बीजापुर में नक्सली डंप पर सुरक्षाबलों की नजर
बीजापुर। बस्तर में माओवादी विरोधी अभियान के बीच बीजापुर के फरसेगढ़ इलाके से हुई बरामदगी ने सुरक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौती की एक अहम तस्वीर सामने रखी है। बड़ेआलवाड़ा के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने हथियार, बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस, विस्फोटक सामग्री और संचार उपकरणों का एक डंप बरामद किया है। यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जंगलों में छिपाकर रखे गए ऐसे डंप किसी सक्रिय नेटवर्क के लिए लंबे समय तक सामग्री का भंडार बने रह सकते हैं।
पुलिस के अनुसार 15 सितंबर को मिली सूचना के बाद फरसेगढ़ थाना पुलिस, डीआरजी बीजापुर और बीडीएस की संयुक्त टीम ने इलाके में सर्चिंग की। तलाशी के दौरान संदिग्ध रूप से छिपाई गई सामग्री मिली। मौके पर मौजूद बम डिस्पोजल टीम ने आवश्यक सुरक्षा प्रक्रिया और डिमाइनिंग के बाद सामग्री को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया।
सिर्फ हथियार नहीं, संचार और विस्फोटक सामग्री भी मिली
बरामद सामान में 315 बोर का एक देशी कट्टा, उसके 49 जिंदा राउंड, 303 रायफल के 25 राउंड और 12 बोर के 34 कारतूस शामिल हैं। यानी कुल मिलाकर 108 जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके साथ 303 रायफल के कुछ हिस्से और खाली मैगजीन भी मिली है।
सबसे गंभीर पहलू विस्फोटक सामग्री की बरामदगी है। टीम को करीब 8 किलोग्राम जिलेटिन, डेटोनेटर वायर, इलेक्ट्रॉनिक और कॉपर वायर, बैटरी, स्विच तथा दूसरे उपकरण मिले। इसके अलावा छह वॉकी-टॉकी सेट और चार्जर भी बरामद किए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि छिपाया गया सामान केवल हथियारों का भंडार नहीं था, बल्कि संचार और विस्फोटक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी इसमें शामिल थी। हालांकि बरामद सामग्री का इस्तेमाल किस विशेष घटना या योजना के लिए होना था, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जंगल में छिपे डंप की तलाश क्यों अहम है?
माओवादी प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों के लिए चुनौती केवल मुठभेड़ तक सीमित नहीं होती। जंगलों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में छिपाए गए हथियार एवं आवश्यक सामान सुरक्षा अभियान के दौरान लंबे समय तक उपयोग किए जा सकते हैं। ऐसे डंप मिलने से सुरक्षा एजेंसियों को न केवल संभावित हमले की सामग्री हटाने में मदद मिलती है, बल्कि आगे की जांच के लिए भी सुराग मिल सकते हैं।
खासतौर पर संचार उपकरणों की बरामदगी जांच एजेंसियों के लिए उपयोगी हो सकती है। इनकी तकनीकी जांच से सामग्री के स्रोत, आपूर्ति श्रृंखला या नेटवर्क की अन्य कड़ियों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना रहती है। फिलहाल ऐसी किसी विस्तृत जांच का परिणाम सार्वजनिक नहीं हुआ है।
अभियान का अगला फोकस क्या हो सकता है?
इस बरामदगी के बाद केवल जब्ती तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। पुलिस ने सामग्री को बीएनएसएस की धारा 106 के तहत जब्त कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना होगा कि यह डंप किसके नियंत्रण में था और यहां तक हथियार व विस्फोटक कैसे पहुंचे।
बीजापुर जैसे संवेदनशील जिले में ऐसी कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सुरक्षा बलों के लिए जंगल की भौगोलिक चुनौती के साथ-साथ छिपे लॉजिस्टिक नेटवर्क को तोड़ना भी जरूरी है। बड़ेआलवाड़ा की यह बरामदगी इसी व्यापक अभियान की एक कड़ी है। आने वाले दिनों में इस डंप से मिलने वाले जांच संबंधी सुराग यह तय कर सकते हैं कि सुरक्षा एजेंसियां इसके पीछे मौजूद नेटवर्क तक कितनी दूर पहुंच पाती हैं।



