श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम मजबूत, लेकिन
नई दिल्ली। भारतीय टी20 टीम के कप्तान के तौर पर श्रेयस अय्यर की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरी रही, लेकिन पिछले दो दौरों ने उनकी कप्तानी को मजबूती दी है। जिम्बाब्वे और अफगानिस्तान के खिलाफ भारत ने लगातार 3-0 से सीरीज जीती। इसके बावजूद अय्यर के निजी बल्लेबाजी आंकड़े एक अलग कहानी बताते हैं। कप्तान के रूप में टीम को संभालने की जिम्मेदारी उन्होंने अच्छी तरह निभाई है, लेकिन बल्लेबाज के तौर पर उनसे जिस निरंतरता की उम्मीद है, वह अभी नजर नहीं आई है।
BCCI ने जून 2026 में अय्यर को भारत का नया टी20 कप्तान नियुक्त किया था। उनके नेतृत्व में पहला चरण आसान नहीं रहा। आयरलैंड के खिलाफ भारत 2-0 से सीरीज हार गया और इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज में भारत 4-0 से पिछड़ गया, जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हुआ था। इसके बाद जिम्बाब्वे में टीम ने वापसी की और तीनों मुकाबले जीतकर अय्यर को कप्तान के तौर पर पहली सीरीज जीत मिली।
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जिम्बाब्वे में रन आए, लेकिन बड़ी पारी नहीं
जिम्बाब्वे के खिलाफ अय्यर ने तीन मैचों में 28, 25 और 27 रन* बनाए। यानी कुल 80 रन। उनका स्ट्राइक रेट उपयोगी रहा, लेकिन तीनों पारियों में वे 30 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। दिलचस्प बात यह है कि दूसरे टी20 में इशान किशन के साथ उनकी 66 रन की साझेदारी ने भारत को लक्ष्य का पीछा करने में मदद की।
अफगानिस्तान सीरीज में भी वही पैटर्न
सितंबर में अफगानिस्तान के खिलाफ तीन टी20 मैचों में अय्यर ने 8, 11 और 29 रन* बनाए। कुल 48 रन के साथ उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी 29 रन रही। भारत ने यह सीरीज भी 3-0 से अपने नाम की, लेकिन कप्तान की व्यक्तिगत बल्लेबाजी में बड़ी पारी का इंतजार जारी रहा। BCCI ने इस सीरीज के लिए अय्यर को कप्तान बनाए रखने की आधिकारिक पुष्टि की थी।
इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ अय्यर का बल्ला जरूर शानदार चला था। पांच टी20 पारियों में उन्होंने 218 रन बनाए, जिसमें 80 रन की नाबाद पारी भी शामिल थी। इसका मतलब यह है कि समस्या उनकी क्षमता की नहीं, बल्कि उस क्षमता को लगातार मैच-दर-मैच दोहराने की है।
अब असली परीक्षा लगातार प्रदर्शन की
टी20 क्रिकेट में कप्तान का योगदान केवल रन से नहीं मापा जाता, लेकिन शीर्ष क्रम के बल्लेबाज के लिए लगातार प्रभावी पारियां टीम के संतुलन को मजबूत करती हैं। अय्यर की पिछली दो सीरीज का आंकड़ा बताता है कि भारत जीत रहा है, पर कप्तान से बल्ले के जरिए अतिरिक्त प्रभाव अभी अपेक्षित स्तर पर नहीं आया है।
आने वाले मुकाबलों में अय्यर के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती होगी—कप्तानी के फैसलों के साथ अपनी बल्लेबाजी में भी निरंतरता लाना। खासकर तब, जब भारतीय टीम में कई युवा बल्लेबाज अपनी जगह के लिए मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। सितंबर की अफगानिस्तान सीरीज के बाद BCCI ने वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी टी20 मुकाबलों के लिए भी अय्यर को कप्तान बनाया है, इसलिए उनके प्रदर्शन पर नजर बनी रहेगी।



