CG Ex-Servicemen Recruitment 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती की प्रक्रिया से जुड़े भूतपूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) के आरक्षित पदों को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। अब सीधी भर्ती में यदि भूतपूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित पदों पर पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो उन रिक्तियों को अगले भर्ती वर्ष के लिए कैरी फॉरवर्ड करने के बजाय उसी भर्ती प्रक्रिया में अन्य पात्र अभ्यर्थियों की प्रावीण्य सूची (Merit List) के आधार पर भरा जा सकेगा। सरकार के आदेश में ऐसे पदों को अन्य पात्र अभ्यर्थियों से भरने के लिए राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड या किसी अन्य कार्यालय से NOC लेने की आवश्यकता भी नहीं बताई गई है।
यह बदलाव छत्तीसगढ़ भूतपूर्व सैनिक (राज्य की सिविल सेवाओं तथा पदों, तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी में रिक्तियों का आरक्षण) नियम, 1985 के नियम 4 के उप-नियम (3) से जुड़ा है। इसका सीधा असर उन सीधी भर्तियों पर पड़ेगा, जिनमें भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित पद निर्धारित किए जाते हैं।
बदलाव को आसान भाषा में समझें
मान लीजिए किसी सीधी भर्ती में कुछ पद भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित हैं। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने पर अगर उस आरक्षित हिस्से के लिए कोई पात्र भूतपूर्व सैनिक अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होता, तो अब केवल इस वजह से पद को अगले भर्ती वर्ष तक रोककर रखना जरूरी नहीं होगा।
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नए प्रावधान के अनुसार संबंधित पद को उसी भर्ती वर्ष में उपलब्ध अन्य पात्र अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर भरा जा सकेगा। यानी खाली पद को अगली भर्ती तक लंबित रखने की जगह मौजूदा चयन प्रक्रिया में ही नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
यह बदलाव किस नियम में हुआ?
सामान्य प्रशासन विभाग का स्पष्टीकरण वर्ष 1985 के भूतपूर्व सैनिक आरक्षण नियमों के नियम 4(3) के संदर्भ में जारी हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसे लोक विज्ञापन अथवा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CG Vyapam) के माध्यम से होने वाली संबंधित सीधी भर्तियों के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है कि नया प्रावधान भूतपूर्व सैनिकों के आरक्षण को खत्म करने की घोषणा नहीं है। इसका संबंध उस स्थिति से है जब आरक्षित पद के लिए भर्ती प्रक्रिया में पात्र भूतपूर्व सैनिक अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होता। ऐसी स्थिति में उस पद के आगे की भर्ती प्रक्रिया क्या होगी, इसे स्पष्ट किया गया है।
NOC की औपचारिकता भी हटाई गई
इस आदेश का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी प्रशासनिक औपचारिकता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यदि पात्र भूतपूर्व सैनिक नहीं मिलने के कारण संबंधित आरक्षित पद को अन्य पात्र अभ्यर्थी से भरना है, तो इसके लिए राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड या किसी अन्य कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेने की जरूरत नहीं होगी।
इसका व्यावहारिक असर यह हो सकता है कि विभागों को उस चरण पर अतिरिक्त पत्राचार या स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी नहीं करनी पड़ेगी और चयन सूची के आधार पर आगे की कार्रवाई अपेक्षाकृत सीधे की जा सकेगी।
सामान्य अभ्यर्थियों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस फैसले को केवल “सामान्य वर्ग की सीट बढ़ने” के रूप में समझना सही नहीं होगा। सरकारी आदेश का फोकस भूतपूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित पदों पर योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने की स्थिति पर है। उन पदों को अन्य पात्र अभ्यर्थियों से भरने की बात कही गई है। इसलिए किसी विशेष भर्ती में किस अभ्यर्थी को मौका मिलेगा, यह उस भर्ती के आरक्षण रोस्टर, संबंधित सेवा नियम, पद की श्रेणी और मेरिट सूची पर निर्भर करेगा।
यानी यह कहना ज्यादा सटीक है कि नई व्यवस्था से रिक्त पदों को लंबित रखने के बजाय उसी चयन प्रक्रिया में भरने का रास्ता साफ हुआ है।
भर्ती प्रक्रिया पर क्यों पड़ सकता है असर?
सरकारी भर्ती में एक पद के खाली रहने का मतलब केवल एक खाली संख्या नहीं होता। जब पद लंबे समय तक नहीं भरता, तो चयन प्रक्रिया का अगला चरण, नियुक्ति और विभाग में मानव संसाधन की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। नए प्रावधान का उद्देश्य इसी तरह की स्थिति में भर्ती को अगले वर्ष तक खिसकने से रोकना है। नईदुनिया ने भी GAD के स्पष्टीकरण को रुकी चयन प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने से जोड़कर रिपोर्ट किया है।
हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव अलग-अलग भर्तियों में अलग हो सकता है। जिस भर्ती में पर्याप्त पात्र भूतपूर्व सैनिक उपलब्ध हों, वहां यह वैकल्पिक प्रावधान लागू करने की स्थिति ही नहीं बनेगी। बदलाव मुख्य रूप से “योग्य भूतपूर्व सैनिक उपलब्ध नहीं होने” वाली स्थिति के लिए है।
कौन-कौन सी भर्तियां इससे प्रभावित हो सकती हैं?
यह प्रावधान हर सरकारी नौकरी पर स्वतः लागू मान लेना ठीक नहीं होगा। इसका संबंध उस भर्ती से होगा जिसमें संबंधित 1985 के भूतपूर्व सैनिक आरक्षण नियम लागू होते हैं और सीधी भर्ती के दौरान भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित पद निर्धारित किए गए हों।
इसीलिए किसी आगामी भर्ती का फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थी को केवल इस खबर के आधार पर अपनी पात्रता या चयन की संभावना नहीं माननी चाहिए। संबंधित विभाग का आधिकारिक भर्ती विज्ञापन, आरक्षण विवरण और लागू सेवा नियम अंतिम आधार होंगे।
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी भर्ती में किसी पद के लिए भूतपूर्व सैनिकों का एक आरक्षित पद है। चयन प्रक्रिया में कोई पात्र भूतपूर्व सैनिक उम्मीदवार नहीं मिलता।
पुरानी व्यवस्था की समझ:
पद को आगे के भर्ती वर्ष के लिए ले जाने की स्थिति बन सकती थी।
नए स्पष्टीकरण के बाद:
ऐसे पद को उसी भर्ती वर्ष में अन्य पात्र अभ्यर्थियों की प्रावीण्य सूची के आधार पर भरा जा सकेगा, और इसके लिए संबंधित सैनिक कल्याण कार्यालय से अलग NOC लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
अभ्यर्थियों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह बदलाव तभी उपयोगी होगा जब वे भर्ती की वास्तविक शर्तों को ध्यान से पढ़ें। किसी पद पर भूतपूर्व सैनिक आरक्षण कितने स्तर पर लागू है, वह किस श्रेणी में समायोजित होगा और खाली रहने पर किस नियम के तहत भरा जाएगा—इन सबका निर्धारण संबंधित भर्ती के दस्तावेजों से होगा।
इसलिए आगामी CG Vyapam या अन्य विभागीय सीधी भर्तियों में अभ्यर्थियों को आरक्षण से जुड़े कॉलम, पदवार रिक्तियां और चयन प्रक्रिया की शर्तें जरूर देखनी चाहिए।
आगे क्या बदलेगा?
इस आदेश का बड़ा प्रशासनिक असर यह हो सकता है कि भूतपूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित लेकिन पात्र उम्मीदवार न मिलने के कारण खाली रह जाने वाले पदों के मामले में एक भर्ती वर्ष से दूसरे भर्ती वर्ष तक इंतजार कम हो। साथ ही NOC से जुड़ी अतिरिक्त प्रक्रिया हटने से विभागों के लिए अंतिम नियुक्ति चरण को आगे बढ़ाना सरल हो सकता है। यह संभावित प्रशासनिक प्रभाव है; इसका वास्तविक असर आने वाली भर्तियों में जारी विज्ञापनों और चयन परिणामों से स्पष्ट होगा।
सबसे अहम बात यह है कि यह फैसला रिक्त पदों के प्रबंधन की प्रक्रिया बदलता है। भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित पद पहले पात्रता के आधार पर उन्हीं के लिए उपलब्ध रहेंगे; समस्या केवल तब पैदा होती है जब उस आरक्षित हिस्से के लिए योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलता। उस स्थिति में अब पद को अगले भर्ती वर्ष तक लंबित रखने के बजाय उसी भर्ती में मेरिट के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा।



