FIFA World Cup 2026: लियोनेल मेसी शायद ही कभी हारते हैं और स्पेन कभी नहीं हारता. हालिया सालों में तो ऐसा ही होता आया है. फुटबॉल वर्ल्ड कप के फाइनल में रविवार को फुटबॉल के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी और फुटबॉल की सबसे दबदबे वाली टीम आमने-सामने होंगी. मेसी और अर्जेंटीना का मुकाबला स्पेन की उस टीम से होगा, जो 2024 की शुरुआत से लगातार 37 मैचों से अजेय है. स्पेन और अर्जेंटीना, दोनों के लिए यह फाइनल मुकाबला कापी अहम है. वह इसलिए क्योंकि स्पेन के लिए यह 2010 के बाद अपना दूसरा वर्ल्ड कप जीतने का मौका है. वहीं, अर्जेंटीना के पास लगातार दो बार वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का मौका है.
इस बार का फुटबॉल वर्ल्ड कप भी बहुत खास रहा. वह इसलिए क्योंकि पहली बार 48 टीमें इसमें शामिल हुईं. जबकि, 2022 का वर्ल्ड कप 32 टीमों के बीच खेला गया था. और तो और इस बार 48 टीमों ने इस बार 104 मैच खेले, जबकि पिछली बार 64 मैच ही हुए थे. जिस तरह से भारत में क्रिकेट में पैसा बरसता है, वैसे ही दुनियाभर में फुटबॉल में जमकर पैसा आता है. इसका अंदाजा बस इसी बात से लगाया जा सकता है कि फाइनल की सबसे सस्ती टिकट की कीमत 21 लाख रुपये से ज्यादा है. जानते हैं फुटबॉल वर्ल्ड कप में कहां से पैसा आता है और कहां बरसता है?
फाइनल की टिकट की कीमत इतनी
अर्जेंटीना और स्पेन के बीच होने वाला वर्ल्ड कप फाइनल अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा स्पोर्ट्स इवेंट है. फोर्ब्स के मुताबिक, मैच शुरू होने से पहले ही टिकट की कीमतें 2 हजार डॉलर ज्यादा बढ़ गई हैं. TickPick के अनुसार, शनिवार सुबह तक सेकेंडरी मार्केट में फाइनल के लिए सबसे सस्ता टिकट 9,500 डॉलर का था, जबकि बुधवार को इसकी कीमत 6,943 डॉलर थी. SeatPick के डेटा के अनुसार, वर्ल्ड कप फाइनल के टिकट की औसत कीमत 15,331 डॉलर है. वहीं FIFA की आधिकारिक वेबसाइट पर फाइनल का सबसे सस्ता टिकट 21,995 डॉलर है. भारतीय करंसी में देखें तो फाइनल की सबसे सस्ती टिकट खरीदने के लिए ही 21 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करना होगा.
फाइनल जीतने वाले को कितना मिलेगा?
FIFA के प्रेसिडेंट जियानी इन्फेंटिनो ने वादा किया था कि यह वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के 96 साल के इतिहास का सबसे बड़ा इवेंट होगा. ऐसा हुआ भी, क्योंकि इस बार ज्यादा टीमें थीं और ज्यादा मैच भी. लेकिन इसे बड़ा सिर्फ ज्यादा टीमें और ज्यादा मैच ही नहीं बनाते हैं. बल्कि इसे बड़ा इसका पैसा भी बनाता है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनल जीतने वाली टीम को 5 करोड़ डॉलर (लगभग 481 करोड़ रुपये) तो रनर-अप टीम को 3.3 करोड़ डॉलर (लगभग 317 करोड़ रुपये) मिलेंगे. वहीं, तीसरे नंबर पर रही इंग्लैंड को 2.9 करोड़ डॉलर (लगभग 280 करोड़ रुपये) और चौथे पर रही फ्रांस को 2.7 करोड़ डॉलर (लगभग 260 करोड़ रुपये) मिलेंगे.
6.86 करोड़ रुपये का तो गोल्ड ही है ट्रॉफी में
फुटबॉल वर्ल्ड कप की ट्रॉफी भी इस बार काफी महंगी है. इसकी वजह है सोने की कीमत. वर्ल्ड कप ट्रॉफी का वजह 6.17 किलो है, जिसमें से 5 किलो का तो सिर्फ 18 कैरेट गोल्ड ही लगा है. फोर्ब्स की रिपोर्ट बताती है कि वर्ल्ड कप ट्रॉफी में लगे गोल्ड की कीमत 7.13 लाख डॉलर है. भारतीय करंसी के हिसाब से यह रकम 6.89 करोड़ रुपये से भी ज्यादा होती है. 2022 की तुलना में इस बार वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है. 2022 में ट्रॉफी की कीमत लगभग 2.77 लाख डॉलर थी. 1974 में जब इस ट्रॉफी का मौजूदा डिजाइन पेश किया गया था, तब इसकी कीमत लगभग 25 हजार डॉलर थी.
और FIFA को क्या मिलेगा?
वर्ल्ड कप से FIFA जो पैसा कमाती है, वह बहुत ज्यादा है. 2022 वर्ल्ड कप से FIFA को रिकॉर्ड 7.6 अरब डॉलर की कमाई हुई थी. इस बार यह आंकड़ा और बढ़ेगा. FIFA को चार साल के साइकल में 13 अरब डॉलर (लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये) का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है. FIFA की 2024 की एनुअल रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 13 अरब डॉलर में से लगभग 9 अरब डॉलर अकेले 2026 में आएंगे. यानी, वर्ल्ड कप से ही FIFA को 9 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद है. और ये पैसा आएगा कहां से? 9 अरब डॉलर में से 3.9 अरब डॉलर का रेवेन्यू ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से और 3 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई हॉस्पिटैलिटी राइट्स और टिकटों की बिक्री से आने की उम्मीद है. FIFA को फुटबॉल वर्ल्ड कप से जितनी कमाई होती है, उतनी तो इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी को ओलंपिक कराने से भी नहीं होती. 2024 के पेरिस ओलंपिक में IOC ने 4.4 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाया था.






