गौरेला में रेत परिवहन को लेकर विवाद
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के गौरेला वन परिक्षेत्र में रेत परिवहन और वन विभाग की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला पंचायत सदस्य पवन पैकरा समेत शिकायतकर्ताओं ने गौरेला रेंजर ज्योत्सना पाण्डेय पर कथित अवैध वसूली और रेत परिवहन से जुड़े मामलों में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत कलेक्टर और मरवाही वनमंडल के DFO को सौंपने के साथ मुख्यमंत्री के नाम भी भेजी गई है। मामले में विभाग ने जांच कराने की बात कही है।
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शिकायत में 40-50 हजार रुपये तक लेने का दावा
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रेत से लदे ट्रैक्टरों को कार्रवाई के बाद कथित तौर पर 40 से 50 हजार रुपये तक की राशि लेकर छोड़ने की बात सामने आई है। कुछ शिकायतकर्ताओं ने कथित लेनदेन की जांच के लिए मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और संबंधित आर्थिक लेनदेन की पड़ताल कराने की मांग की है।
एक अन्य आरोप यह है कि आवास निर्माण जैसे कामों के लिए रेत ले जाने वाले लोगों से भी कथित रूप से पैसे मांगे गए। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि वन क्षेत्र के खुले रास्तों पर करीब 1,000 ट्रिप रेत जमा कर उसकी बिक्री की जा रही थी। इसके अलावा रेत, गिट्टी और मुरुम ले जाने वाले वाहनों से जुड़े मामलों की भी जांच की मांग की गई है।
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हालांकि, ये सभी बातें फिलहाल शिकायतकर्ताओं के आरोप और दावे हैं। जांच पूरी होने तक इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मामला सिर्फ कथित वसूली का नहीं, रेत कारोबार की निगरानी का भी
इस विवाद का बड़ा पहलू यह है कि गौरेला क्षेत्र में रेत परिवहन, वन क्षेत्र और खनिज संसाधनों से जुड़े नियमों का पालन कैसे कराया जा रहा है। यदि किसी वाहन पर कार्रवाई होती है तो उसके खिलाफ जुर्माने, जब्ती या अन्य वैधानिक प्रक्रिया का स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए।
इसी तरह यदि किसी अधिकारी पर अनधिकृत राशि लेने का आरोप लगता है तो शिकायत में बताए गए वाहन, मोबाइल नंबर, बैंकिंग या डिजिटल लेनदेन और संबंधित स्थानों की जांच यह स्पष्ट करने में मदद कर सकती है कि आरोपों में कितनी वास्तविकता है।
शिकायतकर्ताओं ने इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और कथित रूप से जुड़े लोगों की संपत्ति की जांच तथा मौके का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
DFO ने कहा- जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
मामला सामने आने के बाद मरवाही वनमंडल के DFO निशांत कुमार ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विभागीय स्तर पर संबंधित अधिकारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं और तथ्यों के सामने आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है।
अब जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में बताए गए वाहन, कथित भुगतान, रेत के भंडारण और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करने की जरूरत होगी; वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी होगा।
आगे जांच की पारदर्शिता होगी सबसे अहम
वन क्षेत्रों से जुड़े संसाधनों की निगरानी में प्रशासन के लिए दोहरी चुनौती रहती है—एक तरफ अवैध उत्खनन और परिवहन रोकना, दूसरी तरफ वैध गतिविधियों में लगे लोगों के साथ नियमों के मुताबिक कार्रवाई करना।
गौरेला का यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सवाल केवल एक अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का नहीं, बल्कि वन संसाधनों की निगरानी, कार्रवाई की पारदर्शिता और स्थानीय लोगों के भरोसे का भी है।



