वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंता सामने आई है। वित्तीय सेवा कंपनी नुवामा की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ईरान संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल और कमजोर मानसून की स्थिति देश में महंगाई आधारित मंदी (Stagflation) का खतरा बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों कारकों का असर उपभोक्ता खर्च, उत्पादन लागत और आर्थिक विकास दर पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता आ सकती है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। दूसरी ओर, सामान्य से कम बारिश होने पर कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसके चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे महंगाई बढ़ने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार और नीति-निर्माताओं को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। महंगाई को नियंत्रित रखने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए समय पर कदम उठाना महत्वपूर्ण होगा। आने वाले महीनों में तेल कीमतों और मानसून की स्थिति पर बाजार और अर्थशास्त्रियों की विशेष नजर बनी रहेगी।


