कोरबा : कटघोरा वनमंडल के वन परिक्षेत्र पसान अंतर्गत आने वाले तरईनार एवं पिपरहा गांव में बीती रात दल से बिछडक़र जीपीएम जिले से अचानक धमके लोनर हाथी ने जमकर तांडव मचाया। इस दौरान कई घरों तथा मकानों को नुकसान पहुंचाया। लोनर द्वारा उत्पात मचाए जाने से ग्रामीण दहशत में हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी ने गांव में जमकर उत्पात मचाया। कई कच्चे मकानों की दीवारें और छप्पर क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक पक्के मकान की दीवार को भी हाथी ने जोरदार धक्का मारकर नुकसान पहुंचाया। घरों के आसपास रखे घरेलू सामान को भी क्षति पहुंची। घटना से प्रभावित परिवारों में भय का वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि देर रात अचानक हाथी के चिंघाडऩे और मकानों को तोडऩे की आवाज सुनाई दी, जिससे पूरा गांव दहशत में आ गया।
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महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पूरी रात भय के साए में रहे। कई परिवारों ने रात खुले स्थानों अथवा अन्य सुरक्षित घरों में बिताई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। अधिकारियों और कर्मचारियों ने हाथी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखते हुए उसे आबादी क्षेत्र से बाहर जंगल की ओर खदेडऩे का प्रयास किया, जिसमें उन्हें सफलता मिली। वन विभाग की सक्रियता के कारण हाथी को समय रहते गांव से बाहर निकाल दिया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। वन विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का प्रारंभिक आकलन शुरू कर दिया है। विभाग द्वारा बताया गया कि जिन परिवारों के मकानों को क्षति पहुंची है, उन्हें शासन के नियमानुसार मुआवजा एवं सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए रात के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें तथा जंगल की ओर जाने से बचें। किसी भी स्थान पर हाथी दिखाई देने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है। साथ ही ग्रामीणों से हाथियों को छेडऩे, उनके पास जाने अथवा पटाखे फोडऩे जैसी गतिविधियों से बचने का अनुरोध भी किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से पसान क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ गई है। हाथियों के झुंड अक्सर जंगल से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंच रहे हैं, जिससे खेती-किसानी के साथ-साथ ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। किसान रातभर खेतों और घरों की रखवाली करने को मजबूर हैं। हाथियों के डर से बच्चे और महिलाएं भी भयभीत हैं।






