छत्तीसगढ़ में दीपोत्सव से CGPSC तक सियासत
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ में आयोजित दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आयोजन और उससे जुड़े खर्च को लेकर सवाल उठाए, जिसके जवाब में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति जनता के समर्थन और आशीर्वाद का प्रतीक बताया। साव ने कहा कि ‘‘140 करोड़ जनता के आशीर्वाद के दीप’’ जल रहे हैं और जिन्हें खर्च का हिसाब चाहिए, वे संबंधित स्तर पर हिसाब मांगें।
दीपों पर सवाल से शुरू हुई राजनीतिक बहस
छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर भाजपा की ओर से बड़े स्तर पर दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए गए। भाजपा इस पहल को सेवा और जनभागीदारी से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से आयोजन में सरकारी मशीनरी और संभावित सार्वजनिक खर्च के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं। इस वजह से विवाद केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक कार्यक्रमों में सरकारी संसाधनों की भूमिका का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है।
अरुण साव ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस की आलोचनाओं का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी के लंबे सार्वजनिक जीवन और जन्मदिन पर लोगों की ओर से किए जा रहे आयोजनों का उल्लेख किया। उनके बयान में कांग्रेस पर परिवार-केंद्रित राजनीति और राजनीतिक विरोध के लिए मुद्दे उठाने जैसे आरोप भी लगाए गए। ये साव के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें कांग्रेस अपनी राजनीतिक दृष्टि से अलग तरह से देखती रही है।
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महंगाई और बेरोजगारी भी बहस के केंद्र में
प्रधानमंत्री के जन्मदिन के दिन कांग्रेस ने महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेरा। साव ने केंद्र की आर्थिक नीतियों का बचाव करते हुए भारत की महंगाई की तुलना दूसरे देशों से करने की बात कही और कांग्रेस के पाकिस्तान संबंधी राजनीतिक तंज पर भी प्रतिक्रिया दी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि जन्मदिन से जुड़ा आयोजन प्रदेश में व्यापक राजनीतिक बहस का माध्यम बन गया है।
CGPSC पर बयानबाजी, लेकिन उम्मीदवारों के लिए मुद्दा अलग
राज्य की राजनीति का दूसरा अहम विषय CGPSC State Service Examination 2025 है। आयोग ने 20 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू को ‘‘अपरिहार्य कारणों’’ से स्थगित कर दिया है। भर्ती प्रक्रिया 265 पदों से जुड़ी है और नई तारीखों की घोषणा का इंतजार उम्मीदवार कर रहे हैं।
अरुण साव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर पुराने कथित PSC घोटाले को लेकर हमला बोला और सरकार की निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता जताई। हालांकि उम्मीदवारों के नजरिए से तत्काल चिंता राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की अगली तारीख और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता है।
रावतपुरा फेस-2 कार्रवाई ने उठाया दूसरा सवाल
रायपुर के रावतपुरा फेस-2 में बिना लेआउट बने करीब 40 मकानों पर नगर निगम की कार्रवाई को लेकर साव ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा किया। उनका कहना था कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत है तो उसे शुरुआती स्तर पर रोका जाना चाहिए, ताकि बाद में तोड़फोड़ की नौबत न आए।
यही बिंदु इस विवाद को राजनीतिक बयानबाजी से आगे ले जाता है। अवैध निर्माण पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन नागरिकों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण यह सवाल है कि अनुमति, निरीक्षण और enforcement की व्यवस्था निर्माण शुरू होने के बाद ही सक्रिय क्यों होती है।
छत्तीसगढ़ में फिलहाल दीपोत्सव, महंगाई-बेरोजगारी, CGPSC भर्ती और अवैध निर्माण—चार अलग विषय एक ही राजनीतिक संवाद में दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर बहस का केंद्र बयानबाजी से अधिक खर्च, प्रशासनिक जवाबदेही और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे ठोस सवालों पर रह सकता है।



