विटामिन D की कमी और दिल की सेहत: क्या सच में बढ़ सकता है हार्ट डिजीज का खतरा?
विटामिन D का नाम आते ही आमतौर पर हड्डियों और कैल्शियम का ख्याल आता है। लेकिन शरीर में इसकी भूमिका इससे कहीं व्यापक है। यह हड्डियों और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होने के साथ-साथ शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि विटामिन D का स्तर और हृदय स्वास्थ्य आपस में किस तरह जुड़े हैं।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। विटामिन D की कमी और हृदय रोग के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि केवल विटामिन D की कमी ही हार्ट डिजीज का कारण बनती है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, खराब खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसे कारक हृदय स्वास्थ्य पर कहीं अधिक व्यापक प्रभाव डालते हैं।
विटामिन D और दिल के बीच क्या संबंध है?
विटामिन D शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के संतुलन के अलावा कई अन्य प्रक्रियाओं में भी शामिल होता है। कुछ शोधों में कम विटामिन D स्तर को हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य कार्डियोवैस्कुलर जोखिमों के साथ जोड़ा गया है।
लेकिन विशेषज्ञों के लिए असली सवाल यह है कि क्या विटामिन D की कमी खुद हृदय रोग पैदा करती है या फिर खराब स्वास्थ्य, कम धूप, मोटापा और अन्य स्थितियां एक साथ दोनों समस्याओं से जुड़ी हो सकती हैं।
यही कारण है कि सिर्फ विटामिन D की गोली लेना हृदय रोग से बचाव का प्रमाणित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। हृदय की सुरक्षा के लिए पूरी जीवनशैली पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
कमी होने पर शरीर क्या संकेत दे सकता है?
विटामिन D की कमी कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है। कुछ लोगों में लंबे समय तक थकान, मांसपेशियों में कमजोरी या दर्द और हड्डियों में दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली कमी हड्डियों की मजबूती को प्रभावित कर सकती है। बच्चों में इसका संबंध रिकेट्स से और वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया जैसी स्थितियों से हो सकता है।
समस्या यह है कि थकान या कमजोरी जैसे लक्षण कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर विटामिन D की कमी मान लेना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर रक्त जांच के जरिए इसकी स्थिति का मूल्यांकन कर सकते हैं।
धूप विटामिन D का प्राकृतिक स्रोत है
शरीर सूर्य की पराबैंगनी-B (UVB) किरणों की मदद से विटामिन D बना सकता है। इसी वजह से धूप में पर्याप्त समय न बिताना विटामिन D के कम स्तर से जुड़ा एक कारण हो सकता है।
लेकिन “हर व्यक्ति को रोज इतने मिनट धूप में रहना ही चाहिए” जैसा एक निश्चित नियम सभी के लिए लागू नहीं किया जा सकता। त्वचा का रंग, उम्र, मौसम, भौगोलिक स्थिति, कपड़े, दिन का समय और सनस्क्रीन का इस्तेमाल जैसे कई कारक शरीर में बनने वाले विटामिन D को प्रभावित करते हैं।
इसलिए धूप को स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली का हिस्सा बनाना उपयोगी हो सकता है, लेकिन अत्यधिक धूप में रहकर विटामिन D बढ़ाने की कोशिश करना भी सही रणनीति नहीं है।
खाने से भी मिल सकता है विटामिन D
कुछ खाद्य पदार्थ विटामिन D के स्रोत हैं। फैटी फिश जैसे सैल्मन, टूना और मैकेरल में इसकी अच्छी मात्रा पाई जाती है। अंडे की जर्दी और कुछ फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ भी आहार में योगदान दे सकते हैं।
जिन लोगों के भोजन में विटामिन D के प्राकृतिक स्रोत कम हैं, उनके लिए फोर्टिफाइड दूध या अन्य खाद्य विकल्प उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति की वास्तविक जरूरत उसकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और आहार पर निर्भर करती है।
इसलिए केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार रखना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।
क्या विटामिन D की गोली लेना जरूरी है?
यहीं सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है। विटामिन D शरीर के लिए आवश्यक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के हाई-डोज सप्लीमेंट लेना चाहिए।
विटामिन D वसा में घुलने वाला विटामिन है और अत्यधिक मात्रा में सप्लीमेंट लेने से शरीर में कैल्शियम का स्तर असामान्य रूप से बढ़ सकता है। इससे मतली, कमजोरी, अत्यधिक प्यास और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं तथा गंभीर मामलों में किडनी और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।
इसलिए सप्लीमेंट की जरूरत होने पर डोज और अवधि डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करना अधिक सुरक्षित है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ विटामिन D पर निर्भर न रहें
विटामिन D का पर्याप्त स्तर बनाए रखना समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन हृदय रोग से बचाव की पूरी रणनीति इसे नहीं बनाया जा सकता।
दिल की सेहत के लिए ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना, धूम्रपान से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और वजन का प्रबंधन ज्यादा व्यापक भूमिका निभाते हैं।



