हार्ट अटैक के लक्षण दिखें तो 10 मिनट का इंतजार नहीं, तुरंत उठाएं ये कदम
नई दिल्ली। सीने में अचानक दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मितली या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन और जबड़े तक फैलना—इन लक्षणों को गैस, थकान या घबराहट समझकर टालना भारी पड़ सकता है। हार्ट अटैक में दिल की मांसपेशी तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति कम या बंद हो जाती है और उपचार में देरी होने पर नुकसान बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस स्थिति में समय को निर्णायक मानता है।
SEMICON India 2026: भारत के चिप मिशन को नई रफ्तार, PM मोदी ने बताया विकास का अगला रास्ता
हालांकि सोशल मीडिया पर प्रचलित “पहले 10 मिनट में ही जान बचती है” जैसी लाइन को सटीक मेडिकल नियम नहीं माना जाना चाहिए। ऐसा कोई तय 10-मिनट का सार्वभौमिक काउंटडाउन नहीं है। वास्तविक संदेश यह है कि हर मिनट की देरी महत्वपूर्ण हो सकती है, इसलिए लक्षण शुरू होते ही कार्रवाई करनी चाहिए। जितनी जल्दी बंद धमनी में रक्त प्रवाह बहाल किया जाता है, उतना ही हृदय की मांसपेशी को बचाने का मौका बढ़ता है।
पहला काम: तुरंत इमरजेंसी मदद लें
भारत में गंभीर मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में 112 पर कॉल किया जा सकता है। सरकारी Emergency Response Support System के अनुसार 112 पूरे भारत में एकीकृत आपातकालीन नंबर है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं भी शामिल हैं। मरीज को खुद कार या बाइक चलाकर अस्पताल ले जाने के बजाय एंबुलेंस बुलाना बेहतर है, क्योंकि मेडिकल टीम रास्ते में प्राथमिक सहायता शुरू कर सकती है और अस्पताल को भी पहले से तैयार किया जा सकता है।
Punjab Rail Roko: किसानों का आंदोलन फिर तेज, MSP से लेकर बिजली कानून तक कई मांगें
सबसे बड़ी गलती यह होती है कि व्यक्ति पहले यह तय करने की कोशिश करता है कि मामला हार्ट अटैक है या गैस। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार संदेह होने पर भी तुरंत आपातकालीन मदद लेना चाहिए। सीने का दर्द कुछ मिनटों तक रह सकता है, कम-ज्यादा हो सकता है या लौटकर फिर आ सकता है।
एस्पिरिन की सलाह में सावधानी जरूरी
एस्पिरिन को लेकर इंटरनेट पर अक्सर बिना शर्त सलाह दी जाती है, लेकिन मामला इतना सरल नहीं है। AHA के 2024 First Aid Guidelines के अनुसार, होश में मौजूद ऐसे वयस्क को, जिसे गैर-चोट संबंधी तीव्र सीने का दर्द हो, 162–325 mg एस्पिरिन चबाकर निगलने की सलाह दी जा सकती है, लेकिन तभी जब उसे एस्पिरिन से एलर्जी न हो और किसी स्वास्थ्यकर्मी ने इसे न लेने को न कहा हो। किसी भी संदेह की स्थिति में EMS के आने तक इंतजार करना उचित है।
इसलिए “हर घर में ब्लड थिनर रखें और लक्षण आते ही खा लें” जैसी सलाह सही नहीं है। एस्पिरिन दर्द की सामान्य गोली नहीं है और कुछ लोगों में रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती है। इसे आपातकालीन कॉल करने में बिल्कुल देरी किए बिना, और उपयुक्त होने पर ही लिया जाना चाहिए।
मरीज को किस स्थिति में रखें?
सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो व्यक्ति को ऐसी आरामदायक स्थिति में बैठाना आम तौर पर उचित है, जिसमें सांस लेने में आसानी हो। लेकिन “हार्ट अटैक में कभी लेटना नहीं चाहिए” कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है। मरीज को अनावश्यक चलने-फिरने या खुद वाहन चलाने से बचाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
महिलाओं में लक्षण सिर्फ सीने के दर्द तक सीमित नहीं
महिलाओं में भी सीने में दर्द या दबाव सामान्य लक्षण हो सकता है, लेकिन सांस फूलना, मितली, असामान्य थकान, पीठ, कंधे या जबड़े में दर्द जैसे संकेत अधिक आसानी से नजरअंदाज हो सकते हैं। इसलिए “सीने में दर्द नहीं है, तो हार्ट अटैक नहीं हो सकता” मान लेना खतरनाक है।
और एक जरूरी अंतर समझना भी जरूरी है। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही चीज नहीं हैं। हार्ट अटैक में रक्त प्रवाह बाधित होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत गतिविधि गड़बड़ होने से व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है और सामान्य सांस नहीं लेता। ऐसी स्थिति में 112 पर कॉल करते हुए तुरंत CPR शुरू करनी चाहिए और AED उपलब्ध हो तो उसका इस्तेमाल करना चाहिए।
यानी हार्ट अटैक के मामले में सबसे कीमती चीज कोई घरेलू नुस्खा नहीं, बल्कि समय पर पहचान, तुरंत इमरजेंसी कॉल और जल्द अस्पताल पहुंचना है। यही शुरुआती मिनट आगे होने वाले हृदय नुकसान की मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं।



