नरसिंहपुर में लोकायुक्त का ट्रैप: ऑडिट में आपत्ति नहीं लगाने के बदले रिश्वत का आरोप, 8 हजार लेते अधिकारी पकड़ाए
नरसिंहपुर: सहकारी समिति के ऑडिट को लेकर रिश्वत मांगने के आरोप ने नरसिंहपुर में सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने एक ट्रैप कार्रवाई में सहकारिता विभाग के ऑडिट अधिकारी राजेंद्र सिंह और प्रभारी प्रबंधक अमित श्रीवास्तव को आरोपी बनाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार ऑडिट करने और आपत्ति नहीं लगाने के बदले 20 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसके बाद 8 हजार रुपये में कथित तौर पर सौदा तय हुआ।
लोकायुक्त के मुताबिक, शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को रकम देने के लिए भेजा। कथित तौर पर 8 हजार रुपये लेते समय कार्रवाई की गई। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
ऑडिट की प्रक्रिया से शुरू हुआ विवाद
मामला नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव क्षेत्र की एक सेवा सहकारी समिति से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अशोक कुमार पटेल समिति प्रबंधक के तौर पर कार्यरत हैं। उनके अनुसार समिति के वर्ष 2025-26 के ऑडिट को लेकर वह संबंधित ऑडिट अधिकारी से मिले थे।
रूस की संसद में कितनी सीटें हैं? ऐसे होता है चुनाव, 450 सीटों वाली ड्यूमा का पूरा गणित
शिकायत में आरोप लगाया गया कि ऑडिट करने और रिपोर्ट में आपत्ति नहीं लगाने के बदले 20 हजार रुपये की मांग की गई। बातचीत के बाद कथित तौर पर 8 हजार रुपये देने पर सहमति बनी।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिश्वत की मांग और उससे जुड़े आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
लोकायुक्त ने ऐसे बिछाया ट्रैप
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने पहले आरोपों का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप की योजना तैयार की गई।
शिकायतकर्ता को निर्धारित रकम लेकर आरोपी से मिलने के लिए भेजा गया। कथित तौर पर पैसे लेने के लिए उसे नरसिंहपुर स्थित डीआर कार्यालय बुलाया गया था।
जैसे ही 8 हजार रुपये की रकम दिए जाने की प्रक्रिया हुई, सादे कपड़ों में मौजूद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई कर दी। लोकायुक्त की टीम में टीएलओ निरीक्षक राहुल गजभिए, निरीक्षक जितेंद्र यादव और जबलपुर लोकायुक्त के अन्य अधिकारी शामिल बताए गए हैं।
रूस की संसद में कितनी सीटें हैं? ऐसे होता है चुनाव, 450 सीटों वाली ड्यूमा का पूरा गणित
प्रभारी प्रबंधक को भी बनाया गया आरोपी
इस कार्रवाई में केवल ऑडिट अधिकारी ही जांच के दायरे में नहीं हैं। लोकायुक्त ने प्रभारी प्रबंधक अमित श्रीवास्तव को भी सह आरोपी बनाया है।
अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना होगा कि कथित रिश्वत की मांग में दोनों की भूमिका क्या थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े अन्य तथ्य क्या हैं। ट्रैप में किसी व्यक्ति के पकड़े जाने के बाद भी मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग से चलती है।
20 हजार की मांग, 8 हजार पर कथित सौदा
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू रकम का अंतर है। शिकायतकर्ता के अनुसार शुरुआत में 20 हजार रुपये मांगे गए थे, लेकिन बातचीत के बाद 8 हजार रुपये में रकम तय हुई।
ऐसे मामलों में लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई का उद्देश्य केवल रकम बरामद करना नहीं होता, बल्कि शिकायत में लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोप से जुड़े साक्ष्य जुटाना भी होता है। आगे की जांच में बातचीत, कार्रवाई के दौरान मौजूद परिस्थितियों और अन्य साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
सहकारी समितियों में ऑडिट क्यों अहम है?
सहकारी समितियों का ऑडिट केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। इसमें समिति के वित्तीय लेन-देन, रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाती है। ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियां समिति के कामकाज और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर असर डाल सकती हैं।
इसी वजह से ऑडिट से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि किसी अधिकारी पर आपत्ति हटाने या ऑडिट प्रक्रिया को प्रभावित करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगता है, तो यह केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं रह जाता, बल्कि संस्थागत जवाबदेही का सवाल भी बन जाता है।
कार्रवाई के बाद आगे क्या?
लोकायुक्त कार्रवाई के बाद अब मामले की जांच आगे बढ़ेगी। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में 2018 के संशोधन के तहत प्रावधानों में कार्रवाई की गई है। हालांकि, लागू धाराओं की अंतिम स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के रिकॉर्ड पर निर्भर करेगी।
इस तरह के ट्रैप मामलों में आगे की प्रक्रिया यह तय करने में महत्वपूर्ण होती है कि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोप किस हद तक प्रमाणित होते हैं। इसलिए फिलहाल दोनों आरोपियों को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
रिश्वत के खिलाफ कार्रवाई से बड़ा संदेश
नरसिंहपुर की यह कार्रवाई एक व्यापक सवाल भी सामने रखती है—सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए। लोकायुक्त जैसी एजेंसियों की ट्रैप कार्रवाई शिकायतों पर तत्काल जांच और कार्रवाई का एक माध्यम है, लेकिन भ्रष्टाचार को लंबे समय में कम करने के लिए प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, रिकॉर्ड की निगरानी और जिम्मेदारी की स्पष्ट व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।
इस मामले में अब सबसे ज्यादा नजर आगे की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर रहेगी। जांच से ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पूरी तस्वीर क्या है और मामले में किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।



