सुबह के नाश्ते में काले चने क्यों हो सकते हैं बेहतर विकल्प? जानिए प्रोटीन, फाइबर और पोषण से जुड़े फायदे
हेल्थ डेस्क। सुबह का नाश्ता ऐसा हो जो सिर्फ पेट भरने के बजाय शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी दे, तो काले चने एक आसान और किफायती विकल्प हो सकते हैं। इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाने की परंपरा लंबे समय से भारतीय खान-पान का हिस्सा रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि भीगे हुए चने किसी बीमारी का इलाज हैं या इन्हें खाने से अपने आप वजन कम होने लगेगा।
काले चनों की खासियत इनमें मौजूद प्लांट प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व हैं। सही मात्रा में और संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इन्हें शामिल किया जाए तो यह रोज के पोषण को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
प्रोटीन के लिए शाकाहारी विकल्प
जो लोग मांस, अंडे या दूसरे पशु-आधारित खाद्य पदार्थ कम खाते हैं, उनके लिए चने प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का उपयोगी स्रोत हैं। शरीर को प्रोटीन मांसपेशियों समेत कई ऊतकों के निर्माण और रखरखाव के लिए चाहिए।
हालांकि, केवल चने खाने से शरीर की पूरी प्रोटीन जरूरत पूरी हो जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं है। दिनभर के भोजन में दाल, दूध या दही, सोया, अनाज, मेवे और अन्य उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना ज्यादा संतुलित तरीका है।
फाइबर की वजह से देर तक भरा रह सकता है पेट
काले चनों का एक महत्वपूर्ण पोषण लाभ इनमें मौजूद फाइबर है। फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज में मदद करता है और भोजन के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में योगदान दे सकता है।
यही वजह है कि सुबह के समय चने खाने से कुछ लोगों को दोपहर से पहले बार-बार स्नैकिंग की जरूरत कम महसूस हो सकती है। अगर इन्हें वजन प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जा रहा है, तो कुल कैलोरी, भोजन की गुणवत्ता और नियमित शारीरिक गतिविधि को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
आयरन और फोलेट भी मिलते हैं
काले चने सिर्फ प्रोटीन और फाइबर तक सीमित नहीं हैं। इनमें आयरन और फोलेट सहित कई सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि फोलेट कोशिकाओं के निर्माण और विभाजन से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति में आयरन की कमी या एनीमिया की पुष्टि हो चुकी है, तो केवल चने को उपचार मानना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार जांच व उपचार जरूरी होता है।
रातभर भिगोने से क्या फायदा होता है?
चनों को भिगोने का सबसे स्पष्ट फायदा उनकी बनावट और पकाने में आसानी से जुड़ा है। पानी में लंबे समय तक रहने से चने नरम हो जाते हैं और बाद में उन्हें पकाना आसान हो सकता है।
कुछ लोगों को भिगोए हुए चने अपेक्षाकृत आसानी से खाने योग्य लगते हैं। हालांकि, कच्चे या अधपके चने हर व्यक्ति को आसानी से पचें, यह जरूरी नहीं है।
अगर चने खाने के बाद गैस, पेट फूलना या भारीपन होता है, तो मात्रा कम करना और उन्हें अच्छी तरह उबालकर खाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
भीगे चने खाने का सही तरीका क्या है?
रात में चने भिगोते समय उन्हें पर्याप्त पानी में रखें। सुबह उनका पानी निकालकर चनों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।
इसके बाद अपनी सहनशीलता के अनुसार उन्हें सीधे खाया जा सकता है या हल्का उबालकर इस्तेमाल किया जा सकता है। स्वाद और पोषण बढ़ाने के लिए इनमें खीरा, टमाटर, नींबू और थोड़े मसाले मिलाए जा सकते हैं।
एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा खाने के बजाय अपनी पाचन क्षमता के अनुसार शुरुआत करना बेहतर है।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग होता है। कुछ लोगों को चने और अन्य दालों से गैस या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है। ऐसे लोगों को छोटी मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए।
जिन लोगों को किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी है या डॉक्टर ने किसी विशेष बीमारी के कारण खास डाइट बताई है, उन्हें सामान्य हेल्थ टिप्स के बजाय अपनी चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
खासकर किसी पोषक तत्व की कमी, पाचन संबंधी समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति में केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को समाधान मानना सही नहीं है।
काले चने को हेल्दी नाश्ता बनाने का आसान तरीका
सुबह भीगे चनों को अकेले खाने के बजाय उन्हें एक छोटे पौष्टिक सलाद की तरह तैयार किया जा सकता है। चने में खीरा, टमाटर, नींबू और थोड़ी मात्रा में मसाले मिलाकर खाएं। इससे नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व शामिल हो जाते हैं।
लेकिन सबसे जरूरी बात मात्रा और पूरी डाइट का संतुलन है। सिर्फ एक “हेल्दी फूड” जोड़ने से खान-पान संतुलित नहीं बनता। पूरे दिन पर्याप्त सब्जियां, फल, अनाज, प्रोटीन स्रोत और पानी लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।



