अलग-अलग दिशाओं में घुमाने के लिए कई मांसपेशियां और टेंडन मिलकर काम करते हैं।
दिन में शरीर लगातार स्थिति बदलता रहता है। लेकिन रात में लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने और प्रभावित कंधे पर शरीर का वजन पड़ने से पहले से मौजूद सूजन या ऊतक संबंधी समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है।
यही कारण है कि कुछ लोग दिन में सामान्य गतिविधियां कर लेते हैं, लेकिन रात को उसी कंधे पर करवट लेना मुश्किल हो जाता है।
हर बार दर्द का कारण कंधे का जोड़ नहीं होता
कंधे में महसूस होने वाला दर्द हमेशा कंधे से ही शुरू हो, यह जरूरी नहीं है। गर्दन की नसों पर दबाव पड़ने जैसी समस्याओं में दर्द कंधे से होते हुए हाथ तक जा सकता है। मांसपेशियों में खिंचाव और टेंडन से जुड़ी समस्याएं भी कंधे के आसपास दर्द पैदा कर सकती हैं।
यही वजह है कि डॉक्टर के लिए दर्द की सही दिशा जानना महत्वपूर्ण होता है। मरीज को यह बताना चाहिए कि दर्द केवल कंधे तक सीमित है या गर्दन, बांह, हाथ अथवा पीठ के ऊपरी हिस्से तक भी जाता है।
एक और महत्वपूर्ण बात है—अचानक बाएं कंधे में दर्द या दबाव के साथ सीने में दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर या बेचैनी हो तो इसे केवल कंधे की समस्या मानना ठीक नहीं है। ऐसे लक्षणों में हृदय संबंधी आपात स्थिति की संभावना को ध्यान में रखते हुए तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
रात का दर्द किन समस्याओं से जुड़ा हो सकता है?
रात में लगातार कंधे का दर्द कई स्थितियों में दिखाई दे सकता है।
रोटेटर कफ की समस्या: इसमें कंधे के आसपास के टेंडन प्रभावित हो सकते हैं। हाथ को सिर के ऊपर ले जाने या वजन उठाने पर दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है।
बर्साइटिस: कंधे के जोड़ के आसपास मौजूद बर्सा नामक तरल से भरी संरचना में सूजन होने पर दर्द और संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
फ्रोजन शोल्डर: इसमें केवल दर्द ही नहीं, बल्कि कंधे की गति धीरे-धीरे सीमित होने लगती है। कपड़े पहनना, बाल संवारना या हाथ को पीठ के पीछे ले जाना मुश्किल हो सकता है।
आर्थराइटिस: जोड़ में होने वाले बदलावों के कारण दर्द और अकड़न की समस्या हो सकती है, जो उम्र और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग स्तर की हो सकती है।
इन सभी स्थितियों का इलाज एक जैसा नहीं होता। इसलिए सिर्फ दर्द कम करने पर ध्यान देने के बजाय उसके कारण की पहचान करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कब समझें कि अब जांच जरूरी है?
अगर कंधे का दर्द आपकी नींद और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर इन संकेतों पर ध्यान दें:
- रात में दर्द के कारण बार-बार नींद खुलना
- प्रभावित कंधे की तरफ करवट न ले पाना
- शर्ट पहनने या उतारने में परेशानी
- हाथ को सिर के ऊपर उठाने में कठिनाई
- पीठ के पीछे हाथ ले जाने में दिक्कत
- कंधे में लगातार कमजोरी महसूस होना
- कई दिनों तक दर्द में सुधार न होना
- धीरे-धीरे कंधे की गति कम होते जाना
इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में गंभीर बीमारी का प्रमाण नहीं है, लेकिन लगातार समस्या रहने पर जांच कराना उचित है।
चोट के बाद दर्द हो तो ज्यादा सावधानी जरूरी
गिरने, खेल के दौरान चोट लगने या भारी वजन उठाने के बाद अचानक कंधे में तेज दर्द शुरू हो जाए और हाथ उठाना मुश्किल हो जाए, तो इंतजार नहीं करना चाहिए।
इसी तरह कंधे का आकार असामान्य दिखाई देना, अत्यधिक सूजन, हाथ का इस्तेमाल न कर पाना या अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे संकेत तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत बता सकते हैं।
कंधे को पूरी तरह आराम देना हमेशा सही नहीं
दर्द होने पर कंधे को बिल्कुल न हिलाना स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक पूरी तरह निष्क्रिय रखने से अकड़न बढ़ सकती है। दूसरी ओर, बिना कारण जाने जोरदार स्ट्रेचिंग या इंटरनेट पर मिली एक्सरसाइज करना भी उचित नहीं है।
सही व्यायाम समस्या के कारण पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, फ्रोजन शोल्डर और रोटेटर कफ की समस्या में व्यायाम की जरूरत और तरीका अलग हो सकता है। इसलिए लगातार दर्द, कमजोरी या सीमित मूवमेंट की स्थिति में फिजियोथेरेपी या एक्सरसाइज डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना ज्यादा सुरक्षित है।
रात में कंधे को राहत देने के लिए क्या करें?
सोते समय सबसे पहले प्रभावित कंधे पर सीधे शरीर का वजन डालने से बचना चाहिए। दूसरी तरफ करवट लेकर सोने पर प्रभावित हाथ को तकिए का सहारा देने से कुछ लोगों को आराम मिल सकता है। कुछ लोगों के लिए पीठ के बल सोना भी अधिक आरामदायक हो सकता है।
लेकिन अगर इन उपायों के बावजूद रात का दर्द लगातार बना रहता है, तो केवल सोने की पोजिशन बदलते रहना समाधान नहीं है। उस स्थिति में मूल कारण की जांच ज्यादा महत्वपूर्ण है।
डॉक्टर को सिर्फ “कंधे में दर्द है” इतना बताना काफी नहीं
जांच के दौरान कुछ छोटी जानकारियां डॉक्टर के लिए समस्या समझने में काफी उपयोगी हो सकती हैं। मरीज को यह बताना चाहिए कि दर्द कब शुरू हुआ, किस गतिविधि के बाद शुरू हुआ, रात में किस स्थिति में बढ़ता है, हाथ उठाने पर क्या होता है और क्या दर्द गर्दन या हाथ तक फैलता है।
अगर दर्द नींद खराब कर रहा है, तो यह जानकारी भी डॉक्टर को जरूर देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर शारीरिक जांच के बाद एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई जैसी जांचों की सलाह दी जा सकती है।



