PF का ब्याज हमेशा टैक्स फ्री नहीं होता. अगर आप हर साल पीएफ में तय सीमा से ज्यादा पैसा जमा करते हैं और आईटीआर भरते समय इसकी सही जानकारी नहीं देते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है. इसलिए यह नियम जानना हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए जरूरी है.
हर पीएफ ब्याज टैक्स फ्री नहीं होता
ज्यादातर लोग मानते हैं कि ईपीएफ रिटायरमेंट के लिए सबसे सुरक्षित सेविंग्स ऑप्शन है और इसमें जमा पैसा और उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. लेकिन यह बात हर मामले में सही नहीं है. नियम कहते हैं कि अगर कर्मचारी अपने पीएफ खाते में तय सीमा से ज्यादा योगदान करता है, तो अतिरिक्त रकम पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ जाता है. अगर इस ब्याज की जानकारी आईटीआर में नहीं दी जाती, तो इनकम टैक्स विभाग नोटिस भेज सकता है.
कब लगता है पीएफ के ब्याज पर टैक्स
अगर किसी फाइनेंशियल ईयर में कर्मचारी का अपना ईपीएफ और वीपीएफ मिलाकर कुल योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो 2.5 लाख रुपये से ऊपर की रकम पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल माना जाता है. यह नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर के उन कर्मचारियों पर लागू होता है, जहां एम्प्लॉयर भी पीएफ में योगदान देता है. वहीं जिन मामलों में सिर्फ कर्मचारी ही योगदान करता है, जैसे जीपीएफ, वहां टैक्स फ्री ब्याज की सीमा 5 लाख रुपये सालाना है.
ईपीएफओ कैसे करता है हिसाब
अगर आपका योगदान 2.5 लाख रुपये की सीमा पार कर जाता है, तो ईपीएफओ आपके खाते को दो हिस्सों में बांट देता है. एक टैक्सेबल अकाउंट और दूसरा नॉन टैक्सेबल अकाउंट. सीमा से ज्यादा जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज को आपकी कुल आय में इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज के तहत जोड़ा जाता है. इसके बाद आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स देना होता है.
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आईटीआर भरते समय ये भूल न करें
अगर आप आईटीआर फाइल करते समय इस अतिरिक्त ब्याज की जानकारी नहीं देते हैं या उसे छुपा लेते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग के डेटा मिसमैच सिस्टम में यह पकड़ में आ सकता है. इसके बाद आपको नोटिस मिल सकता है. अगर आपकी बेसिक सैलरी का बड़ा हिस्सा पीएफ में जाता है या आप वीपीएफ के जरिए ज्यादा निवेश करते हैं, तो फाइनेंशियल ईयर खत्म होने पर अपना पीएफ पासबुक स्टेटमेंट जरूर देखें. अगर आपका योगदान तय सीमा से ज्यादा है, तो अतिरिक्त ब्याज की सही गणना करें और आईटीआर में सही कॉलम में उसकी जानकारी जरूर दें. इससे आप टैक्स, पेनल्टी और कानूनी नोटिस जैसी परेशानियों से बच सकते हैं.



