Career Guide Railway: आज के समय में युवाओं के सामने करियर के कई ऑप्शंस मौजूद हैं. कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, तो कोई देश की सेवा के लिए सेना या पुलिस में जाना चाहता है. वहीं, लाखों युवाओं का सपना भारतीय रेलवे में नौकरी पाने का भी होता है. खासकर लोको पायलट यानी ट्रेन चालक की नौकरी युवाओं को आकर्षित करती है, क्योंकि इसमें सम्मान, अच्छी सैलरी, सरकारी सुविधाएं और करियर ग्रोथ तीनों मिलते हैं. अगर आपने भी कभी ट्रेन को पटरी पर दौड़ते देख उसे चलाने का सपना देखा है, तो यह करियर ऑप्शन आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कि भारतीय रेलवे में लोको पायलट बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए, सिलेक्शन प्रोसेस और इस नौकरी में कितनी सैलरी व सुविधाएं मिलती हैं.
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लोको पायलट बनने के लिए क्या है योग्यता?
भारतीय रेलवे में लोको पायलट बनने के लिए उम्मीदवार का कम से कम 10वीं और 12वीं पास होना जरूरी है. इसके साथ ही उम्मीदवार के पास मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, वायरमैन, ऑटोमोबाइल या संबंधित ट्रेड में 2 साल का आईटीआई (ITI) सर्टिफिकेट होना चाहिए. उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 30 साल है. हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी जाती है.
कैसे होता है चयन?
लोको पायलट बनने के लिए उम्मीदवार को सबसे पहले भारतीय रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की ओर से कराए जाने वाले संयुक्त सहायक लोको पायलट (ALP) एग्जाम में पास होना पड़ता है. इसके सिलेक्शन प्रोसेस में शामिल हैं –
- दो चरणों की कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT-1 और CBT-2)
- साइकोमेट्रिक/एप्टीट्यूड टेस्ट
- मेडिकल टेस्ट
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
- इन सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को रेलवे की ओर से ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है.
ट्रेनिंग के बाद कहां होती है पहली पोस्टिंग?
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उम्मीदवारों की नियुक्ति असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के पद पर होती है. शुरुआत में उन्हें आमतौर पर मालगाड़ियों पर तैनात किया जाता है. इसके बाद प्रदर्शन और अनुभव के आधार पर बाद में उन्हें यात्री ट्रेनों और फिर एक्सप्रेस या प्रीमियम ट्रेनों को चलाने की जिम्मेदारी दी जाती है.
कितनी होती है सैलरी?
सातवें वेतन आयोग के अनुसार, असिस्टेंट लोको पायलट की शुरुआती बेसिक सैलरी 19,900 रुपए प्रति महीना होती है. समय के साथ प्रमोशन मिलने पर कर्मचारी सीनियर लोको पायलट बनते हैं, जहां बेसिक सैलरी 35,000 से 60,000 रुपए या उससे ज्यादा हो सकती है. महंगाई भत्ता और दूसरे भत्तों को जोड़ने के बाद कुल इन-हैंड सैलरी लगभग 40,000 से 80,000 रुपए प्रति महीना तक पहुंच सकती है.
सैलरी के अलावा मिलते हैं कई भत्ते
लोको पायलट को बेसिक सैलरी के अलावा कई दूसरे भत्ते भी दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं –
- महंगाई भत्ता (DA)
- हाउस रेंट अलाउंस (HRA)
- ट्रांसपोर्ट अलाउंस
- नाइट ड्यूटी अलाउंस
- ओवरटाइम भुगतान
- रनिंग अलाउंस (चलाए गए किलोमीटर के आधार पर)
- लंबी दूरी की ट्रेनों को चलाने वाले लोको पायलट को रनिंग अलाउंस के कारण ज्यादा सैलरी मिलती है.
कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
रेलवे कर्मचारियों को सैलरी के अलावा कई सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं. इनमें फ्री या रियायती रेल यात्रा, सरकारी आवास (जहां उपलब्ध हो), रेलवे अस्पतालों में इलाज, पेंशन, ग्रेच्युटी और बच्चों की शिक्षा से जुड़े कुछ खास लाभ शामिल हैं. यही वजह है कि रेलवे की नौकरी को सुरक्षित माना जाता है.
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जिम्मेदारी भरा होता है लोको पायलट का काम
लोको पायलट की ड्यूटी दिन और रात, दोनों शिफ्टों में हो सकती है. कई बार उन्हें लगातार कई घंटों तक ट्रेन चलानी पड़ती है. हजारों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होती है, इसलिए उन्हें हर समय पूरी सतर्कता रखनी होती है. इसी कारण रेलवे इस पद के लिए कड़ी ट्रेनिंग, रेग्युलर मेडिकल जांच और बेहतर शारीरिक व मानसिक फिटनेस को अनिवार्य मानता है. अगर आप अनुशासन, जिम्मेदारी और तकनीकी कामों में रुचि रखते हैं, तो लोको पायलट का करियर आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है.






