ताड़ोकी-रावघाट रेलखंड पर यात्री ट्रेन की राह साफ, CRS मंजूरी के बाद बढ़ी उम्मीद
रावघाट/कांकेर। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना अब उस चरण में पहुंच गई है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। ताड़ोकी से रावघाट के बीच रेल परिचालन के लिए रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) की सुरक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने की तैयारियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि नियमित यात्री ट्रेन की अंतिम तारीख और समय-सारणी रेलवे की ओर से आधिकारिक रूप से घोषित किया जाना बाकी है।
करीब 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना केवल एक नई रेल लाइन नहीं है। इसका महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह औद्योगिक जरूरतों और दूरस्थ क्षेत्रों की यात्री कनेक्टिविटी, दोनों को एक ही रेल नेटवर्क से जोड़ती है। संसद में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना का दल्लीराजहरा-ताड़ोकी हिस्सा पहले ही कमीशन हो चुका था, जबकि ताड़ोकी-रावघाट लगभग 18 किलोमीटर का शेष खंड था।
पहले माल ढुलाई की क्षमता, अब यात्रियों के लिए उम्मीद
रावघाट रेलखंड पर 17 जून 2026 को 58 बॉक्सएन वैगन वाली मालगाड़ी रेक के साथ नियंत्रित गति और सीमित भार में तकनीकी ट्रायल किया गया था। इस परीक्षण का उद्देश्य लाइन की संरचनात्मक सुरक्षा और परिचालन क्षमता जैसे तकनीकी पहलुओं को परखना था।
यह परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इस रेल लाइन का एक प्रमुख उद्देश्य रावघाट क्षेत्र से लौह अयस्क की ढुलाई को बेहतर बनाना भी है। भारतीय रेलवे और सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के सहयोग से विकसित परियोजना में बीएसपी की ओर से लगभग ₹1,735 करोड़ के निवेश की जानकारी सामने आई है।
यानी आने वाले समय में इस कॉरिडोर की भूमिका दोहरी हो सकती है—एक तरफ उद्योगों के लिए माल परिवहन और दूसरी तरफ स्थानीय आबादी के लिए यात्री संपर्क।
बस्तर के दूरस्थ इलाकों के लिए क्यों अहम है यह कनेक्टिविटी?
रेल लाइन किसी क्षेत्र में सिर्फ स्टेशन और पटरियां नहीं लाती, बल्कि आवागमन के तरीके को बदलने की क्षमता रखती है। ताड़ोकी से रावघाट तक यात्री सेवा शुरू होने पर आसपास के लोगों को सड़क परिवहन के अलावा रेल का विकल्प मिल सकता है।
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इसका असर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच पर पड़ सकता है। नौकरी, कारोबार और छोटे व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी नियमित रेल संपर्क आने-जाने की लागत और समय को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका वास्तविक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी यात्री ट्रेनें चलती हैं, उनका समय क्या रहता है और आसपास के स्टेशनों से स्थानीय परिवहन कितना प्रभावी है।
2008 से शुरू हुआ सफर अब अहम पड़ाव पर
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना की पृष्ठभूमि 2008 के समझौते से जुड़ी है। शुरुआती प्राथमिकता लौह अयस्क परिवहन के लिए रेल संपर्क विकसित करना थी, लेकिन समय के साथ इस परियोजना को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से भी जोड़ा गया।
दल्लीराजहरा से ताड़ोकी के बीच यात्री रेल सेवा वर्ष 2022 में शुरू हो चुकी थी। अब ताड़ोकी-रावघाट खंड जुड़ने से रेल नेटवर्क आगे बढ़ेगा। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पूरी दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना की लागत वर्तमान अनुमानों में लगभग ₹1,628 करोड़ दर्ज की गई है।
आगे क्या होगा?
CRS की सुरक्षा स्वीकृति के बाद भी नियमित यात्री सेवा शुरू करने के लिए रेलवे को परिचालन संबंधी व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी। इसमें ट्रेन संचालन की योजना, समय-सारणी, स्टाफ, स्टेशन सुविधाएं और अन्य परिचालन तैयारियां शामिल हैं।
इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ताड़ोकी-रावघाट खंड तकनीकी और सुरक्षा जांच के महत्वपूर्ण चरण से आगे बढ़ चुका है। अब स्थानीय लोगों की नजर रेलवे की आधिकारिक घोषणा पर है कि इस नए रेल संपर्क पर यात्री ट्रेन कब से नियमित रूप से चलनी शुरू होगी।



